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Lakhimpur Kheri News: बाघ को पकड़ने उतरीं हथिनियां पवनकली-सुलोचना
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 18 Mar 2026 12:45 AM IST
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हाथी पर सवार होकर बाघ की तलाश करते अधिकरी व विशेषज्ञ। स्रोत : वन विभाग
- फोटो : 1
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पलियाकलां। त्रिकौलिया और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का पर्याय बने बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। अब इस ऑपरेशन में दुधवा नेशनल पार्क की प्रशिक्षित हथिनियां पवनकली और सुलोचना को भी उतार दिया गया है, जिससे पूरे इलाके में हलचल बढ़ गई है।
पिछले चार दिनों से त्रिकौलिया के खेतों में डेरा डाले बाघ ने वन विभाग की सक्रियता बढ़ते ही अपनी लोकेशन बदल ली है। पैरों के निशान के आधार पर पता चला है कि बाघ अब महिपालपुरवा की ओर चला गया है। इसके बाद टीम ने महिपालपुरवा की घनी झाड़ियों में घेराबंदी कर दी है।
बाघ की सटीक लोकेशन ट्रेस करने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है। मंगलवार को पवनकली और सुलोचना की मदद से इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। हथिनियों ने बाघ को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन वह झाड़ियों में छिपा रहा और सामने नहीं आया।
अभियान का नेतृत्व कर रहे डॉ. दयाशंकर ने बताया कि शासन से अनुमति मिलने के बाद ट्रेंक्युलाइज गन और डार्ट (बेहोशी का इंजेक्शन) उपलब्ध करा दिए गए हैं। रेंजर विनय कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार को बाघ पूरी तरह निशाने पर नहीं आ सका, इसलिए डार्ट का प्रयोग नहीं किया गया।
वन विभाग की टीम मौके पर डटी हुई है और जैसे ही बाघ सही स्थिति में आएगा, उसे ट्रेंक्युलाइज कर काबू में कर लिया जाएगा।
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पिछले चार दिनों से त्रिकौलिया के खेतों में डेरा डाले बाघ ने वन विभाग की सक्रियता बढ़ते ही अपनी लोकेशन बदल ली है। पैरों के निशान के आधार पर पता चला है कि बाघ अब महिपालपुरवा की ओर चला गया है। इसके बाद टीम ने महिपालपुरवा की घनी झाड़ियों में घेराबंदी कर दी है।
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बाघ की सटीक लोकेशन ट्रेस करने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है। मंगलवार को पवनकली और सुलोचना की मदद से इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। हथिनियों ने बाघ को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन वह झाड़ियों में छिपा रहा और सामने नहीं आया।
अभियान का नेतृत्व कर रहे डॉ. दयाशंकर ने बताया कि शासन से अनुमति मिलने के बाद ट्रेंक्युलाइज गन और डार्ट (बेहोशी का इंजेक्शन) उपलब्ध करा दिए गए हैं। रेंजर विनय कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार को बाघ पूरी तरह निशाने पर नहीं आ सका, इसलिए डार्ट का प्रयोग नहीं किया गया।
वन विभाग की टीम मौके पर डटी हुई है और जैसे ही बाघ सही स्थिति में आएगा, उसे ट्रेंक्युलाइज कर काबू में कर लिया जाएगा।