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Lakhimpur Kheri News: हाथियों का कहर, 10 एकड़ गन्ने की फसल तबाह
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 04 Feb 2026 12:10 AM IST
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मझगईं। चौखड़ा फार्म क्षेत्र में सोमवार रात जंगल से निकले हाथियों के झुंड ने किसानों के खेतों पर धावा बोल दिया। उनकी करीब 10 एकड़ गन्ने की खड़ी फसल रौंदकर नष्ट कर दी। घटना से इलाके में दहशत और किसानों में भारी आक्रोश है।
मझगईं रेंज के खल्ला गुरुद्वारा के पास स्थित किसान गुरनाम सिंह, जगतार सिंह और जगदीप सिंह के खेतों में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। सुबह खेतों पर पहुंचे किसानों को जब उजड़ी फसल दिखाई दी तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया।
पीड़ित किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर गन्ने की फसल तैयार की थी। चीनी मिल से तौल पर्ची आने ही वाली थी लेकिन उससे पहले ही हाथियों ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। किसानों के अनुसार, यह नुकसान लाखों रुपये में है।
करीब एक माह पूर्व इसी क्षेत्र में हाथियों ने तार फेंसिंग तोड़कर भगवंतनगर निवासी राम बहादुर को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद वन विभाग ने न तो फेंसिंग की मरम्मत कराई और न ही हाथियों को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था की।
किसानों का आरोप है कि टूटी फेंसिंग और विभागीय उदासीनता के कारण हाथी बार-बार आबादी और खेतों में घुस रहे हैं। इससे न केवल फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों की जान भी खतरे में पड़ी है।
घटना के बाद पीड़ित किसानों ने तत्काल मुआवजा, स्थायी घेराबंदी और हाथियों की निगरानी के लिए ठोस कार्ययोजना लागू करने की मांग की है।
वन क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि नुकसान का आकलन कर लिया गया है और प्रभावित किसानों को नियमों के तहत मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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मझगईं रेंज के खल्ला गुरुद्वारा के पास स्थित किसान गुरनाम सिंह, जगतार सिंह और जगदीप सिंह के खेतों में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। सुबह खेतों पर पहुंचे किसानों को जब उजड़ी फसल दिखाई दी तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया।
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पीड़ित किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर गन्ने की फसल तैयार की थी। चीनी मिल से तौल पर्ची आने ही वाली थी लेकिन उससे पहले ही हाथियों ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। किसानों के अनुसार, यह नुकसान लाखों रुपये में है।
करीब एक माह पूर्व इसी क्षेत्र में हाथियों ने तार फेंसिंग तोड़कर भगवंतनगर निवासी राम बहादुर को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद वन विभाग ने न तो फेंसिंग की मरम्मत कराई और न ही हाथियों को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था की।
किसानों का आरोप है कि टूटी फेंसिंग और विभागीय उदासीनता के कारण हाथी बार-बार आबादी और खेतों में घुस रहे हैं। इससे न केवल फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों की जान भी खतरे में पड़ी है।
घटना के बाद पीड़ित किसानों ने तत्काल मुआवजा, स्थायी घेराबंदी और हाथियों की निगरानी के लिए ठोस कार्ययोजना लागू करने की मांग की है।
वन क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि नुकसान का आकलन कर लिया गया है और प्रभावित किसानों को नियमों के तहत मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
