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Lakhimpur Kheri News: तबले की थाप पर सपनों को दे रहीं उड़ान
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 15 Jun 2026 11:15 PM IST
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पलक मिश्रा
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लखीमपुर खीरी। तबले की थाप, ताल और लय के साथ शहर की कई छात्राएं अपने सपनों को नई उड़ान दे रही हैं। संगीत के प्रति लगाव और कुछ नया सीखने की इच्छा उन्हें तबले तक लेकर आई है।
आर्यकन्या महाविद्यालय में आयोजित तबला प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण लेने के बाद अब ये छात्राएं नियमित रियाज कर रही हैं और संगीत के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने का सपना संजोए हुए हैं।
महाविद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में छात्राओं को तबले की बारीकियां सिखाई गईं। प्रयागराज से आए डॉ. विशाल कुमार साहू और महाविद्यालय की संगीत शिक्षिका डॉ. शिवांगी सक्सेना ने छात्राओं को तबले के मुख्य वर्ण, बजाने की शैली, हाथों के सही रख-रखाव और तीन ताल बजाने की विधि का प्रशिक्षण दिया। पूरे माह चले इस शिविर में छात्राओं ने तबले की मूलभूत संरचना, विभिन्न तालों का अभ्यास, बोल, कायदा, रेला, टुकड़ा, मुखड़ा, संगत तथा एकल वादन की तकनीकों का सैद्धांतिक और व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
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प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद भी छात्राओं का अभ्यास नहीं रुका है। वे घर पर नियमित रियाज कर रही हैं और सीखी हुई बारीकियों को और बेहतर बनाने में जुटी हैं। उनका मानना है कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास बढ़ाने का भी माध्यम है।
डॉ. शिवांगी सक्सेना ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संगीत परंपरा से जोड़ना है। छात्राओं का उत्साह बताता है कि युवाओं में शास्त्रीय संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के प्रति रुचि बढ़ रही है। छात्राओं ने कहा कि संगीत उनके जीवन की आत्मा है और तबला सीखना उनके लिए गर्व की बात है।
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शिविर में सैद्धांतिक और व्यवहारिक दोनों तरह का प्रशिक्षण मिला। घर में रोजाना रियाज करती हैं। मेरा सपना है कि वह मंच पर प्रस्तुति देकर अपने जिले का नाम रोशन करूं।
-पलक मिश्रा, छात्रा
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तबला सीखने से उनमें एकाग्रता और अनुशासन बढ़ा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को समझने का अवसर मिला है, जिसे वह आगे भी जारी रखना चाहती हूं।
-राधिका वर्मा, छात्रा
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पहले तबला बजाना मुश्किल लगता था, लेकिन शिविर में प्रशिक्षकों ने आसान तरीके से सिखाया। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब अन्य वाद्ययंत्र सीखने के लिए भी प्रेरित हूं।
-महक श्रीवास्तव, छात्रा
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बचपन से ही संगीत में रुचि रही है। तबला प्रशिक्षण शिविर में शामिल होकर मैंने ताल और लय की बारीकियां सीखीं। अब मैं नियमित अभ्यास कर रही हूं।
-शाम्भवी मिश्रा, छात्रा
आर्यकन्या महाविद्यालय में आयोजित तबला प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण लेने के बाद अब ये छात्राएं नियमित रियाज कर रही हैं और संगीत के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने का सपना संजोए हुए हैं।
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महाविद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में छात्राओं को तबले की बारीकियां सिखाई गईं। प्रयागराज से आए डॉ. विशाल कुमार साहू और महाविद्यालय की संगीत शिक्षिका डॉ. शिवांगी सक्सेना ने छात्राओं को तबले के मुख्य वर्ण, बजाने की शैली, हाथों के सही रख-रखाव और तीन ताल बजाने की विधि का प्रशिक्षण दिया। पूरे माह चले इस शिविर में छात्राओं ने तबले की मूलभूत संरचना, विभिन्न तालों का अभ्यास, बोल, कायदा, रेला, टुकड़ा, मुखड़ा, संगत तथा एकल वादन की तकनीकों का सैद्धांतिक और व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद भी छात्राओं का अभ्यास नहीं रुका है। वे घर पर नियमित रियाज कर रही हैं और सीखी हुई बारीकियों को और बेहतर बनाने में जुटी हैं। उनका मानना है कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास बढ़ाने का भी माध्यम है।
डॉ. शिवांगी सक्सेना ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संगीत परंपरा से जोड़ना है। छात्राओं का उत्साह बताता है कि युवाओं में शास्त्रीय संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के प्रति रुचि बढ़ रही है। छात्राओं ने कहा कि संगीत उनके जीवन की आत्मा है और तबला सीखना उनके लिए गर्व की बात है।
शिविर में सैद्धांतिक और व्यवहारिक दोनों तरह का प्रशिक्षण मिला। घर में रोजाना रियाज करती हैं। मेरा सपना है कि वह मंच पर प्रस्तुति देकर अपने जिले का नाम रोशन करूं।
-पलक मिश्रा, छात्रा
तबला सीखने से उनमें एकाग्रता और अनुशासन बढ़ा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को समझने का अवसर मिला है, जिसे वह आगे भी जारी रखना चाहती हूं।
-राधिका वर्मा, छात्रा
पहले तबला बजाना मुश्किल लगता था, लेकिन शिविर में प्रशिक्षकों ने आसान तरीके से सिखाया। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब अन्य वाद्ययंत्र सीखने के लिए भी प्रेरित हूं।
-महक श्रीवास्तव, छात्रा
बचपन से ही संगीत में रुचि रही है। तबला प्रशिक्षण शिविर में शामिल होकर मैंने ताल और लय की बारीकियां सीखीं। अब मैं नियमित अभ्यास कर रही हूं।
-शाम्भवी मिश्रा, छात्रा

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