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Lakhimpur Kheri News: अस्पताल या जुगाड़घर... जर्जर बेड, लकड़ी से टिकी ड्रिप
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 08 Apr 2026 11:13 PM IST
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लकड़ी के सहारे खड़ा ड्रिप स्टैंड… भानपुरी खजुरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जुगाड़ के भरोसे
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सम्पूर्णानगर। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भानपुरी खजुरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल व्यवस्थाओं के बीच जुगाड़ के सहारे संचालित हो रहा है। यहां जर्जर बेड और लकड़ी से बांधकर खड़े किए गए ड्रिप स्टैंड के सहारे मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
केंद्र पर फार्मासिस्ट, सफाई कर्मी और लैब टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। करीब 50 हजार की आबादी इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है, लेकिन यहां एक चिकित्सक, एक स्टाफ नर्स, एक सीएचओ और एक वार्ड बाॅय मात्र चार लोगों के सहारे पूरी व्यवस्था संचालित हो रही है। फार्मासिस्ट पिछले तीन वर्षों से नहीं है, जबकि लैब टेक्नीशियन सप्ताह में केवल एक दिन आता है।
यह स्वास्थ्य केंद्र भानपुरी खजुरिया, गोविंदनगर, कमलापुर समेत पड़ोसी जनपद पीलीभीत के टाटरगंज, बाजारघाट और कम्बोजनगर क्षेत्र के लोगों के लिए एकमात्र सहारा है। इसके बावजूद यहां की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं। बता दें कि वर्ष 2007 में केंद्र का हैंडओवर हुआ था। उस समय बने चार बेड के वार्ड आज भी उसी हालत में हैं, जिनमें अब तक कोई सुधार या नए संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई है।
बुधवार को केंद्र पर तैनात चिकित्सक डॉ. उदय भान मौर्य मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि 14 मरीज खुजली, बुखार, टाइफाइड और सिरदर्द जैसी बीमारियों से पीड़ित इलाज के लिए आए हैं। केंद्र पर 195 प्रकार की दवाओं का प्रावधान है, लेकिन वास्तविकता में केवल 100 से 120 दवाएं ही उपलब्ध हो पाती हैं।
डॉ. मौर्य ने बताया कि वह संविदा पर कार्यरत हैं और उन्हें किसी प्रकार का वित्तीय अधिकार या बजट नहीं मिलता। सीमित संसाधनों के बीच मरीजों को परामर्श और दवा उपलब्ध कराना ही उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिदिन 15 से 25 मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिनमें कई मरीज पहले अन्य स्थानों से इलाज कराकर भी पहुंचते हैं।
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खजुरिया पीएचसी में जो भी अव्यवस्थाएं हैं, उनकी जानकारी कराकर सब सही कराया जाएगा। दवाओं की कोई कमी नहीं है। ड्रिप स्टैंड भी स्टोर में हैं। जानकारी कर भेजवाए जाएंगे।
-डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ
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केंद्र पर फार्मासिस्ट, सफाई कर्मी और लैब टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। करीब 50 हजार की आबादी इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है, लेकिन यहां एक चिकित्सक, एक स्टाफ नर्स, एक सीएचओ और एक वार्ड बाॅय मात्र चार लोगों के सहारे पूरी व्यवस्था संचालित हो रही है। फार्मासिस्ट पिछले तीन वर्षों से नहीं है, जबकि लैब टेक्नीशियन सप्ताह में केवल एक दिन आता है।
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यह स्वास्थ्य केंद्र भानपुरी खजुरिया, गोविंदनगर, कमलापुर समेत पड़ोसी जनपद पीलीभीत के टाटरगंज, बाजारघाट और कम्बोजनगर क्षेत्र के लोगों के लिए एकमात्र सहारा है। इसके बावजूद यहां की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं। बता दें कि वर्ष 2007 में केंद्र का हैंडओवर हुआ था। उस समय बने चार बेड के वार्ड आज भी उसी हालत में हैं, जिनमें अब तक कोई सुधार या नए संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई है।
बुधवार को केंद्र पर तैनात चिकित्सक डॉ. उदय भान मौर्य मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि 14 मरीज खुजली, बुखार, टाइफाइड और सिरदर्द जैसी बीमारियों से पीड़ित इलाज के लिए आए हैं। केंद्र पर 195 प्रकार की दवाओं का प्रावधान है, लेकिन वास्तविकता में केवल 100 से 120 दवाएं ही उपलब्ध हो पाती हैं।
डॉ. मौर्य ने बताया कि वह संविदा पर कार्यरत हैं और उन्हें किसी प्रकार का वित्तीय अधिकार या बजट नहीं मिलता। सीमित संसाधनों के बीच मरीजों को परामर्श और दवा उपलब्ध कराना ही उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिदिन 15 से 25 मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिनमें कई मरीज पहले अन्य स्थानों से इलाज कराकर भी पहुंचते हैं।
खजुरिया पीएचसी में जो भी अव्यवस्थाएं हैं, उनकी जानकारी कराकर सब सही कराया जाएगा। दवाओं की कोई कमी नहीं है। ड्रिप स्टैंड भी स्टोर में हैं। जानकारी कर भेजवाए जाएंगे।
-डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ

लकड़ी के सहारे खड़ा ड्रिप स्टैंड… भानपुरी खजुरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जुगाड़ के भरोसे