{"_id":"69c4223ab76ecccd7e096a40","slug":"movement-of-rhinos-released-into-open-forests-normal-lakhimpur-news-c-120-1-sbly1008-171223-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: खुले जंगल में छोड़े गए गैंडों की गतिविधियां सामान्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: खुले जंगल में छोड़े गए गैंडों की गतिविधियां सामान्य
विज्ञापन
दुधवा के खुले जंगल में विचरण करता छोड़ा गया गैंडा। स्रोत : वन विभाग।
विज्ञापन
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में सौर ऊर्जा चालित बाड़ से निकालकर खुले जंगल में छोड़े गए तीन मादा और एक नर कुल चार गैंडों की गतिविधियां दूसरे दिन सामान्य रहीं। इस बीच उनकी निगरानी गैंडों के गले में लगे कॉलर और उच्च वैज्ञानिक तकनीक के एंटीना के जरिये की जा रही है।
वन कर्मियों और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर ) की गठित दो टीमें उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। यही नहीं रिहा किए गए गैंडोंं की निगरानी उच्च तकनीक से विकसित हाई फ्रिक्वेंसी एंटीना (एचएफए) से हो रही है। सेटेलाइट से भी उन पर नजर रखी जा रही है।
टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक, दो दिन में छोड़े गए तीन मादा और एक नर गैंडे की लोकेशन दक्षिण सोनारीपुर रेंज के एचडी सिंह मार्ग स्थित घास के मैदान में मिल रही है, जो गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र से करीब 5 किलोमीटर दूर है।
इससे यह साबित होता है कि खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़े गए गैंडे अपने परिवार और साथियों का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। हालांकि, उनकी गतिविधियां पूरी तरह सामान्य पाई गई हैं।
-- -- -- -- -- -- --
रिहा गैंडों की नस्ल सुधरने की उम्मीद
दुधवा और नेपाल के जंगल आपस में सटे हुए हैं। नेपाल में भी एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। यह आए दिन वहां से दुधवा के जंगल में आ जाते हैं, लेकिन पिछले 42 साल से सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रहने से नेपाली गैंडे उनसे घुलमिल नहीं पाते थे। अब खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण करने वाले दुधवा के गैंडे नेपाली गैंडों के साथ तालमेल बैठा सकेंगे। इससे दोनों देशों के गैंडों की नस्ल में सुधार होने की उम्मीद जगी है।
वर्जन
पुनर्वासन योजना फेज एक से तीसरे चरण में दो दिन में तीन मादा और एक नर कुल चार गैंडे खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़े गए हैं। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन कर्मियों की दो टीमें गठित की गई हैं। उच्च वैज्ञानिक तकनीक के जरिये इनकी निगरानी की जा रही है।
- डॉ. एच राजामोहन,एफडी,दुधवा टाइगर रिजर्व
Trending Videos
वन कर्मियों और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर ) की गठित दो टीमें उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। यही नहीं रिहा किए गए गैंडोंं की निगरानी उच्च तकनीक से विकसित हाई फ्रिक्वेंसी एंटीना (एचएफए) से हो रही है। सेटेलाइट से भी उन पर नजर रखी जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक, दो दिन में छोड़े गए तीन मादा और एक नर गैंडे की लोकेशन दक्षिण सोनारीपुर रेंज के एचडी सिंह मार्ग स्थित घास के मैदान में मिल रही है, जो गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र से करीब 5 किलोमीटर दूर है।
इससे यह साबित होता है कि खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़े गए गैंडे अपने परिवार और साथियों का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। हालांकि, उनकी गतिविधियां पूरी तरह सामान्य पाई गई हैं।
रिहा गैंडों की नस्ल सुधरने की उम्मीद
दुधवा और नेपाल के जंगल आपस में सटे हुए हैं। नेपाल में भी एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। यह आए दिन वहां से दुधवा के जंगल में आ जाते हैं, लेकिन पिछले 42 साल से सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रहने से नेपाली गैंडे उनसे घुलमिल नहीं पाते थे। अब खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण करने वाले दुधवा के गैंडे नेपाली गैंडों के साथ तालमेल बैठा सकेंगे। इससे दोनों देशों के गैंडों की नस्ल में सुधार होने की उम्मीद जगी है।
वर्जन
पुनर्वासन योजना फेज एक से तीसरे चरण में दो दिन में तीन मादा और एक नर कुल चार गैंडे खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़े गए हैं। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन कर्मियों की दो टीमें गठित की गई हैं। उच्च वैज्ञानिक तकनीक के जरिये इनकी निगरानी की जा रही है।
- डॉ. एच राजामोहन,एफडी,दुधवा टाइगर रिजर्व

दुधवा के खुले जंगल में विचरण करता छोड़ा गया गैंडा। स्रोत : वन विभाग।