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Lakhimpur Kheri News: तनाव और नींद की कमी से बढ़ रहे मिर्गी के मरीज

संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 25 Mar 2026 11:42 PM IST
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Stress and lack of sleep are increasing the number of epilepsy patients
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लखीमपुर खीरी। तनाव और नींद की कमी से मिर्गी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़े हैं। मानसिक रोग की ओपीडी में आने वाले मरीजों में करीब 35 से 40 प्रतिशत लोग मिर्गी से ग्रसित पाए जा रहे हैं। इस बीमारी की चपेट में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी आ रहे हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार तनाव, अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि प्रतिदिन मानसिक रोग ओपीडी में करीब 150 से 200 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें बड़ी संख्या मिर्गी से पीड़ितों की होती है। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
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उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले कई मरीज अब भी अंधविश्वास और झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है। उन्होंने सलाह दी कि मिर्गी का दौरा पड़ने पर मरीज को सुरक्षित स्थान पर लिटाएं, उसके मुंह में कोई वस्तु न डालें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। जूते या मोजे सूंघाने जैसे तरीके पूरी तरह गलत हैं।
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गर्भावस्था में लापरवाही से नवजात पर खतरा
जिला महिला अस्पताल के सर्जन डॉ. राकेश ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान विभिन्न कमियों की वजह से नवजात शिशु में मिर्गी होने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को ब्लड प्रेशर, प्रोटीन, किडनी, लिवर सहित अन्य जांच नियमित करानी चाहिए। इसके अलावा अगर सिर और सीने में दर्द हो रहा है, आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है तो ऐसे में चिकित्सक से जरूर बताएं, क्योंकि यह दौरा पड़ने के पहले के लक्षण हैं।
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