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Lakhimpur Kheri News: 116 बीघा शत्रु संपत्ति पर फिर कब्जा
Thu, 13 Aug 2026 10:57 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 13 Aug 2026 10:57 PM IST
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धौरहरा। भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान वर्ष 1947 में पाकिस्तान चले गए धौरहरा कस्बा निवासी मोहम्मद सिद्दीक अहमद पुत्र निहाल की ग्राम अमेठी स्थित करीब 116 बीघा जमीन पर दोबारा अवैध कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है।
प्रशासन की ओर से पहले जमीन को कब्जामुक्त कराए जाने के बावजूद कुछ समय बाद दबंगों ने फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से शत्रु संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने के निर्देश के बाद मामले में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार मोहम्मद सिद्दीक अहमद वारिद हाल निवासी पाकिस्तान का नाम ग्राम अमेठी की करीब 116 बीघा भूमि में खातेदार के रूप में दर्ज है। अक्तूबर 2024 में कस्बे के कुछ लोगों ने जमीन की वरासत दर्ज कराने के लिए चकबंदी अधिकारी के न्यायालय में वाद दायर किया था।
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चकबंदी अधिकारी ने 28 अक्तूबर 2024 को अभिलेखों की जांच के बाद वरासत का दावा खारिज कर दिया। साथ ही भूमि को राज्य सरकार में निहित करते हुए कब्जा हटाने के लिए जिलाधिकारी समेत शत्रु संपत्ति निदेशालय सहित शासन को रिपोर्ट भेज दी। इसके अनुपालन में तत्कालीन एसडीएम राजेश कुमार व सीओ प्रीतम पाल सिंह ने कार्रवाई करते हुए जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया था।
49 सेमल के पेड़ काटे, सात पर हुई थी रिपोर्ट
प्रशासन के कब्जे में जमीन आने के कुछ दिन बाद अवैध कब्जाधारकों ने भूमि में लगे 49 सेमल के पेड़ काटकर गायब कर दिए। मामले में तहसीलदार आदित्य विशाल की ओर से कमर अली, जैवर अली, जुल्फिकार अली, अजहर, बादल, ढल्लू और मुन्ना समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
एसडीएम के स्थानांतरण के बाद फिर काबिज होने का आरोप
तत्कालीन एसडीएम राजेश कुमार के स्थानांतरण के बाद दबंगों ने कथित तौर पर शत्रु संपत्ति की जमीन पर दोबारा कब्जा कर लिया है। अब शासन स्तर से शत्रु संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने के निर्देश जारी होने के बाद इस जमीन का मामला फिर चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों की नजर अब तहसील प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
वर्जन
मामले को संज्ञान में लेकर तहसीलदार से पुनः कब्जा करने की जांच कराते हैं, यदि ऐसा है तो एफआईआर दर्ज कराएंगे।
- राशि कृष्णा, एसडीएम धौरहरा।
वर्जन-
भूमि से अवैध कब्जा हटाने के बाद भूमि ग्राम पंचायत को सुपुर्द की गई थी। रिपोर्ट भी शत्रु संपत्ति विभाग को भेजी गई है। यदि पुनः कब्जा हुआ है तो पुनः बेदखल कर एफआईआर दर्ज कराएंगे।
- आदित्य विशाल, तहसीलदार धौरहरा।
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प्रशासन की ओर से पहले जमीन को कब्जामुक्त कराए जाने के बावजूद कुछ समय बाद दबंगों ने फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से शत्रु संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने के निर्देश के बाद मामले में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है।
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राजस्व अभिलेखों के अनुसार मोहम्मद सिद्दीक अहमद वारिद हाल निवासी पाकिस्तान का नाम ग्राम अमेठी की करीब 116 बीघा भूमि में खातेदार के रूप में दर्ज है। अक्तूबर 2024 में कस्बे के कुछ लोगों ने जमीन की वरासत दर्ज कराने के लिए चकबंदी अधिकारी के न्यायालय में वाद दायर किया था।
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चकबंदी अधिकारी ने 28 अक्तूबर 2024 को अभिलेखों की जांच के बाद वरासत का दावा खारिज कर दिया। साथ ही भूमि को राज्य सरकार में निहित करते हुए कब्जा हटाने के लिए जिलाधिकारी समेत शत्रु संपत्ति निदेशालय सहित शासन को रिपोर्ट भेज दी। इसके अनुपालन में तत्कालीन एसडीएम राजेश कुमार व सीओ प्रीतम पाल सिंह ने कार्रवाई करते हुए जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया था।
49 सेमल के पेड़ काटे, सात पर हुई थी रिपोर्ट
प्रशासन के कब्जे में जमीन आने के कुछ दिन बाद अवैध कब्जाधारकों ने भूमि में लगे 49 सेमल के पेड़ काटकर गायब कर दिए। मामले में तहसीलदार आदित्य विशाल की ओर से कमर अली, जैवर अली, जुल्फिकार अली, अजहर, बादल, ढल्लू और मुन्ना समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
एसडीएम के स्थानांतरण के बाद फिर काबिज होने का आरोप
तत्कालीन एसडीएम राजेश कुमार के स्थानांतरण के बाद दबंगों ने कथित तौर पर शत्रु संपत्ति की जमीन पर दोबारा कब्जा कर लिया है। अब शासन स्तर से शत्रु संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने के निर्देश जारी होने के बाद इस जमीन का मामला फिर चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों की नजर अब तहसील प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
वर्जन
मामले को संज्ञान में लेकर तहसीलदार से पुनः कब्जा करने की जांच कराते हैं, यदि ऐसा है तो एफआईआर दर्ज कराएंगे।
- राशि कृष्णा, एसडीएम धौरहरा।
वर्जन-
भूमि से अवैध कब्जा हटाने के बाद भूमि ग्राम पंचायत को सुपुर्द की गई थी। रिपोर्ट भी शत्रु संपत्ति विभाग को भेजी गई है। यदि पुनः कब्जा हुआ है तो पुनः बेदखल कर एफआईआर दर्ज कराएंगे।
- आदित्य विशाल, तहसीलदार धौरहरा।