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Lakhimpur Kheri News: कटान पीड़ितों ने किया मतदान बहिष्कार का एलान
Sun, 19 Jul 2026 12:14 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 19 Jul 2026 12:14 AM IST
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ग्रंट नंबर 12 गांव में कटान करती नदी। स्रोत ग्रामीण
- फोटो : सांकेतिक
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निघासन। शारदा नदी के कटान से तीन वर्षों से उजड़ रहे ग्रंट नंबर-12 गांव के पीड़ितों का सब्र अब जवाब देने लगा है। गांव के करीब 200 परिवारों के लगभग 500 लोगों ने आगामी चुनाव में मतदान के बहिष्कार का एलान किया है। उनका कहना है कि जब तक सरकार स्थायी पुनर्वास, रहने के लिए जमीन और आवास उपलब्ध नहीं कराती, वे वोट नहीं डालेंगे।
ग्रंट नंबर-12 गांव पिछले कई वर्षों से शारदा नदी के कटान की चपेट में है। पिछले वर्ष बाढ़ और कटान में 122 मकान नदी में समा गए थे और करीब 150 परिवार बेघर हो गए। वर्तमान में लगभग 200 परिवार गांव से दो किलोमीटर दूर तटबंध पर तिरपाल, झोंपड़ियों और खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। खेती, रोजगार और आजीविका के साधन समाप्त हो चुके हैं।
कटान के बाद विस्थापित परिवारों ने तटबंध को ही अस्थायी आशियाना बना लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि तीन वर्षों से वे इसी तरह रहने को मजबूर हैं, लेकिन अब तक स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो सकी।
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सिर्फ सर्वे, नहीं मिला पुनर्वास
ग्रामीणों का आरोप है कि समय-समय पर लेखपाल और अन्य कर्मचारी सर्वे करने आते हैं, लेकिन कार्रवाई कागजों तक सीमित रह जाती है। सुरक्षित स्थान पर भूमि आवंटन और स्थायी पुनर्वास की मांग वर्षों से लंबित है। रामबेटी ने बताया कि उनका परिवार तीन वर्षों से तटबंध पर रह रहा है। हर बरसात में फिर उजड़ने का डर बना रहता है। उनका कहना है कि अब लोगों का भरोसा टूट चुका है।
विद्यालय भी कटान की जद में
कटान का खतरा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय तक पहुंच गया है। विद्यालय और शारदा नदी के बीच करीब 70 फीट की दूरी बची है। संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों को करीब एक किलोमीटर दूर कतकहिया स्थित सरकारी विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया है।
डूब क्षेत्र घोषित, फिर भी उठ रहे सवाल
ग्रंट नंबर-12 वर्षों से डूब क्षेत्र घोषित है। इसके बावजूद यहां ग्राम पंचायत का गठन हुआ, पंचायत चुनाव हुए, सरकारी योजनाओं का लाभ मिला और विद्यालय भी संचालित होता रहा। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि प्रशासन को पहले से लगातार कटान की जानकारी थी तो समय रहते स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
एसडीएम निघासन राजीव निगम ने बताया कि प्रशासन की टीम लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही है। ग्रंट नंबर-12 डूब क्षेत्र घोषित गांव है। पिछले वर्ष जिन लोगों के मकानों का कटान हुआ था, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया गया था। जलस्तर घटने-बढ़ने के बाद नदी कटान करने लगती है। ग्रामीणों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।
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ग्रंट नंबर-12 गांव पिछले कई वर्षों से शारदा नदी के कटान की चपेट में है। पिछले वर्ष बाढ़ और कटान में 122 मकान नदी में समा गए थे और करीब 150 परिवार बेघर हो गए। वर्तमान में लगभग 200 परिवार गांव से दो किलोमीटर दूर तटबंध पर तिरपाल, झोंपड़ियों और खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। खेती, रोजगार और आजीविका के साधन समाप्त हो चुके हैं।
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कटान के बाद विस्थापित परिवारों ने तटबंध को ही अस्थायी आशियाना बना लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि तीन वर्षों से वे इसी तरह रहने को मजबूर हैं, लेकिन अब तक स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो सकी।
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सिर्फ सर्वे, नहीं मिला पुनर्वास
ग्रामीणों का आरोप है कि समय-समय पर लेखपाल और अन्य कर्मचारी सर्वे करने आते हैं, लेकिन कार्रवाई कागजों तक सीमित रह जाती है। सुरक्षित स्थान पर भूमि आवंटन और स्थायी पुनर्वास की मांग वर्षों से लंबित है। रामबेटी ने बताया कि उनका परिवार तीन वर्षों से तटबंध पर रह रहा है। हर बरसात में फिर उजड़ने का डर बना रहता है। उनका कहना है कि अब लोगों का भरोसा टूट चुका है।
विद्यालय भी कटान की जद में
कटान का खतरा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय तक पहुंच गया है। विद्यालय और शारदा नदी के बीच करीब 70 फीट की दूरी बची है। संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों को करीब एक किलोमीटर दूर कतकहिया स्थित सरकारी विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया है।
डूब क्षेत्र घोषित, फिर भी उठ रहे सवाल
ग्रंट नंबर-12 वर्षों से डूब क्षेत्र घोषित है। इसके बावजूद यहां ग्राम पंचायत का गठन हुआ, पंचायत चुनाव हुए, सरकारी योजनाओं का लाभ मिला और विद्यालय भी संचालित होता रहा। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि प्रशासन को पहले से लगातार कटान की जानकारी थी तो समय रहते स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
एसडीएम निघासन राजीव निगम ने बताया कि प्रशासन की टीम लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही है। ग्रंट नंबर-12 डूब क्षेत्र घोषित गांव है। पिछले वर्ष जिन लोगों के मकानों का कटान हुआ था, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया गया था। जलस्तर घटने-बढ़ने के बाद नदी कटान करने लगती है। ग्रामीणों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।