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Lalitpur News: रोजगार की चट्टान दरकी, 15 हजार लोगों पर पड़ा असर
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कभी हजारों लोगों की आजीविका का आधार रहा इमारती पत्थर का कारोबार अब सिमटता जा रहा है। एक दशक पहले जिले में 81 खदानें संचालित थीं, लेकिन विभिन्न प्रतिबंधों, पर्यावरणीय शर्तों और बढ़ती रॉयल्टी के चलते अब केवल 14 खदानों में ही खनन हो रहा है। कारोबार के सिकुड़ने से धौर्रा क्षेत्र के 15 हजार से अधिक लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
खनिज संपदा से समृद्ध ललितपुर में रॉक फॉस्फेट, लौह अयस्क, बालू, खंडा, ग्रेनाइट, मौरंग और इमारती पत्थर समेत कई खनिज उपलब्ध हैं। वर्तमान में खंडा-बोल्डर, ग्रेनाइट, मौरंग और इमारती पत्थर की कुछ खदानें ही संचालित हैं। कई खनिज क्षेत्रों में बढ़ी रॉयल्टी और अन्य औपचारिकताओं के कारण कारोबारी निवेश से दूरी बना रहे हैं।
धौर्रा, बालाबेहट और मदनपुर क्षेत्र कभी इमारती पत्थर के बड़े केंद्र माने जाते थे। यहां करीब एक दशक पहले 81 खदानों में खनन होता था और 20 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता था। वर्ष 2019 में महावीर वन्यजीव अभयारण्य की सीमा में आने के कारण 46 खदानों पर खनन प्रतिबंधित कर दिया गया। बाद में अभयारण्य का दायरा कम किया गया, लेकिन पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की अनिवार्यता ने खनन गतिविधियों को प्रभावित किया।
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इसके बाद कई खदानों की भूमि गोचर श्रेणी में दर्ज होने से खनन की राह और कठिन हो गई। नतीजतन 56 खदानें पूरी तरह बंद हो गईं। वर्तमान में जिले में इमारती पत्थर की 25 खदानें बची हैं। इनमें 14 खदानों का संचालन हो रहा है, जबकि 11 खदानें बार-बार नीलामी के बावजूद आवंटित नहीं हो सकी हैं। इससे यह कारोबार लगातार सीमित होता जा रहा है।
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रॉयल्टी बढ़ने से भी घटा उत्साह
कारोबारियों के अनुसार इमारती पत्थर पर रॉयल्टी दरों में वृद्धि भी कारोबार में गिरावट का बड़ा कारण है। पहले रॉयल्टी 650 रुपये प्रति घन मीटर थी, जो बढ़कर 850 रुपये प्रति घन मीटर हो गई है। लागत बढ़ने से नए निवेशक खदान लेने से बच रहे हैं और पुराने कारोबारी भी विस्तार की योजना नहीं बना रहे हैं।
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फैक्ट फाइल
एक दशक पहले संचालित खदानें : 81
बंद हो चुकी खदानें : 56
वर्तमान में संचालित खदानें : 14
नीलामी के बाद भी खाली खदानें : 11
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इस संबंध में विस्तृत आंकड़े मंगाकर परीक्षण कराया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
— दिनेश कुमार, अपर जिलाधिकारी
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ललितपुर। कभी हजारों लोगों की आजीविका का आधार रहा इमारती पत्थर का कारोबार अब सिमटता जा रहा है। एक दशक पहले जिले में 81 खदानें संचालित थीं, लेकिन विभिन्न प्रतिबंधों, पर्यावरणीय शर्तों और बढ़ती रॉयल्टी के चलते अब केवल 14 खदानों में ही खनन हो रहा है। कारोबार के सिकुड़ने से धौर्रा क्षेत्र के 15 हजार से अधिक लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
खनिज संपदा से समृद्ध ललितपुर में रॉक फॉस्फेट, लौह अयस्क, बालू, खंडा, ग्रेनाइट, मौरंग और इमारती पत्थर समेत कई खनिज उपलब्ध हैं। वर्तमान में खंडा-बोल्डर, ग्रेनाइट, मौरंग और इमारती पत्थर की कुछ खदानें ही संचालित हैं। कई खनिज क्षेत्रों में बढ़ी रॉयल्टी और अन्य औपचारिकताओं के कारण कारोबारी निवेश से दूरी बना रहे हैं।
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धौर्रा, बालाबेहट और मदनपुर क्षेत्र कभी इमारती पत्थर के बड़े केंद्र माने जाते थे। यहां करीब एक दशक पहले 81 खदानों में खनन होता था और 20 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता था। वर्ष 2019 में महावीर वन्यजीव अभयारण्य की सीमा में आने के कारण 46 खदानों पर खनन प्रतिबंधित कर दिया गया। बाद में अभयारण्य का दायरा कम किया गया, लेकिन पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की अनिवार्यता ने खनन गतिविधियों को प्रभावित किया।
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इसके बाद कई खदानों की भूमि गोचर श्रेणी में दर्ज होने से खनन की राह और कठिन हो गई। नतीजतन 56 खदानें पूरी तरह बंद हो गईं। वर्तमान में जिले में इमारती पत्थर की 25 खदानें बची हैं। इनमें 14 खदानों का संचालन हो रहा है, जबकि 11 खदानें बार-बार नीलामी के बावजूद आवंटित नहीं हो सकी हैं। इससे यह कारोबार लगातार सीमित होता जा रहा है।
रॉयल्टी बढ़ने से भी घटा उत्साह
कारोबारियों के अनुसार इमारती पत्थर पर रॉयल्टी दरों में वृद्धि भी कारोबार में गिरावट का बड़ा कारण है। पहले रॉयल्टी 650 रुपये प्रति घन मीटर थी, जो बढ़कर 850 रुपये प्रति घन मीटर हो गई है। लागत बढ़ने से नए निवेशक खदान लेने से बच रहे हैं और पुराने कारोबारी भी विस्तार की योजना नहीं बना रहे हैं।
फैक्ट फाइल
एक दशक पहले संचालित खदानें : 81
बंद हो चुकी खदानें : 56
वर्तमान में संचालित खदानें : 14
नीलामी के बाद भी खाली खदानें : 11
इस संबंध में विस्तृत आंकड़े मंगाकर परीक्षण कराया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
— दिनेश कुमार, अपर जिलाधिकारी