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Lalitpur News: तेज गति से चलेंगी ट्रेनें, नहीं कांपेंगी मूर्तियां
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जाखलौन-धौर्रा तीसरी रेल लाइन के लिए जर्मनी से आएगा साउंड ऑब्जर्विंग मटेरियल
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जाखलौन–धौर्रा के मध्य निर्माणाधीन तीसरी रेल लाइन में ट्रेनों से उत्पन्न होने वाले कंपन को रोकने के लिए रेलवे जर्मनी से विशेष साउंड ऑब्जर्विंग (रबर) मटेरियल मंगा रहा है। इसका उद्देश्य रेल लाइन के समीप स्थित चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र में स्थापित पुरातात्विक मूर्तियों को ट्रेनों के आवागमन से होने वाले कंपन से सुरक्षित रखना है।
चांदपुर–जहाजपुर एक संरक्षित पुरातात्विक स्थल होने के कारण पहले यहां तीसरी रेल लाइन बिछाने की अनुमति नहीं मिल पाई थी। इसके चलते रेलवे ने इस क्षेत्र से पहले और बाद में लगभग पांच किलोमीटर लंबी घुमावदार रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया था। इस योजना के तहत पहाड़ी काटकर लगभग आधा किलोमीटर लंबी सुरंग (टनल) का निर्माण भी प्रस्तावित था, जिस पर करीब 150 करोड़ रुपये का खर्च आना था।
वहीं, यदि सीधी रेल लाइन बिछाई जाती तो कुल पांच किलोमीटर में से ढाई किलोमीटर का कार्य पहले ही पूरा हो चुका था और शेष ढाई किलोमीटर में केवल गिट्टी व रेल पटरियां बिछानी थीं। घुमावदार लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाने वाली थी, तभी अगस्त माह में रेलवे अधिकारियों का संपर्क दिल्ली पुरातत्व विभाग की टीम से हुआ।
दिल्ली पुरातत्व विभाग की टीम ने अगस्त में चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र का निरीक्षण किया। रेलवे अधिकारियों द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि ट्रेनों से होने वाले कंपन से प्राचीन मूर्तियों को कोई नुकसान नहीं होगा, विभाग ने सीधी रेल लाइन बिछाने की सशर्त अनुमति प्रदान कर दी। अनुमति मिलने के बाद तीसरी रेल लाइन का कार्य तेजी से शुरू किया गया। वर्तमान में यहां लगभग 16 पुलों का निर्माण और रेल लाइन बिछाने का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य प्रगति पर है। अब रेलवे द्वारा पुरातात्विक मूर्तियों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए जर्मनी से साउंड ऑब्जर्विंग मटेरियल मंगाया जा रहा है। इस मटेरियल की पहली खेप जनवरी के अंत तक और शेष सामग्री 15 फरवरी तक उपलब्ध हो जाएगी। इसके बाद इसे चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र के पास बिछाई जा रही तीसरी रेल लाइन के नीचे स्थापित किया जाएगा, जिससे ट्रेनों से उत्पन्न कंपन को यह रबर आधारित मटेरियल अवशोषित कर लेगा और कंपन मूर्तियों तक नहीं पहुंचेगा। रेलवे को उम्मीद है कि फरवरी के अंत तक जाखलौन से धौर्रा के बीच तीसरी रेल लाइन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
वर्जन
जाखलौन–धौर्रा के मध्य चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र में ट्रेनों से होने वाले कंपन को रोकने के लिए जर्मनी से रबर आधारित साउंड ऑब्जर्विंग मटेरियल मंगाया गया है। इसे रेलवे ट्रैक के नीचे लगाया जाएगा, जिससे कंपन का प्रभाव पुरातात्विक मूर्तियों तक नहीं पहुंचेगा और वे सुरक्षित रहेंगी। - मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, रेलवे झांसी
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ललितपुर। जाखलौन–धौर्रा के मध्य निर्माणाधीन तीसरी रेल लाइन में ट्रेनों से उत्पन्न होने वाले कंपन को रोकने के लिए रेलवे जर्मनी से विशेष साउंड ऑब्जर्विंग (रबर) मटेरियल मंगा रहा है। इसका उद्देश्य रेल लाइन के समीप स्थित चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र में स्थापित पुरातात्विक मूर्तियों को ट्रेनों के आवागमन से होने वाले कंपन से सुरक्षित रखना है।
चांदपुर–जहाजपुर एक संरक्षित पुरातात्विक स्थल होने के कारण पहले यहां तीसरी रेल लाइन बिछाने की अनुमति नहीं मिल पाई थी। इसके चलते रेलवे ने इस क्षेत्र से पहले और बाद में लगभग पांच किलोमीटर लंबी घुमावदार रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया था। इस योजना के तहत पहाड़ी काटकर लगभग आधा किलोमीटर लंबी सुरंग (टनल) का निर्माण भी प्रस्तावित था, जिस पर करीब 150 करोड़ रुपये का खर्च आना था।
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वहीं, यदि सीधी रेल लाइन बिछाई जाती तो कुल पांच किलोमीटर में से ढाई किलोमीटर का कार्य पहले ही पूरा हो चुका था और शेष ढाई किलोमीटर में केवल गिट्टी व रेल पटरियां बिछानी थीं। घुमावदार लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाने वाली थी, तभी अगस्त माह में रेलवे अधिकारियों का संपर्क दिल्ली पुरातत्व विभाग की टीम से हुआ।
दिल्ली पुरातत्व विभाग की टीम ने अगस्त में चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र का निरीक्षण किया। रेलवे अधिकारियों द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि ट्रेनों से होने वाले कंपन से प्राचीन मूर्तियों को कोई नुकसान नहीं होगा, विभाग ने सीधी रेल लाइन बिछाने की सशर्त अनुमति प्रदान कर दी। अनुमति मिलने के बाद तीसरी रेल लाइन का कार्य तेजी से शुरू किया गया। वर्तमान में यहां लगभग 16 पुलों का निर्माण और रेल लाइन बिछाने का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य प्रगति पर है। अब रेलवे द्वारा पुरातात्विक मूर्तियों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए जर्मनी से साउंड ऑब्जर्विंग मटेरियल मंगाया जा रहा है। इस मटेरियल की पहली खेप जनवरी के अंत तक और शेष सामग्री 15 फरवरी तक उपलब्ध हो जाएगी। इसके बाद इसे चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र के पास बिछाई जा रही तीसरी रेल लाइन के नीचे स्थापित किया जाएगा, जिससे ट्रेनों से उत्पन्न कंपन को यह रबर आधारित मटेरियल अवशोषित कर लेगा और कंपन मूर्तियों तक नहीं पहुंचेगा। रेलवे को उम्मीद है कि फरवरी के अंत तक जाखलौन से धौर्रा के बीच तीसरी रेल लाइन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
वर्जन
जाखलौन–धौर्रा के मध्य चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र में ट्रेनों से होने वाले कंपन को रोकने के लिए जर्मनी से रबर आधारित साउंड ऑब्जर्विंग मटेरियल मंगाया गया है। इसे रेलवे ट्रैक के नीचे लगाया जाएगा, जिससे कंपन का प्रभाव पुरातात्विक मूर्तियों तक नहीं पहुंचेगा और वे सुरक्षित रहेंगी। - मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, रेलवे झांसी
