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UP: पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर रामपुर आए 2151 परिवार को ललितपुर उपलब्ध कराएगा जमीन, भूमि की तलाश शुरू
अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 22 May 2026 03:52 PM IST
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सार
पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर रामपुर आए 2151 हिंदू परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए मुरादाबाद मंडलायुक्त ने झांसी मंडलायुक्त को पत्र भेजा है। इसके बाद ललितपुर जिला प्रशासन ने भूमि की तलाश शुरू कर दी है।
सांकेतिक फोटो।
- फोटो : एआई।
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विस्तार
पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से विस्थापित होकर रामपुर आए 2151 हिंदू परिवारों जमीन का मालिकाना हक उपलब्ध कराने के लिए ललितपुर में जमीन तलाशी जा रही है। इन परिवारों के पुनर्वास के लिए ललितपुर से 958 हेक्टेयर गैर वानिकी भूमि वन विभाग को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस संबंध में मुरादाबाद मंडलायुक्त ने झांसी मंडलायुक्त को पत्र भेजा है। इसके बाद जिला प्रशासन ने उपयुक्त भूमि की तलाश शुरू कर दी है।
1947 से 1975 के बीच पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए परिवारों को रामपुर की स्वार तहसील के 16 गांवों में बसाया गया था। नागरिक संशोधन अधिनियम के तहत भारतीय नागरिकता के पात्र, अनुसूचित जनजाति समुदाय तथा उपनिवेशन योजना (कॉलोनाइजेशन स्कीम) के अंतर्गत बसाए गए इन परिवारों को प्रति परिवार एक एकड़ से अधिक कृषि भूमि देने की कवायद चल रही है। शासन ने इन्हें असंक्रमणीय भूमिधर अधिकार देने का निर्णय लिया है।
राजस्व और वन विभाग की ओर से वर्ष 2020-21 में किए गए संयुक्त सर्वे में 16 गांवों में 2151 विस्थापित परिवार चिह्नित किए गए थे। सर्वे में इन परिवारों के लिए करीब 2151 एकड़ कृषि भूमि की आवश्यकता बताई गई। साथ ही यह भी सामने आया कि वर्तमान में ये परिवार 86.9835 हेक्टेयर भूमि पर निवास कर रहे हैं। इस प्रकार इनके समुचित पुनर्वास के लिए कुल 2366 एकड़ यानी करीब 958 हेक्टेयर भूमि की जरूरत आंकी गई।
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रामपुर के प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग ने दो मई को जारी पत्र में बताया था कि संबंधित गांव अभिलेखों में आरक्षित वन भूमि के दायरे में दर्ज हैं। ऐसे में इन परिवारों को नियमित करने से पहले वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना जरूरी होगा। इसके लिए वन विभाग को बराबर क्षेत्रफल की गैर वानिकी भूमि हस्तांतरित करनी होगी।
मुरादाबाद मंडल में पर्याप्त गैर वानिकी भूमि उपलब्ध न होने पर मंडलायुक्त ने शासन को पत्र भेजा था। राजस्व परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर झांसी मंडल के ललितपुर में 958 हेक्टेयर से अधिक भूमि उपलब्ध होने की संभावना जताई गई। इसके बाद मंडलायुक्त मुरादाबाद ने झांसी मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे को पत्र भेजकर जिलाधिकारी ललितपुर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का अनुरोध किया है। पत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन ने गैर वन भूमि की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिले में एक साथ इतनी बड़ी भूमि उपलब्ध होना चुनौती बना हुआ है।
इनका यह है कहना
जनपद में कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। ऐसे में एक साथ इतनी भूमि उपलब्ध कराने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। अन्य जिलों में भी जमीन की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
सत्य प्रकाश, जिलाधिकारी
कांवड़ मार्ग के लिए भी दी गई थी भूमि
करीब तीन वर्ष पहले गाजियाबाद में कांवड़ मार्ग निर्माण के दौरान वन विभाग की भूमि बाधा बनी थी। शासन के निर्देश पर ललितपुर से करीब 100 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की गई थी। इसके बाद गाजियाबाद में कांवड़ मार्ग निर्माण का रास्ता साफ हुआ था।
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1947 से 1975 के बीच पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए परिवारों को रामपुर की स्वार तहसील के 16 गांवों में बसाया गया था। नागरिक संशोधन अधिनियम के तहत भारतीय नागरिकता के पात्र, अनुसूचित जनजाति समुदाय तथा उपनिवेशन योजना (कॉलोनाइजेशन स्कीम) के अंतर्गत बसाए गए इन परिवारों को प्रति परिवार एक एकड़ से अधिक कृषि भूमि देने की कवायद चल रही है। शासन ने इन्हें असंक्रमणीय भूमिधर अधिकार देने का निर्णय लिया है।
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राजस्व और वन विभाग की ओर से वर्ष 2020-21 में किए गए संयुक्त सर्वे में 16 गांवों में 2151 विस्थापित परिवार चिह्नित किए गए थे। सर्वे में इन परिवारों के लिए करीब 2151 एकड़ कृषि भूमि की आवश्यकता बताई गई। साथ ही यह भी सामने आया कि वर्तमान में ये परिवार 86.9835 हेक्टेयर भूमि पर निवास कर रहे हैं। इस प्रकार इनके समुचित पुनर्वास के लिए कुल 2366 एकड़ यानी करीब 958 हेक्टेयर भूमि की जरूरत आंकी गई।
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मुरादाबाद मंडल में पर्याप्त गैर वानिकी भूमि उपलब्ध न होने पर मंडलायुक्त ने शासन को पत्र भेजा था। राजस्व परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर झांसी मंडल के ललितपुर में 958 हेक्टेयर से अधिक भूमि उपलब्ध होने की संभावना जताई गई। इसके बाद मंडलायुक्त मुरादाबाद ने झांसी मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे को पत्र भेजकर जिलाधिकारी ललितपुर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का अनुरोध किया है। पत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन ने गैर वन भूमि की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिले में एक साथ इतनी बड़ी भूमि उपलब्ध होना चुनौती बना हुआ है।
इनका यह है कहना
जनपद में कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। ऐसे में एक साथ इतनी भूमि उपलब्ध कराने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। अन्य जिलों में भी जमीन की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
सत्य प्रकाश, जिलाधिकारी
कांवड़ मार्ग के लिए भी दी गई थी भूमि
करीब तीन वर्ष पहले गाजियाबाद में कांवड़ मार्ग निर्माण के दौरान वन विभाग की भूमि बाधा बनी थी। शासन के निर्देश पर ललितपुर से करीब 100 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की गई थी। इसके बाद गाजियाबाद में कांवड़ मार्ग निर्माण का रास्ता साफ हुआ था।
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