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Maharajganj News: लेखपाल के 31 और कानूनगो 44 फीसदी पद रिक्त, पैमाइश के लिए वर्षों भटक रहे लोग

Mon, 17 Aug 2026 12:41 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2026 12:41 AM IST
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31% of Lekhpal and 44% of Kanungo posts vacant; people have been running from pillar to post for years to get land measurements done.
कोर्ट के आदेश के बाद भी समय पर नहीं हो पा रही है पैमाइश, जनपद में लेखपाल के 107 और कानूनगो के 22 पद रिक्त
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जनपद में 368 स्वीकृत पदों के सापेक्ष कार्यरत हैं 261 लेखपाल, 50 कानूनगो की तुलना में 28 ही तैनात हैं, 22 पद रिक्त
महराजगंज। जनपद में लेखपाल व राजस्व निरीक्षकों के स्वीकृत पदों की तुलना में कार्यरत की संख्या कम होने के कारण काम का दबाव बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर लोगों के काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं। जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र के अलावा जमीन की पैमाइश के लिए लोगों को वर्षों भटकना पड़ रहा है।
राजस्व विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, जनपद में 107 लेखपालों की कमी है। यहां लेखपालों की कुल स्वीकृत पदों की संख्या 368 के सापेक्ष 261 की ही तैनाती है। यानि जनपद में करीब 31 फीसदी लेखपालों के पद रिक्त हैं। इसके अलावा राजस्व निरीक्षकों की संख्या भी जनपद में कम है। इससे कार्यरत लेखपालों पर काम का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। लेखपालों से जुड़े कामों के लिए भी लोगों को महीनों और पैमाइश के मामलों में वर्षों दौड़ लगाने पड़ रहे हैं।
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वहीं धारा 24 के तहत न्यायालय से पत्थर नसब का आदेश होने के बाद भी समय से कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया जा रहा है। राजस्व निरीक्षक की जरूरत के लिए लोगों को लगातार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कारण कि राजस्व निरीक्षकों के जनपद में स्वीकृत पदों की तुलना में लगभग आधे ही तैनात हैं। जनपद में 50 राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) के स्वीकृत पद के सापेक्ष केवल 28 की तैनाती है। यानी कानूनगो के 22 पद रिक्त पड़े हैं। यह स्वीकृत पदों की तुलना में 44 फीसदी है।
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तहसील और गांव की अहम कड़ी होते हैं लेखपालउत्तर प्रदेश में लेखपाल ग्रामीण स्तर पर राजस्व विभाग का एक प्रमुख स्थानीय अधिकारी होता है। वह गांव और तहसील के बीच एक अहम कड़ी के रूप में काम करता है। अपने क्षेत्र (हल्के) की जमीन और कृषि से जुड़े रिकॉर्ड रखना उसकी मुख्य जिम्मेदारी होती है। इसके अलावा लेखपालों के काम में भू-अभिलेखों का रखरखाव करना, खसरा और खतौनी जैसे जमीन के सभी जरूरी दस्तावेजों को अपडेट रखना, जमीन के मालिकाना हक का रिकॉर्ड संभालना, फसल की बुवाई और उत्पादन का डेटा समय-समय पर तैयार करना, भूमि पैमाइश और सत्यापन, जमीन के बंटवारे या सीमा विवाद के मामलों में पैमाइश (नाप) करना शामिल है।
जाति आय बनवाने के लिए दौड़ लगा रहे लोग
लेखपालों के अधिकतर काम आम लोगों से जुड़े होते हैं। ऊपर दर्शाए गए मुख्य कामों के अलावा ग्रामीणों द्वारा बनवाए जाने वाले आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों की जांच व स्थलीय सत्यापन करना उनकी जिम्मेदारी है। लेखपालों के अभाव में लोगों को जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों के लिए लोगों को चार से पांच महीनों तक का समय लग जा रहा है। इसके अलावा बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या आगजनी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे करते हुए नुकसान की सही रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजना व अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों की पहचान में मदद करना, इनकी जिम्मेदारियों में शामिल है।
केस नंबर एकमेरा धारा 30 के तहत चार साल पहले जमीन के नक्शा बंटवारा हुआ था। इसके बाद राजस्व निरीक्षक को पत्थल नसब की कार्रवाई करनी थी। लेकिन लगातार तहसील स्तर पर शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। मैं वर्षों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा हूं।
- नंदलाल पांडेय निवासी हरखा
केस नंबर दो
धारा 24 के तहत पैमाइश दाखिल किया था। 27 जून 2018 को एसडीएम ने पैमाइश का आदेश भी कर दिया। लेकिन आज तक पैमाइश नहीं हुई। डीएम व तहसील दिवस में शिकायत के बाद भी पैमाइश नहीं हुई। आठ वर्षों का समय बीतने के बाद में जिम्मेदारों ने ठोस कार्रवाई नहीं की है।- विन्ध्याचल निवासी चेहरी
वर्जन

सभी काम अब ऑनलाइन हो रहा है लेकिन इंटरनेट सेवा से लेकर मोबाइल की सुविधा नहीं दी गई है। लेखपालों की कमी से राजस्व से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं और तय समय सीमा में काम का निस्तारण करने में लेखपालों को परेशानी हो रही है। साथ ही अन्य विभागों का काम भी लेखपालों से कराना काम में देरी की मुख्य वजह बन रही है।

-अशोक त्रिपाठी, अध्यक्ष लेखपाल संघ सदर तहसील
लेखपाल के रिक्त पदों पर भर्ती के प्रक्रिया के तहत तैनाती होती है। लेखपालों को ही प्रमोशन के आधार पर राजस्व निरीक्षक का पद मिलता है। रिक्त चल रहे पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। प्रयास रहता है कि सभी तरह के काम समय पर निस्तारित कर दिए जाएं।
- प्रशांत कुमार एडीएम महराजगंज
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