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Maharajganj News: बस्ती में डीएल में फर्जीवाड़ा...यहां भी पहुंची जांच की आंच
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 01 May 2026 02:44 AM IST
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सिद्धार्थनगर। बस्ती आरटीओ कार्यालय से अरुणांचल प्रदेश से बैकलॉग में दलालों की ओर से गड़बड़ी कर 4500 लाइसेंस जारी करके करोड़ों रुपये हेराफेरी करने के मामले में जांच की आंच अब जनपद तक पहुंच गई है। बस्ती में शुरू हुई जांच असर यहां भी देखने को मिला।
अफसर बीते कुछ माह में जारी किए गए लाइसेंस की फाइल पलटते नजर आ रहे हैं। वहीं, बस्ती के मामले की जानकारी के बाद कार्यालय में बाहरी व्यक्ति सरक गए हैं। अब कार्यालय में बाहर नहीं दिख रहे हैं। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि जनपद में डीएल में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं मिली है।
अब ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन हो चुकी है। लर्निंग की प्रक्रिया पूरी तरह से घर बैठे हो रही है। आवेदन के साथ ही ऑनलाइन परीक्षा मोबाइल से ही देने की सुविधा है। लर्निंग जारी होने के बाद परमानेंट लाइसेंस जारी होता है। लेकिन, लखनऊ से अमर उजाला की पड़ताल में एक मामला खुला, जिसमें बस्ती जनपद के आरटीओ दफ्तर से दलालों की गठजोड़ से अरुणांचल प्रदेश के बैकलॉग बिना लर्निंग के ही 4500 लाइसेंस जारी कर दिए गए। इसमें करीब पौने पांच करोड़ रुपये की कमाई की आशंका जताई गई है। मामला सामने आने के बाद जहां शासन स्तर से जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, स्थानीय स्तर पर भी जांच शुरू हो गई है।
फाइलों को पलटने और कमियों को ढूंढ़ने का काम शुरू हो गया है। इसमें बस्ती ही नहीं, सिद्धार्थनगर जनपद का नाम सामने आया है। इसके बाद एआरटीओ कार्यालय में हलचल मच गई है। जनवरी से अबतक जारी हुए लाइसेंस की फाइल पलटी जा रही है। विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक लाइसेंस के लिए आवेदन कहां से हुआ परीक्षा किसी तिथि में दी गई। इसके साथ ही संबंधित का पूरा ब्यौरा की जांच की जा रही है।
इसके साथ ही गैर प्रांत के लाइसेंस की जांच की गई है। वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद नियमित कार्यालय पर दिखने वाले बाहरी लोगों का आना-जाना कम हो गया है। स्थानीय स्तर पर विभाग के लोग जांच कर लिए हैं। अभी तक कोई बाहर की टीम नहीं आई है।
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अब ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन हो चुकी है। लर्निंग की प्रक्रिया पूरी तरह से घर बैठे हो रही है। आवेदन के साथ ही ऑनलाइन परीक्षा मोबाइल से ही देने की सुविधा है। लर्निंग जारी होने के बाद परमानेंट लाइसेंस जारी होता है। लेकिन, लखनऊ से अमर उजाला की पड़ताल में एक मामला खुला, जिसमें बस्ती जनपद के आरटीओ दफ्तर से दलालों की गठजोड़ से अरुणांचल प्रदेश के बैकलॉग बिना लर्निंग के ही 4500 लाइसेंस जारी कर दिए गए। इसमें करीब पौने पांच करोड़ रुपये की कमाई की आशंका जताई गई है। मामला सामने आने के बाद जहां शासन स्तर से जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, स्थानीय स्तर पर भी जांच शुरू हो गई है।
फाइलों को पलटने और कमियों को ढूंढ़ने का काम शुरू हो गया है। इसमें बस्ती ही नहीं, सिद्धार्थनगर जनपद का नाम सामने आया है। इसके बाद एआरटीओ कार्यालय में हलचल मच गई है। जनवरी से अबतक जारी हुए लाइसेंस की फाइल पलटी जा रही है। विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक लाइसेंस के लिए आवेदन कहां से हुआ परीक्षा किसी तिथि में दी गई। इसके साथ ही संबंधित का पूरा ब्यौरा की जांच की जा रही है।
इसके साथ ही गैर प्रांत के लाइसेंस की जांच की गई है। वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद नियमित कार्यालय पर दिखने वाले बाहरी लोगों का आना-जाना कम हो गया है। स्थानीय स्तर पर विभाग के लोग जांच कर लिए हैं। अभी तक कोई बाहर की टीम नहीं आई है।
