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Maharajganj News: अस्पताल में प्रसव हुआ कम तो जिम्मेदार होंगे अधीक्षक
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 12 Mar 2026 02:47 AM IST
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फोटो- है
- अब गर्भवती महिलाओं की देखी जाएगी रिपोर्ट, आशा देंगी जानकारी
- निजी अस्पताल में लापरवाही से गर्भवती महिलाओं की होने वाली मौत पर स्वास्थ्य विभाग सख्त
- घर पर डिलीवरी का कारण भी देना होगा
सीएचसी और मेडिकल कॉलेज में शत प्रतिशत डिलीवरी पर जोर
जांच में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ की जाएगी कार्रवाई
सिद्धार्थनगर। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अगर कम प्रसव हुआ तो संबंधित अधीक्षक की जवाबदेही तय होगी। हर हाल में अस्पताल में डिलीवरी कराना है। इसमें लापरवाही पर संबंधित पर कार्रवाई होगी। निजी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और अस्पतालों में कम प्रसव को संज्ञान में लिया गया है। इसलिए अब हर गर्भवती की आशा के जरिये सीधे मॉनिटरिंग की जाएगी। प्रसव होने के समय से पहले उनके संपर्क में रहना होगा और प्रसव करना होगा। अगर अस्पताल में डिलीवरी नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई, इसके बारे में जानकारी देनी होगी।
सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकारी अस्पतालों पर कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। इसमें नियमित ब्लड और अन्य प्रकार की जांच के साथ ही अब अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी दे रही है। साथ ही उन्हें दवाएं दी जा रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्र से पोषाहार उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ्य रहें और जन्म लेने के बाद किसी प्रकार की कमी न हो।
इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पताल पर ही प्रसव पर जोर दे रहा है। इन सारी सेवाओं के बाद भी सरकारी अस्पताल में उम्मीद के अनुसार प्रसव का अनुपात कम रहता है। वहीं, निजी अस्पतालों में डिलीवरी के साथ ही मौत पर शोर उठता है। इसके बाद पता चलता है कि ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर प्रशिक्षित नहीं है। वहीं, कई बार स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से निजी अस्पतालों पर पहुंचाए जाने की बात सामने आती है और आरोप भी लगते हैं। इसलिए अब सरकारी अस्पताल पर प्रसव कम हुआ तो संबंधित अधीक्षक की जवाबदेही तय होगी। उनकी समीक्षा की जाएगी कि कितनी महिलाओं को उस माह में डिलीवरी होनी थी, कितने के हुई और जिनकी नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई। इन सारे सवालों को जवाब देना होगा।
इसके लिए अधीक्षक के साथ ही निचली स्वास्थ्य इकाई के रूप में काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका तय होगी। उन्हें डिलीवरी नहीं कराने वालों की रिपोर्ट देनी होगी। वहीं, प्रसव का समय होने पर लगातार संबंधित महिला के संपर्क में रहना होगा। जिससे वह अस्पताल पर ही डिलीवरी कराए और सुरक्षित प्रसव हो सके।
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कोट
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की गई है। इसमें डिलीवरी के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया गया है। घर पर किसी भी हाल में प्रसव नहीं होना है। शत- प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पताल में ही सुनिश्चित कराना है। सभी अधीक्षक को दिशा- निर्देश दिया गया है। अगर कहीं कम हुआ और लापरवाही सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी।
- शिवशरणप्पा जीएन, डीएम
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सीएचसी और मेडिकल कॉलेज में शत प्रतिशत डिलीवरी पर जोर
जांच में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ की जाएगी कार्रवाई
सिद्धार्थनगर। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अगर कम प्रसव हुआ तो संबंधित अधीक्षक की जवाबदेही तय होगी। हर हाल में अस्पताल में डिलीवरी कराना है। इसमें लापरवाही पर संबंधित पर कार्रवाई होगी। निजी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और अस्पतालों में कम प्रसव को संज्ञान में लिया गया है। इसलिए अब हर गर्भवती की आशा के जरिये सीधे मॉनिटरिंग की जाएगी। प्रसव होने के समय से पहले उनके संपर्क में रहना होगा और प्रसव करना होगा। अगर अस्पताल में डिलीवरी नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई, इसके बारे में जानकारी देनी होगी।
सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकारी अस्पतालों पर कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। इसमें नियमित ब्लड और अन्य प्रकार की जांच के साथ ही अब अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी दे रही है। साथ ही उन्हें दवाएं दी जा रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्र से पोषाहार उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ्य रहें और जन्म लेने के बाद किसी प्रकार की कमी न हो।
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इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पताल पर ही प्रसव पर जोर दे रहा है। इन सारी सेवाओं के बाद भी सरकारी अस्पताल में उम्मीद के अनुसार प्रसव का अनुपात कम रहता है। वहीं, निजी अस्पतालों में डिलीवरी के साथ ही मौत पर शोर उठता है। इसके बाद पता चलता है कि ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर प्रशिक्षित नहीं है। वहीं, कई बार स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से निजी अस्पतालों पर पहुंचाए जाने की बात सामने आती है और आरोप भी लगते हैं। इसलिए अब सरकारी अस्पताल पर प्रसव कम हुआ तो संबंधित अधीक्षक की जवाबदेही तय होगी। उनकी समीक्षा की जाएगी कि कितनी महिलाओं को उस माह में डिलीवरी होनी थी, कितने के हुई और जिनकी नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई। इन सारे सवालों को जवाब देना होगा।
इसके लिए अधीक्षक के साथ ही निचली स्वास्थ्य इकाई के रूप में काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका तय होगी। उन्हें डिलीवरी नहीं कराने वालों की रिपोर्ट देनी होगी। वहीं, प्रसव का समय होने पर लगातार संबंधित महिला के संपर्क में रहना होगा। जिससे वह अस्पताल पर ही डिलीवरी कराए और सुरक्षित प्रसव हो सके।
कोट
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की गई है। इसमें डिलीवरी के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया गया है। घर पर किसी भी हाल में प्रसव नहीं होना है। शत- प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पताल में ही सुनिश्चित कराना है। सभी अधीक्षक को दिशा- निर्देश दिया गया है। अगर कहीं कम हुआ और लापरवाही सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी।
- शिवशरणप्पा जीएन, डीएम