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Maharajganj News: स्वयं सहायता समूह की बदौलत कुसुम ने बदली जिंदगी की तस्वीर

Thu, 02 Jul 2026 02:34 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 02:34 AM IST
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Kusum transformed her life thanks to the self-help group.
स्वयं सहायता समूह के बदौलत अपनी जिंदगी बदलने वाली कुसुम।
गारमेंट्स व्यवसाय से बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, अब दूसरी महिलाओं को जोड़ने का सपना
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सेमरियावां। कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली कुसुम आज अपनी मेहनत, हौसले और स्वयं सहायता समूह के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत चमरसन के राजस्व गांव करौता निवासी कुसुम ने मां दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
परास्नातक तक शिक्षा हासिल करने वाली कुसुम के मन में कुछ अलग करने की चाह थी। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ वह अपनी पहचान बनाना चाहती थीं। इसी बीच स्वयं सहायता समूह उनके लिए बदलाव का माध्यम बना। ब्लॉक मिशन प्रबंधक उपेंद्र कुमार से योजना की जानकारी मिलने के बाद कुसुम ने 20 अप्रैल 2021 को समूह की सदस्यता ली और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।
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पति गंगा प्रसाद गुप्ता मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। दो बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए कुसुम ने हिम्मत नहीं हारी। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, व्यवसाय प्रबंधन और बाजार की समझ मिली, जिसने उनके सपनों को नई उड़ान दी। कुसुम ने समूह से मिलने वाली सहायता का बेहतर उपयोग करते हुए गारमेंट्स व्यवसाय शुरू किया।
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10 नवंबर 2022 को उन्होंने स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपये का सीसीएल लिया, जिसे समय से चुका दिया। इसके बाद 30 मार्च 2024 को एक लाख रुपये की दूसरी सहायता लेकर व्यवसाय को और आगे बढ़ाया। आज बेलौहा-चुरेब चौराहे पर उनकी रेडीमेड गारमेंट्स की दुकान अच्छी चल रही है। दुकान में बच्चों के कपड़ों से लेकर महिलाओं की साड़ी और पुरुषों के पहनावे तक की बिक्री होती है।
मेहनत और बेहतर प्रबंधन के चलते यह दुकान उनके परिवार की आजीविका का मजबूत साधन बन गई है। कुसुम बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक मदद नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाया। उनका सपना है कि भविष्य में अधिक से अधिक महिलाओं को इस तरह के रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।

कुसुम की कहानी यह संदेश देती है कि अगर हौसला और सही मार्गदर्शन मिले तो महिलाएं घर की चारदीवारी से निकलकर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम साबित हो रहे हैं।
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