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Maharajganj News: एक तिहाई डॉक्टरों के पद रिक्त, निजी चिकित्सालयों के भरोसे इलाज व्यवस्था
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डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र- 17 अस्पतालों में सर्जन के पद खाली
जिले के सीएचसी और पीएचसी में डॉक्टरों के स्वीकृत
167 पदों के सापेक्ष 108 ही तैनात
महराजगंज। जिले के सरकारी अस्पतालों में करीब 36 प्रतिशत डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। ये हाल तब है जब इसी माह 33 नए डॉक्टर जनपद को मिले हैं। महिला अस्पताल की एमसीएच बिल्डिंग में रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण गर्भवती को 500 मीटर दूर जाकर संयुक्त चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड जांच कराना पड़ रहा है। ऐसे में इलाज के लिए लोगों को मजबूरी में निजी संस्थानों में जाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिले में 18 सीएचसी संचालित हैं लेकिन इनमें स्त्री रोग विशेषज्ञों की तैनाती महज दो केंद्रों पर है। महिलाओं से संबंधित गंभीर बीमारियों और प्रसव संबंधी जटिल मामलों में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी तरह 18 सीएचसी पर सात बाल रोग विशेषज्ञ ही तैनात हैं, जबकि 11 पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं।
बच्चों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिलने पर परिजन निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर होते हैं। वहीं अगर हम कुल डॉक्टरों की बात करें तो जिले के 18 सीएचसी और 41 पीएचसी में चिकित्सकों के कुल 167 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 108 चिकित्सकों की तैनाती है। इसमें भी 39 डाॅक्टर बांड पर तैनात हैं। वहीं संविदा के 46 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 19 संविदा वाले डॉक्टर की ही तैनाती है।
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फिजिशियन के 15 पद खाली
सीएचसी स्तर पर फिजिशियन की कमी भी बड़ी समस्या बनी हुई है। जिले में फिजिशियन के स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल तीन चिकित्सकों की तैनाती है, जबकि 15 पद खाली हैं। ऐसे में सामान्य बीमारियों के साथ गंभीर मरीजों के इलाज में भी परेशानी होती है। कई बार मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है।
17 अस्पतालों में सर्जन नहीं
ऑपरेशन की सुविधा भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से प्रभावित है। जिले के 18 अस्पतालों में केवल एक सर्जन तैनात है। 17 अस्पतालों में सर्जन के पद खाली हैं। ऐसे में जिन मरीजों को ऑपरेशन की आवश्यकता होती है, उन्हें दूसरे अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
जिला अस्पताल में भी कई पद खाली
जिला अस्पताल में भी चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में दो रेडियोलॉजिस्ट और एक कार्डियोलॉजिस्ट, ट्रामा सेंटर में दो सर्जन, महिला अस्पताल में दो गायनकोलॉजिस्ट और दो निश्चेतक समेत एक चिकित्सा अधिकारी का पद खाली है। वहीं इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के छह पद रिक्त हैं। इससे इमरजेंसी सेवाओं पर भी दबाव बना रहता है।
वर्जन
आंख में परेशानी थी, इलाज के लिए सीएचसी निचलौल पहुंचा तो संबंधित चिकित्सक नहीं मिलने के कारण निराश होकर लौटना पड़ा। मजबूरी में निजी अस्पताल में जाकर जांच करा कर दवा करानी पड़ी।
- गोबिंद, निवासी घोड़हवा
करीब एक सप्ताह से दांत में दर्द हो रहा था। निचलौल सीएचसी गया लेकिन दांत के डॉक्टर नहीं होने के कारण पर्ची तक नहीं कटाई। बाद में निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। सरकार को सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती करनी चाहिए।
- सुभाष कसौधन, खोन्हौली
वर्जन
डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी दूर करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही रिक्त पदों पर चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की तैनाती कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- डाॅ. सुरेन्द्र कुमार चौधरी, मुख्य चिकित्साधिकारी
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जिले के सीएचसी और पीएचसी में डॉक्टरों के स्वीकृत
167 पदों के सापेक्ष 108 ही तैनात
महराजगंज। जिले के सरकारी अस्पतालों में करीब 36 प्रतिशत डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। ये हाल तब है जब इसी माह 33 नए डॉक्टर जनपद को मिले हैं। महिला अस्पताल की एमसीएच बिल्डिंग में रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण गर्भवती को 500 मीटर दूर जाकर संयुक्त चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड जांच कराना पड़ रहा है। ऐसे में इलाज के लिए लोगों को मजबूरी में निजी संस्थानों में जाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिले में 18 सीएचसी संचालित हैं लेकिन इनमें स्त्री रोग विशेषज्ञों की तैनाती महज दो केंद्रों पर है। महिलाओं से संबंधित गंभीर बीमारियों और प्रसव संबंधी जटिल मामलों में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी तरह 18 सीएचसी पर सात बाल रोग विशेषज्ञ ही तैनात हैं, जबकि 11 पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं।
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बच्चों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिलने पर परिजन निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर होते हैं। वहीं अगर हम कुल डॉक्टरों की बात करें तो जिले के 18 सीएचसी और 41 पीएचसी में चिकित्सकों के कुल 167 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 108 चिकित्सकों की तैनाती है। इसमें भी 39 डाॅक्टर बांड पर तैनात हैं। वहीं संविदा के 46 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 19 संविदा वाले डॉक्टर की ही तैनाती है।
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फिजिशियन के 15 पद खाली
सीएचसी स्तर पर फिजिशियन की कमी भी बड़ी समस्या बनी हुई है। जिले में फिजिशियन के स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल तीन चिकित्सकों की तैनाती है, जबकि 15 पद खाली हैं। ऐसे में सामान्य बीमारियों के साथ गंभीर मरीजों के इलाज में भी परेशानी होती है। कई बार मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है।
17 अस्पतालों में सर्जन नहीं
ऑपरेशन की सुविधा भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से प्रभावित है। जिले के 18 अस्पतालों में केवल एक सर्जन तैनात है। 17 अस्पतालों में सर्जन के पद खाली हैं। ऐसे में जिन मरीजों को ऑपरेशन की आवश्यकता होती है, उन्हें दूसरे अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
जिला अस्पताल में भी कई पद खाली
जिला अस्पताल में भी चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में दो रेडियोलॉजिस्ट और एक कार्डियोलॉजिस्ट, ट्रामा सेंटर में दो सर्जन, महिला अस्पताल में दो गायनकोलॉजिस्ट और दो निश्चेतक समेत एक चिकित्सा अधिकारी का पद खाली है। वहीं इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के छह पद रिक्त हैं। इससे इमरजेंसी सेवाओं पर भी दबाव बना रहता है।
वर्जन
आंख में परेशानी थी, इलाज के लिए सीएचसी निचलौल पहुंचा तो संबंधित चिकित्सक नहीं मिलने के कारण निराश होकर लौटना पड़ा। मजबूरी में निजी अस्पताल में जाकर जांच करा कर दवा करानी पड़ी।
- गोबिंद, निवासी घोड़हवा
करीब एक सप्ताह से दांत में दर्द हो रहा था। निचलौल सीएचसी गया लेकिन दांत के डॉक्टर नहीं होने के कारण पर्ची तक नहीं कटाई। बाद में निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। सरकार को सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती करनी चाहिए।
- सुभाष कसौधन, खोन्हौली
वर्जन
डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी दूर करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही रिक्त पदों पर चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की तैनाती कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- डाॅ. सुरेन्द्र कुमार चौधरी, मुख्य चिकित्साधिकारी