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Maharajganj News: कोयले का दाम बढ़ने से ईंट के दाम बढ़े, महंगा हो गया घर बनवाना
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एक दुकान पर रखा गया कोयला।
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जनपद में संचालित हैं 290 ईंट भट्ठे,
भारतीय क्षेत्र का कोयला 1500 से 2000 रुपये प्रति टन तक बढ़ा
कोयले की महंगाई से ईंट तो कॉमर्शियल गैस की कमी से टाइल्स के बढ़े दाम
महराजगंज। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के प्रभाव का दायरा विस्तृत हो रहा है। ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण महंगे हुए कोयले की वजह से ईंटों के दाम बढ़ गए हैं। वहीं कामर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने कारण टाइल्स भी महंगे हो गए हैं। इस वजह से लोगों के मकान बनवाने का बजट बिगड़ गया है।
बाहर से आने वाले कोयले का रेट बढ़ने से भट्ठा संचालकों ने ईंटों का दाम बढ़ा दिया है। ईंट उद्योग के संचालक प्रताप सिंह ने बताया कि जनपद में 290 ईंट भट्ठा संचालित। कोयले के सर्वाधिक खरीदार जनपद में ईंट भट्ठे ही हैं। भट्ठों का काम जनवरी से मई तक पांच माह का होता है। मार्च से अप्रैल तक ईंटों को पकाया जाता है। कोयला महंगा होने के कारण भट्टा संचालकों को नुकसान हो रहा था। इसके बाद एक ट्राॅली के पीछे दो हजार रुपये बढ़ा दिए गए हैं। पकड़ी नौनिया के भट्ठा संचालक संजय वर्मा ने बताया कि मार्च में युद्ध के चलते भारतीय क्षेत्र का कोयला जहां 1500 से 2000 रुपये प्रति टन बढ़ा वहीं इंडोनेशिया व अमेरिका से आयातित बेहतर क्वालिटी का कोयला सात हजार रुपये टन तक बढ़ गया है।
आरके बिक्र फील्ड अजय कुमार ओझा ने बताया कि सरकारी कार्यों में आरसीसी ईंटों का प्रावधान किए जाने से पहले की तरह भट्ठा कारोबार नहीं रहा। ऐसे में कोयला के बढ़े रेट से पकाने का खर्च बढ़ा तो ईंट का रेट बढ़ाया गया। कोयला कारोबारी नगेन्द्र ने बताया कि झरिया (झारखंड), रानीगंज (पश्चिम बंगाल) तिनसुकिया (असम) का कोयला प्रति टन के पीछे पंद्रह सौ तक बढ़ा है। एलपीजी किल्लत के बीच रेस्टोरेंट व होटल संचालक बढ़ी दर पर भी कोयला खरीद रहे हैं।
20 फीसदी महंगे हुए टाइल्स के दाम
युद्ध के चलते पैदा हुई गैस की किल्लत के बीच टाइल्स 20 फीसदी तक महंगे हो गए हैं। व्यापारी सुबोध कुमार सिंह ने बताया कि कंपनियों की ओर से गैस की किल्लत और केमिकल की आपूर्ति ठीक न होने के कारण टाइल्स कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए हैं। टाइल्स फिनिशिंग व कटिंग में कंपनियां कामर्शियल गैस का उपयोग करती हैं। आपूर्ति प्रभावित होने के कारण रेट बढ़े हैं। एक पेटी टाइल्स पहले 700 रुपये से बढ़कर 770 रुपये हो गई है। रेट बढ़ने से बिक्री घटी है। दीपक गुप्ता ने बताया पेंट मैन्युफैक्चरिंग में गैस का उपयोग कंपनियां करती हैं। गैस की किल्लत के कारण कंपनियों ने रेट बढ़ाया है। रेट बढ़ने के कारण नया ऑर्डर नहीं दिया जा रहा है।
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भारतीय क्षेत्र का कोयला 1500 से 2000 रुपये प्रति टन तक बढ़ा
कोयले की महंगाई से ईंट तो कॉमर्शियल गैस की कमी से टाइल्स के बढ़े दाम
महराजगंज। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के प्रभाव का दायरा विस्तृत हो रहा है। ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण महंगे हुए कोयले की वजह से ईंटों के दाम बढ़ गए हैं। वहीं कामर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने कारण टाइल्स भी महंगे हो गए हैं। इस वजह से लोगों के मकान बनवाने का बजट बिगड़ गया है।
बाहर से आने वाले कोयले का रेट बढ़ने से भट्ठा संचालकों ने ईंटों का दाम बढ़ा दिया है। ईंट उद्योग के संचालक प्रताप सिंह ने बताया कि जनपद में 290 ईंट भट्ठा संचालित। कोयले के सर्वाधिक खरीदार जनपद में ईंट भट्ठे ही हैं। भट्ठों का काम जनवरी से मई तक पांच माह का होता है। मार्च से अप्रैल तक ईंटों को पकाया जाता है। कोयला महंगा होने के कारण भट्टा संचालकों को नुकसान हो रहा था। इसके बाद एक ट्राॅली के पीछे दो हजार रुपये बढ़ा दिए गए हैं। पकड़ी नौनिया के भट्ठा संचालक संजय वर्मा ने बताया कि मार्च में युद्ध के चलते भारतीय क्षेत्र का कोयला जहां 1500 से 2000 रुपये प्रति टन बढ़ा वहीं इंडोनेशिया व अमेरिका से आयातित बेहतर क्वालिटी का कोयला सात हजार रुपये टन तक बढ़ गया है।
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आरके बिक्र फील्ड अजय कुमार ओझा ने बताया कि सरकारी कार्यों में आरसीसी ईंटों का प्रावधान किए जाने से पहले की तरह भट्ठा कारोबार नहीं रहा। ऐसे में कोयला के बढ़े रेट से पकाने का खर्च बढ़ा तो ईंट का रेट बढ़ाया गया। कोयला कारोबारी नगेन्द्र ने बताया कि झरिया (झारखंड), रानीगंज (पश्चिम बंगाल) तिनसुकिया (असम) का कोयला प्रति टन के पीछे पंद्रह सौ तक बढ़ा है। एलपीजी किल्लत के बीच रेस्टोरेंट व होटल संचालक बढ़ी दर पर भी कोयला खरीद रहे हैं।
20 फीसदी महंगे हुए टाइल्स के दाम
युद्ध के चलते पैदा हुई गैस की किल्लत के बीच टाइल्स 20 फीसदी तक महंगे हो गए हैं। व्यापारी सुबोध कुमार सिंह ने बताया कि कंपनियों की ओर से गैस की किल्लत और केमिकल की आपूर्ति ठीक न होने के कारण टाइल्स कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए हैं। टाइल्स फिनिशिंग व कटिंग में कंपनियां कामर्शियल गैस का उपयोग करती हैं। आपूर्ति प्रभावित होने के कारण रेट बढ़े हैं। एक पेटी टाइल्स पहले 700 रुपये से बढ़कर 770 रुपये हो गई है। रेट बढ़ने से बिक्री घटी है। दीपक गुप्ता ने बताया पेंट मैन्युफैक्चरिंग में गैस का उपयोग कंपनियां करती हैं। गैस की किल्लत के कारण कंपनियों ने रेट बढ़ाया है। रेट बढ़ने के कारण नया ऑर्डर नहीं दिया जा रहा है।