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Maharajganj News: पाकिस्तान के ननकाना साहिब से दर्शन कर लौटे सिख जत्थे का किया गया स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 23 Apr 2026 02:30 AM IST
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नौतनवां। पाकिस्तान के ननकाना साहिब समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों का दर्शन कर वापस लौटे सिख समुदाय के 11 सदस्यीय जत्थे का बुधवार को संगत के अध्यक्ष मंजीत सिंह और उनकी टीम ने नौतनवा में स्वागत किया।
नौतनवा से पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा पर निकले जत्थे का नेतृत्व परमजीत सिंह सोनू, देवेंद्र सिंह एवं अमरीक सिंह कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सात महिलाओं और चार पुरुषों समेत 11 सदस्यीय उनकी टोली दोनों देशों की कागजी औपचारिकता पूरी होने के बाद गत 10 अप्रैल को 10 दिनों की धार्मिक यात्रा पर अमृतसर (अटारी बॉर्डर) के रास्ते (वाघा बार्डर) पाकिस्तान में प्रवेश की थी। यहां से वह लोग पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित सिख पंथ के प्रथम गुरु नानक देव की जन्मस्थली ननकाना साहिब पहुंचे।
यहां विधि-विधान के अनुसार उन्होंने गुरु की अरदास कर परिवार और देश में अमन-चैन बने रहने की कामना की। इसके बाद टीम ने धार्मिक यात्रा के दौरान पाकिस्तान स्थित पंजा साहिब, करतारपुर साहिब और लाहौर के चूना मंडी में स्थित पंथ के चौथे गुरु रामदास जी की जन्मभूमि पर पहुंच ऐतिहासिक स्थलों का दर्शन प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि ननकाना साहिब का दर्शन कर पाना अपने आपमें सौभाग्य की बात है। यह वही स्थान है, जहां पहले गुरु नानकदेव ने जन्म लिया, पंजा साहिब में आज भी उनके पंजे का निशान मौजूद है। करतारपुर साहिब में गुरु नानक देव ने 18 वर्षों तक खेती की थी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान पाकिस्तान के गुरुद्वारा साहिब के जिम्मेदारों ने पूरा सहयोग किया।
यात्रा संपन्न होने के बाद जत्था उसी रास्ते 19 अप्रैल को वापस अपने वतन लौटा। संगत के प्रधान मंजीत सिंह ने कहा कि पवित्र धार्मिक स्थल ननकाना साहिब का दर्शन कर लौटे जत्थे का नौतनवा में भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि गुरु से कामना करते हैं कि आगे भी हमारी टोलियां दर्शन के लिए जाती रहें और प्रभु का आशीर्वाद हमेशा बना रहे।
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नौतनवा से पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा पर निकले जत्थे का नेतृत्व परमजीत सिंह सोनू, देवेंद्र सिंह एवं अमरीक सिंह कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सात महिलाओं और चार पुरुषों समेत 11 सदस्यीय उनकी टोली दोनों देशों की कागजी औपचारिकता पूरी होने के बाद गत 10 अप्रैल को 10 दिनों की धार्मिक यात्रा पर अमृतसर (अटारी बॉर्डर) के रास्ते (वाघा बार्डर) पाकिस्तान में प्रवेश की थी। यहां से वह लोग पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित सिख पंथ के प्रथम गुरु नानक देव की जन्मस्थली ननकाना साहिब पहुंचे।
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यहां विधि-विधान के अनुसार उन्होंने गुरु की अरदास कर परिवार और देश में अमन-चैन बने रहने की कामना की। इसके बाद टीम ने धार्मिक यात्रा के दौरान पाकिस्तान स्थित पंजा साहिब, करतारपुर साहिब और लाहौर के चूना मंडी में स्थित पंथ के चौथे गुरु रामदास जी की जन्मभूमि पर पहुंच ऐतिहासिक स्थलों का दर्शन प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि ननकाना साहिब का दर्शन कर पाना अपने आपमें सौभाग्य की बात है। यह वही स्थान है, जहां पहले गुरु नानकदेव ने जन्म लिया, पंजा साहिब में आज भी उनके पंजे का निशान मौजूद है। करतारपुर साहिब में गुरु नानक देव ने 18 वर्षों तक खेती की थी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान पाकिस्तान के गुरुद्वारा साहिब के जिम्मेदारों ने पूरा सहयोग किया।
यात्रा संपन्न होने के बाद जत्था उसी रास्ते 19 अप्रैल को वापस अपने वतन लौटा। संगत के प्रधान मंजीत सिंह ने कहा कि पवित्र धार्मिक स्थल ननकाना साहिब का दर्शन कर लौटे जत्थे का नौतनवा में भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि गुरु से कामना करते हैं कि आगे भी हमारी टोलियां दर्शन के लिए जाती रहें और प्रभु का आशीर्वाद हमेशा बना रहे।

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