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Maharajganj News: केंद्रीय बजट से किसी को रोजगार तो किसी को महंगाई से राहत की उम्मीद
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व्यापारी चाहते अनुदान तो नौकरी पेशा टैक्स छूट
महराजगंज। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आज वित्तीय सत्र 2026-27 के लिए बजट प्रस्तुत करेंगी। बजट को लेकर समाज के सभी वर्ग के लोगों में उत्सुकता है। हर कोई चाहता है कि सरकार बजट में उसके हितों का ध्यान रखे और कुछ सहूलियत प्रदान करे।
अधिकांश लोग महंगाई को नियंत्रित करने और रोजगार के अवसरों को लेकर उम्मीद लगाए बैठे हैं। बजट किसकी उम्मीद पर खरा उतरता है और किसकी उम्मीदों पर बर्फ जमाता है यह आज तय होगा। विभिन्न वर्गों की क्या अपेक्षा बजट से है यह जानने के लिए विभिन्न क्षेत्र के लोगों से बात की गई। लोगों ने खुद से जुड़े मुद्दों को प्रमुख बताते हुए राहत की उम्मीद जताई है।
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एमएसएमई को मिले बढ़ावा
छोटे व मंझोले उद्योग अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के सशक्त माध्यम है। इसे बढ़ावा देने के लिए भारी उद्योग जैसे टैक्स लगाने की जगह रियायत मिलनी चाहिए। इनके मैन्युफैक्चरिंग की लिमिट है ऐसे में टैक्स की एक लिमिट तय होना जरूरी है कि कितने उत्पादन पर कितनी जीएसटी वसूल होगी।
-आत्मा राम गुप्ता, फर्नीचर कारोबारी
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पारंपरिक की जगह हो आधुनिक मशीनीकरण
जो उद्योग लंबे वक्त से गतिशील हैं उनमें पारंपरिक उत्पादन की जगह मशीनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। पारंपरिक की जगह मशीनीकरण के लिए अनुदान मिले तो उत्पादन न सिर्फ बढ़ जाएगी बल्कि गुणवत्ता बेहतर होने पर बिक्री का ग्राफ भी बढ़ेगा। जनपद में गुड़ निर्माण में यह उपयुक्त होगा।
-विनोद कुमार गुप्ता, कारोबारी।
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स्टार्टअप के लिए पूंजी सहयोग बढ़े
युवाओं के लिए रोजगार सृजन की जरूरत सर्वाधिक आवश्यकता है। इसके लिए सर्वाधिक जरूरत स्टार्टअप को भरपूर फंडिंग मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी में सहयोग तो है, लेकिन इसमें केंद्रीय प्रावधान हो जाए तो जो 5 लाख का ऋण लिमिट है उसे कम से कम 50 लाख तक किया जाना चाहिए जिससे लगने वाले उद्योग में अधिक रोजगार सृजित होंगे।
-सिद्धांत गोयनका, युवा।
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एआई एक्सीलेंस का जनपद में हो इंतजाम
आने वाला वक्त एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) का है। यह तकनीकी यूथ के लिए अनिवार्य किया जाए जिससे युवाओं को तकनीकी गुणवत्ता सीखने के लिए बड़े शहरों की दौड़ भाग न करनी पड़े। जनपद स्तर पर प्रबंधन से तकनीकी दक्षता बढ़ेगी तो काम का पारितोषिक बढ़ेगा।
-सत्यम गुप्ता, युवा।
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जैविक खेती का मिले प्रशिक्षण
कृषि अर्थव्यवस्था वाला हमारा देश है इसलिए कृषि में नवाचार सर्वाधिक जरूरी है। जैविक या प्राकृतिक खेती एक तरह से नवाचार ही है। बिना रासायनिक उर्वरक फसल का मूल्य सामान्य उत्पादित फसल से अधिक मिलता है। इसके प्रशिक्षण के लिए ग्राम पंचायतों में नियमित शिविर लगाकर जैविक खेती सिखाने का इंतजाम होना चाहिए।
-दुर्गेश कुमार, किसान।
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निकटतम क्षेत्र में हो बिक्री इंतजाम
किसान की उत्पादित फसल के बिक्री का इंतजाम निचले स्तर पर होनी चाहिए। हल्दी, आम, मिर्च की फसल अधिक दिन प्रिजर्व नहीं कर सकते। लोकल मंडी में भाव नहीं तो किसान गैर राज्य की मंडियों को इसलिए नहीं पहुंचा पाते। निचले स्तर पर बाजार विकसित करने के लिए गेहूं, धान की तरह इनकी खरीद भी सरकारी एजेंसी से करने का प्रावधान जरूरी है।
-प्रेम यादव, किसान।
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एफडी व विकास पत्र पर मिले छूट
नौकरी करने वालों को टैक्स में छुट का प्रावधान एफडी, विकास पत्र, मेडिकल बीमा व अन्य प्रारूप वाले एक तरह से सरकार के पास निवेश कर रहे। ऐसे माध्यमों से कमाई का निवेश करने वालों को टैक्स छूट का लाभ दिया जाए। पूरे वेतनमान पर टैक्स की जगह इन निवेशों में दी राशि को घटाने के बाद शेष पर टैक्स लिया जाए।
-अनुज पटेल, सहायतक अध्यापक।
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पारिवार के लिए खर्च राशि से टैक्स हटे
नौकरी पेशा कर्मचारियों के वेतन का एक हिस्सा परिवार की जरूरतों व उनका भविष्य संरक्षित रखने के उद्देश्य से खर्च होता है। ऐसे में परिवार पर हो रहे खर्च को काटने के बाद इन्कम टैक्स की गणना हो।
-डॉ. केपी सिंह
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खाद्य महंगाई से बचाने के लिए बने कोष
खाद्य वस्तु जैसे अनाज, दाल, तेल, फल इत्यादि की महंगाई का सीधा असर गृहणी पर ही पड़ता है। इनकी महंगाई से घर का बजट गड़बड़ होता है। महंगाई नियंत्रित रखने के लिए एक कोष की जरूरत है। जिनके रेट बहुत अधिक बढ़ें उनको सुविधा जनक कीमत में वापस लाया जा सके।
-दीक्षा मणि, गृहणी
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घरेलू गैस उपयोग का तय हो मानक
घरेलू गैस पर सब्सिडी का लाभ पाने में असमानता बनी हुई है। ऐसे में घरेलू गैस की सब्सिडी किसी को महीने में तीन से चार बार तो किसी को महीने में एक बार। इसलिए एक लिमिट तय हो इससे अधिक उपयोग पर सब्सिडी वाले सिलेंडर का लाभ न मिले।
-सोनाक्षी गोयनका, गृहणी।
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महराजगंज। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आज वित्तीय सत्र 2026-27 के लिए बजट प्रस्तुत करेंगी। बजट को लेकर समाज के सभी वर्ग के लोगों में उत्सुकता है। हर कोई चाहता है कि सरकार बजट में उसके हितों का ध्यान रखे और कुछ सहूलियत प्रदान करे।
अधिकांश लोग महंगाई को नियंत्रित करने और रोजगार के अवसरों को लेकर उम्मीद लगाए बैठे हैं। बजट किसकी उम्मीद पर खरा उतरता है और किसकी उम्मीदों पर बर्फ जमाता है यह आज तय होगा। विभिन्न वर्गों की क्या अपेक्षा बजट से है यह जानने के लिए विभिन्न क्षेत्र के लोगों से बात की गई। लोगों ने खुद से जुड़े मुद्दों को प्रमुख बताते हुए राहत की उम्मीद जताई है।
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एमएसएमई को मिले बढ़ावा
छोटे व मंझोले उद्योग अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के सशक्त माध्यम है। इसे बढ़ावा देने के लिए भारी उद्योग जैसे टैक्स लगाने की जगह रियायत मिलनी चाहिए। इनके मैन्युफैक्चरिंग की लिमिट है ऐसे में टैक्स की एक लिमिट तय होना जरूरी है कि कितने उत्पादन पर कितनी जीएसटी वसूल होगी।
-आत्मा राम गुप्ता, फर्नीचर कारोबारी
पारंपरिक की जगह हो आधुनिक मशीनीकरण
जो उद्योग लंबे वक्त से गतिशील हैं उनमें पारंपरिक उत्पादन की जगह मशीनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। पारंपरिक की जगह मशीनीकरण के लिए अनुदान मिले तो उत्पादन न सिर्फ बढ़ जाएगी बल्कि गुणवत्ता बेहतर होने पर बिक्री का ग्राफ भी बढ़ेगा। जनपद में गुड़ निर्माण में यह उपयुक्त होगा।
-विनोद कुमार गुप्ता, कारोबारी।
स्टार्टअप के लिए पूंजी सहयोग बढ़े
युवाओं के लिए रोजगार सृजन की जरूरत सर्वाधिक आवश्यकता है। इसके लिए सर्वाधिक जरूरत स्टार्टअप को भरपूर फंडिंग मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी में सहयोग तो है, लेकिन इसमें केंद्रीय प्रावधान हो जाए तो जो 5 लाख का ऋण लिमिट है उसे कम से कम 50 लाख तक किया जाना चाहिए जिससे लगने वाले उद्योग में अधिक रोजगार सृजित होंगे।
-सिद्धांत गोयनका, युवा।
एआई एक्सीलेंस का जनपद में हो इंतजाम
आने वाला वक्त एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) का है। यह तकनीकी यूथ के लिए अनिवार्य किया जाए जिससे युवाओं को तकनीकी गुणवत्ता सीखने के लिए बड़े शहरों की दौड़ भाग न करनी पड़े। जनपद स्तर पर प्रबंधन से तकनीकी दक्षता बढ़ेगी तो काम का पारितोषिक बढ़ेगा।
-सत्यम गुप्ता, युवा।
जैविक खेती का मिले प्रशिक्षण
कृषि अर्थव्यवस्था वाला हमारा देश है इसलिए कृषि में नवाचार सर्वाधिक जरूरी है। जैविक या प्राकृतिक खेती एक तरह से नवाचार ही है। बिना रासायनिक उर्वरक फसल का मूल्य सामान्य उत्पादित फसल से अधिक मिलता है। इसके प्रशिक्षण के लिए ग्राम पंचायतों में नियमित शिविर लगाकर जैविक खेती सिखाने का इंतजाम होना चाहिए।
-दुर्गेश कुमार, किसान।
निकटतम क्षेत्र में हो बिक्री इंतजाम
किसान की उत्पादित फसल के बिक्री का इंतजाम निचले स्तर पर होनी चाहिए। हल्दी, आम, मिर्च की फसल अधिक दिन प्रिजर्व नहीं कर सकते। लोकल मंडी में भाव नहीं तो किसान गैर राज्य की मंडियों को इसलिए नहीं पहुंचा पाते। निचले स्तर पर बाजार विकसित करने के लिए गेहूं, धान की तरह इनकी खरीद भी सरकारी एजेंसी से करने का प्रावधान जरूरी है।
-प्रेम यादव, किसान।
एफडी व विकास पत्र पर मिले छूट
नौकरी करने वालों को टैक्स में छुट का प्रावधान एफडी, विकास पत्र, मेडिकल बीमा व अन्य प्रारूप वाले एक तरह से सरकार के पास निवेश कर रहे। ऐसे माध्यमों से कमाई का निवेश करने वालों को टैक्स छूट का लाभ दिया जाए। पूरे वेतनमान पर टैक्स की जगह इन निवेशों में दी राशि को घटाने के बाद शेष पर टैक्स लिया जाए।
-अनुज पटेल, सहायतक अध्यापक।
पारिवार के लिए खर्च राशि से टैक्स हटे
नौकरी पेशा कर्मचारियों के वेतन का एक हिस्सा परिवार की जरूरतों व उनका भविष्य संरक्षित रखने के उद्देश्य से खर्च होता है। ऐसे में परिवार पर हो रहे खर्च को काटने के बाद इन्कम टैक्स की गणना हो।
-डॉ. केपी सिंह
खाद्य महंगाई से बचाने के लिए बने कोष
खाद्य वस्तु जैसे अनाज, दाल, तेल, फल इत्यादि की महंगाई का सीधा असर गृहणी पर ही पड़ता है। इनकी महंगाई से घर का बजट गड़बड़ होता है। महंगाई नियंत्रित रखने के लिए एक कोष की जरूरत है। जिनके रेट बहुत अधिक बढ़ें उनको सुविधा जनक कीमत में वापस लाया जा सके।
-दीक्षा मणि, गृहणी
घरेलू गैस उपयोग का तय हो मानक
घरेलू गैस पर सब्सिडी का लाभ पाने में असमानता बनी हुई है। ऐसे में घरेलू गैस की सब्सिडी किसी को महीने में तीन से चार बार तो किसी को महीने में एक बार। इसलिए एक लिमिट तय हो इससे अधिक उपयोग पर सब्सिडी वाले सिलेंडर का लाभ न मिले।
-सोनाक्षी गोयनका, गृहणी।
