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Maharajganj News: लोकल सब्जियों की भरपूर आवक से बाजार गुलजार, दाम घटने से राहत
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 19 May 2026 02:08 AM IST
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सकारपार। क्षेत्र में पिछले दिनों हुई बारिश और उसके बाद अनुकूल शुष्क मौसम का असर अब खेतों के साथ बाजार में भी नजर आने लगा है। किसानों के खेतों में लोकल सब्जियों की पैदावार बढ़ने से बाजार में ताजी सब्जियों की भरपूर आवक हो रही है। इससे इनके दामों में भारी गिरावट आई है और आम लोगों को राहत मिली है। हालांकि, किसानों को लागत के अनुरूप उचित मूल्य नहीं मिलने से वे चिंतित भी नजर आ रहे हैं।
इन दिनों बांसी-धानी मार्ग सहित क्षेत्र के विभिन्न चौराहों पर शाम ढलते ही लोकल सब्जियों की छोटी-छोटी दुकानें सजने लगती हैं। गोहर, लमुही, गोनहाताल, सेमरा मुस्तहकम, सकारपार और पेड़ारी बुजुर्ग समेत कई स्थानों पर किसान सीधे खेतों से ताजी सब्जियां लाकर बेच रहे हैं। बाजारों में लौकी, नेनुआ, तरोई, भिंडी, करैला, परवल, बोड़ा, कद्दू, साग, मूली और हरी मिर्च की भरपूर उपलब्धता देखने को मिल रही है। कुछ सप्ताह पहले तक सब्जियों के बढ़े दाम से लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया था। भिंडी जहां 60 से 80 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब 15 से 20 प्रति रुपये किलो में मिल जा रही है। नेनुआ, तरोई और सरपुतिया 20 रुपये किलो के आसपास बिक रही हैं।
लौकी 10 से 15 रुपये, करेला 30 से 40 रुपये, परवल 40 रुपये तऔर साग 10 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध होने से लोग राहत महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों के किसानों द्वारा सीधे चौराहों पर सब्जियां बेचने से उन्हें ताजी और सस्ती सब्जियां आसानी से मिल जा रही हैं। वहीं, किसानों का कहना है कि उत्पादन बढ़ने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, जिससे लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद क्षेत्र में लोकल सब्जियों की बढ़ी आवक ने बाजारों में रौनक बढ़ा दी है। ग्रामीण अंचल की ताजी सब्जियां अब शहरों और कस्बों के लोगों की पहली पसंद बनती जा रही हैं।
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इन दिनों बांसी-धानी मार्ग सहित क्षेत्र के विभिन्न चौराहों पर शाम ढलते ही लोकल सब्जियों की छोटी-छोटी दुकानें सजने लगती हैं। गोहर, लमुही, गोनहाताल, सेमरा मुस्तहकम, सकारपार और पेड़ारी बुजुर्ग समेत कई स्थानों पर किसान सीधे खेतों से ताजी सब्जियां लाकर बेच रहे हैं। बाजारों में लौकी, नेनुआ, तरोई, भिंडी, करैला, परवल, बोड़ा, कद्दू, साग, मूली और हरी मिर्च की भरपूर उपलब्धता देखने को मिल रही है। कुछ सप्ताह पहले तक सब्जियों के बढ़े दाम से लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया था। भिंडी जहां 60 से 80 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब 15 से 20 प्रति रुपये किलो में मिल जा रही है। नेनुआ, तरोई और सरपुतिया 20 रुपये किलो के आसपास बिक रही हैं।
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लौकी 10 से 15 रुपये, करेला 30 से 40 रुपये, परवल 40 रुपये तऔर साग 10 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध होने से लोग राहत महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों के किसानों द्वारा सीधे चौराहों पर सब्जियां बेचने से उन्हें ताजी और सस्ती सब्जियां आसानी से मिल जा रही हैं। वहीं, किसानों का कहना है कि उत्पादन बढ़ने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, जिससे लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद क्षेत्र में लोकल सब्जियों की बढ़ी आवक ने बाजारों में रौनक बढ़ा दी है। ग्रामीण अंचल की ताजी सब्जियां अब शहरों और कस्बों के लोगों की पहली पसंद बनती जा रही हैं।