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भेड़िया मनरेगा घोटाला: 6 लाख की होगी रिकवरी, नपेंगे जिम्मेदार
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दो से तीन दिन के अंदर रिपोर्ट जिला प्रशासन तक पहुंचाने के बाद अगली कार्रवाई शुरू हो जाएगी
22 दिसंबर को अमर उजाला ने प्रकाशित की थी खबर, 31 दिसंबर को दो सदस्यीय जांच समिति का किया गया था गठन
महराजगंज। निचलौल ब्लॉक के भेड़िया में मनरेगा पार्क में मिट्टी समतलीकरण कार्य के नाम पर धांधली के मामले में जिम्मेदारों से करीब छह लाख रुपये की रिकवरी की जाएगी। आवश्यक प्रक्रिया को पूरी की जा रही है। इतना ही नहीं मामले में शामिल जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई भी हो सकती है। जांच में नामित अधिकारियों की ओर से रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। दो से तीन दिन के अंदर रिपोर्ट जिला प्रशासन तक पहुंचाने के बाद अगली कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
जानकारी के अनुसार, 22 दिसंबर को अमर उजाला के पेज नंबर तीन पर ''''फर्जीवाड़ा: भेड़िया में मनरेगा पार्क में एक ही काम का डबल भुगतान'''' शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई। खबर का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने 31 दिसंबर को दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति में उपायुक्त श्रम एवं रोजगार गौरवेंद्र सिंह और सिंचाई विभाग द्वितीय के सहायक अभियंता मन्नू चौधरी को शामिल किया गया। जिलाधिकारी ने दोनों अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे तीन दिनों के अंदर मनरेगा पार्क में कराए गए मिट्टी समतलीकरण कार्य का स्थलीय निरीक्षण कर साक्ष्यों सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
जांच समिति ने पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए दो चरणों में जांच की। पहले चरण में संबंधित अभिलेखों, कार्य स्वीकृति पत्रों, भुगतान वाउचर और बैंक खातों का गहन परीक्षण किया गया। दूसरे चरण में अधिकारियों ने संबंधित मनरेगा योजना के तहत बन रहे पार्क का स्थलीय निरीक्षण किया और वास्तविक कार्य की स्थिति का आकलन किया। जांच के दौरान यह साफ तौर पर सामने आया कि मिट्टी समतलीकरण कार्य के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया गया है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, मनरेगा पार्क में मिट्टी डालने का कार्य ग्राम पंचायत निधि से कराया गया था। इस मद में ट्रैक्टर-ट्राली के माध्यम से मिट्टी गिराने के लिए करीब 1.34 लाख रुपये का भुगतान दर्शाया गया। इसके बाद मिट्टी बराबर करने के कार्य में 85,272 रुपये का भुगतान दिखाया गया। जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस कार्य के लिए भुगतान किसी अधिकृत फर्म या एजेंसी को न करके एक व्यक्ति के व्यक्तिगत खाते में 1.34 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। यह मनरेगा और पंचायत वित्तीय नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि जिस पार्क में राज्य वित्त और ग्राम पंचायत निधि से मिट्टी समतलीकरण का कार्य पहले ही कराया जा चुका था, उसी पार्क में बाद में पुनः मनरेगा योजना के तहत मिट्टी समतलीकरण का कार्य दिखा दिया गया। इस दौरान मनरेगा मजदूरों को करीब 5.28 लाख रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। यानी एक ही कार्य को दो अलग-अलग मदों से दिखाकर भुगतान करा लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जांच समिति के समक्ष सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मनरेगा पार्क में मिट्टी समतलीकरण का कार्य पहले ही ग्राम पंचायत निधि से पूरा हो चुका था तो फिर दो माह बाद उसी पार्क में मनरेगा योजना के तहत दोबारा मिट्टी समतलीकरण का कार्य कैसे कराया गया। मौके पर निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई अतिरिक्त कार्य नहीं पाया गया, जिससे यह साबित हो सके कि दोबारा भुगतान जायज था। यही कारण है कि पूरा मामला अब सवालों के घेरे में आ गया है। जांच अधिकारियों की ओर से जांच रिपोर्ट में करीब छह लाख रुपये की रिकवरी की तैयारी की जा रही है। साथ ही जिन अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपे जाने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
वर्जन
भेड़िया में मनरेगा पार्क में मिट्टी समतलीकरण कार्य जांच लगभग पूरी हो चुकी है। सहायक अभियंता की ओर से जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है। करीब छह लाख की रिकवरी कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट दो से तीन के भीतर जिला प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।
-गौरवेंद्र सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार
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22 दिसंबर को अमर उजाला ने प्रकाशित की थी खबर, 31 दिसंबर को दो सदस्यीय जांच समिति का किया गया था गठन
महराजगंज। निचलौल ब्लॉक के भेड़िया में मनरेगा पार्क में मिट्टी समतलीकरण कार्य के नाम पर धांधली के मामले में जिम्मेदारों से करीब छह लाख रुपये की रिकवरी की जाएगी। आवश्यक प्रक्रिया को पूरी की जा रही है। इतना ही नहीं मामले में शामिल जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई भी हो सकती है। जांच में नामित अधिकारियों की ओर से रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। दो से तीन दिन के अंदर रिपोर्ट जिला प्रशासन तक पहुंचाने के बाद अगली कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
जानकारी के अनुसार, 22 दिसंबर को अमर उजाला के पेज नंबर तीन पर ''''फर्जीवाड़ा: भेड़िया में मनरेगा पार्क में एक ही काम का डबल भुगतान'''' शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई। खबर का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने 31 दिसंबर को दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति में उपायुक्त श्रम एवं रोजगार गौरवेंद्र सिंह और सिंचाई विभाग द्वितीय के सहायक अभियंता मन्नू चौधरी को शामिल किया गया। जिलाधिकारी ने दोनों अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे तीन दिनों के अंदर मनरेगा पार्क में कराए गए मिट्टी समतलीकरण कार्य का स्थलीय निरीक्षण कर साक्ष्यों सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
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जांच समिति ने पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए दो चरणों में जांच की। पहले चरण में संबंधित अभिलेखों, कार्य स्वीकृति पत्रों, भुगतान वाउचर और बैंक खातों का गहन परीक्षण किया गया। दूसरे चरण में अधिकारियों ने संबंधित मनरेगा योजना के तहत बन रहे पार्क का स्थलीय निरीक्षण किया और वास्तविक कार्य की स्थिति का आकलन किया। जांच के दौरान यह साफ तौर पर सामने आया कि मिट्टी समतलीकरण कार्य के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया गया है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, मनरेगा पार्क में मिट्टी डालने का कार्य ग्राम पंचायत निधि से कराया गया था। इस मद में ट्रैक्टर-ट्राली के माध्यम से मिट्टी गिराने के लिए करीब 1.34 लाख रुपये का भुगतान दर्शाया गया। इसके बाद मिट्टी बराबर करने के कार्य में 85,272 रुपये का भुगतान दिखाया गया। जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस कार्य के लिए भुगतान किसी अधिकृत फर्म या एजेंसी को न करके एक व्यक्ति के व्यक्तिगत खाते में 1.34 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। यह मनरेगा और पंचायत वित्तीय नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि जिस पार्क में राज्य वित्त और ग्राम पंचायत निधि से मिट्टी समतलीकरण का कार्य पहले ही कराया जा चुका था, उसी पार्क में बाद में पुनः मनरेगा योजना के तहत मिट्टी समतलीकरण का कार्य दिखा दिया गया। इस दौरान मनरेगा मजदूरों को करीब 5.28 लाख रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। यानी एक ही कार्य को दो अलग-अलग मदों से दिखाकर भुगतान करा लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जांच समिति के समक्ष सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मनरेगा पार्क में मिट्टी समतलीकरण का कार्य पहले ही ग्राम पंचायत निधि से पूरा हो चुका था तो फिर दो माह बाद उसी पार्क में मनरेगा योजना के तहत दोबारा मिट्टी समतलीकरण का कार्य कैसे कराया गया। मौके पर निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई अतिरिक्त कार्य नहीं पाया गया, जिससे यह साबित हो सके कि दोबारा भुगतान जायज था। यही कारण है कि पूरा मामला अब सवालों के घेरे में आ गया है। जांच अधिकारियों की ओर से जांच रिपोर्ट में करीब छह लाख रुपये की रिकवरी की तैयारी की जा रही है। साथ ही जिन अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपे जाने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
वर्जन
भेड़िया में मनरेगा पार्क में मिट्टी समतलीकरण कार्य जांच लगभग पूरी हो चुकी है। सहायक अभियंता की ओर से जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है। करीब छह लाख की रिकवरी कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट दो से तीन के भीतर जिला प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।
-गौरवेंद्र सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार
