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Mahoba News: 17 साल पुराना कर्ज का मामला 17 मिनट में निपटा, मिला सुकून
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Sat, 14 Mar 2026 11:42 PM IST
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महोबा। साल 2009 में जब किसान जय प्रकाश ने एसबीआई से 90 हजार का कर्ज लिया था तब उसे पता नहीं था कि परिस्थितियां उसे और परेशान करेंगी। समय पर लोन अदा न करने के चलते ब्याज लगना शुरू हुआ और सिर पर ढाई लाख रुपये का कर्जा हो गया। इस कर्ज को शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में जयप्रकाश ने समाप्त किया। 17 मिनट के अंदर बैंक अधिकारियों और जय प्रकाश के बीच समझौता हुआ और 60 हजार रुपये एकमुश्त जमा करके 17 साल पुराना मामला निपट गया। इसके बाद जयप्रकाश को राहत की सांस ली।
राष्ट्रीय लोक अदालत में केवल जय प्रकाश ही नहीं थे। उनकी तरह शहर और ग्रामीण इलाकों से कई किसान आए और समझौता कर अपना कर्जा अदा करते रहे। लोक अदालत में सुबह से ही वादकारियों की भीड़ जुटी। मोटर दुर्घटना, बैंक वाद, किरायेदारी, बिजली निगम से संबंधित मामले सर्वाधिक रहे। अधिकारियों ने वादकारियों के मामलों को सुना। अधिकांश मामले दस से पंद्रह मिनट में निस्तारित हुए। दस से 20 वर्ष से घूम रहे लोगों को लोक अदालत में आसानी से न्याय मिला। लोन के मामलों में जहां भारी छूट दी गई। इससे मामले निस्तारित हुए और दोनों पक्षों ने अपनी जीत महसूस की। इस दौरान न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
चंद मिनटों में निपटी समस्या तो महसूस की राहत
थाना अजनर के सुगनिया निवासी जयप्रकाश ने बताया कि वर्ष 2009 में 90 हजार रुपये का लोन स्थानीय एसबीआई शाखा से लिया था। जो वर्ष 2026 में बढ़कर ढाई लाख रुपये पहुंच चुका था। राष्ट्रीय लोक अदालत पर शनिवार की दोपहर एक बजे पहुंचे और बैंक अधिकारियों से बातचीत कर 17 मिनट के अंदर इस समस्या का हल निकल आया। बैंक की ओर से 60 हजार रुपये एकमुश्त जमा करने पर कर्ज समाप्त करने की बात कही गई। 60 हजार जमा कर लोन समाप्त करा लिया गया।
1.62 लाख का कर्ज लोक अदालत में 32 हजार में निपटा
सुगनिया गांव निवासी लखन ने बताया कि उसने 2018 में एसबीआई की शाखा से 83,000 का कर्ज लिया था। जो वर्तमान में बढ़कर एक लाख 62 हजार रुपये पहुंच चुका था। शनिवार को महोबा में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में वह बारह बजे दोपहर को पहुंचा और एक बजे 32 हजार रुपये एकमुश्त जमा कर लोन को समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में समस्याएं आसानी से निस्तारित हो जाती हैं।
2.10 लाख का कर्ज 77 हजार में हुआ चुकता
थाना श्रीनगर के सिजहरी गांव निवासी कालीचरण ने बताया कि उनके पिता दिवंगत हीरालाल ने 2014 में आर्यावर्त बैंक से एक लाख 29 हजार रुपये लोन लिया था। जो धीरे-धीरे बढ़कर दो लाख 10 हजार रुपये हो गया था। 2023 में पिता का निधन हो गया, तब से वह इस लोन को समाप्त करने का प्रयास कर रहा था लेकिन शनिवार को लोक अदालत में पहुंचकर 77 हजार रुपये एकमुश्त जमा करने पर सहमति बनी है। कालीचरण ने कहा कि वह सुबह दस बजे आया और लाइन में लग गया। भीड़ होने के कारण उसका नंबर काफी देर में आया।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में केवल जय प्रकाश ही नहीं थे। उनकी तरह शहर और ग्रामीण इलाकों से कई किसान आए और समझौता कर अपना कर्जा अदा करते रहे। लोक अदालत में सुबह से ही वादकारियों की भीड़ जुटी। मोटर दुर्घटना, बैंक वाद, किरायेदारी, बिजली निगम से संबंधित मामले सर्वाधिक रहे। अधिकारियों ने वादकारियों के मामलों को सुना। अधिकांश मामले दस से पंद्रह मिनट में निस्तारित हुए। दस से 20 वर्ष से घूम रहे लोगों को लोक अदालत में आसानी से न्याय मिला। लोन के मामलों में जहां भारी छूट दी गई। इससे मामले निस्तारित हुए और दोनों पक्षों ने अपनी जीत महसूस की। इस दौरान न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
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चंद मिनटों में निपटी समस्या तो महसूस की राहत
थाना अजनर के सुगनिया निवासी जयप्रकाश ने बताया कि वर्ष 2009 में 90 हजार रुपये का लोन स्थानीय एसबीआई शाखा से लिया था। जो वर्ष 2026 में बढ़कर ढाई लाख रुपये पहुंच चुका था। राष्ट्रीय लोक अदालत पर शनिवार की दोपहर एक बजे पहुंचे और बैंक अधिकारियों से बातचीत कर 17 मिनट के अंदर इस समस्या का हल निकल आया। बैंक की ओर से 60 हजार रुपये एकमुश्त जमा करने पर कर्ज समाप्त करने की बात कही गई। 60 हजार जमा कर लोन समाप्त करा लिया गया।
1.62 लाख का कर्ज लोक अदालत में 32 हजार में निपटा
सुगनिया गांव निवासी लखन ने बताया कि उसने 2018 में एसबीआई की शाखा से 83,000 का कर्ज लिया था। जो वर्तमान में बढ़कर एक लाख 62 हजार रुपये पहुंच चुका था। शनिवार को महोबा में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में वह बारह बजे दोपहर को पहुंचा और एक बजे 32 हजार रुपये एकमुश्त जमा कर लोन को समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में समस्याएं आसानी से निस्तारित हो जाती हैं।
2.10 लाख का कर्ज 77 हजार में हुआ चुकता
थाना श्रीनगर के सिजहरी गांव निवासी कालीचरण ने बताया कि उनके पिता दिवंगत हीरालाल ने 2014 में आर्यावर्त बैंक से एक लाख 29 हजार रुपये लोन लिया था। जो धीरे-धीरे बढ़कर दो लाख 10 हजार रुपये हो गया था। 2023 में पिता का निधन हो गया, तब से वह इस लोन को समाप्त करने का प्रयास कर रहा था लेकिन शनिवार को लोक अदालत में पहुंचकर 77 हजार रुपये एकमुश्त जमा करने पर सहमति बनी है। कालीचरण ने कहा कि वह सुबह दस बजे आया और लाइन में लग गया। भीड़ होने के कारण उसका नंबर काफी देर में आया।