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Mahoba News: आधार कार्ड और पांच हजार रुपये लाइए...सब हो जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:31 AM IST
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महोबा। प्लाई से बने कक्षों के पीछे से चलने वाले एआरटीओ कार्यालय की जड़ों में दलालों ने ऐसी सेंध लगा रखी है। इसकी बानगी भर से ही सभी स्तब्ध रह जाएंगे। यहां सीधे आने वाले आवेदकों के लिए इतने कानून व कायदे बताए जाएंगे कि वह न चाहते हुए भी दलालों के जाल में फंस जाएगा। वहीं दलालों को केवल आधार कार्ड और मुंह मांगा रुपये देने पर सारे नियम व कायदे समाप्त हो जाते हैं और आवेदकों को बिना किसी फजीहत के उनका लक्ष्य मिल जाता है।
एआरटीओ कार्यालय के बाहर दलालों का जाल, नई बात तो नहीं है। एआरटीओ कार्यालय में जब भी देखेंगे तो आवेदकों के साथ एक दलाल जरूर रहता है। यहां पर चालान भरने के अलावा ऐसा कोई काम नहीं जो आवेदक अपने दम पर कर सकें। आवेदक चाहे अनपढ़ हो या पढ़ा-लिखा। यहां आने के बाद केवल दलालों की भाषा ही चलती है और उनके भरे गए आवेदन ही तुरंत स्वीकार किए जाते हैं। आवेदक अगर खुद से कोई आवेदन करता है तो उसमें कोई न कोई कमी बताकर उसे ठीक करने को कहा जाता है।
संवाद न्यूज एजेंसी टीम ने एआरटीओ कार्यालय में चल रही गतिविधियों को बारीकी से देखा तो पता चला कि यहां पर आने वाले हर आवेदक के साथ अधिकांश तौर पर बाहर बैठे किसी ने किसी दलाल का मोबाइल नंबर होता है और वह अपना समय बचाने के लिए रुपये खर्च करता है। दलाल इसी बात का फायदा उठाते हैं और अपनी दुकानों पर रखे फार्मों में आवेदक का ब्योरा भरकर उनसे अधिक रुपये लेकर उनका काम कराते हैं। गेट से अंदर आने वाले हर आवेदक के आगे एक दलाल फार्म लेकर चलता हुआ नजर आएगा। बुधवार को टीम ने जब पड़ताल की तो बाहर बैठे एक दलाल ने ऐसी बात कही कि विभाग की पोल खुल गई। ग्राहक बनकर बातचीत करने पर दलालों की बनाई व्यवस्था के बारे में जानकारी हुई।
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दलालों से एक बातचीत के कुछ अंश:-
आवेदक:- भाई साहब, एक नया डीएल बनवाना है, बन जाएगा..
दलाल:- बन जाएगा, कहां के रहने वाले हो।
आवेदक:- महोबा का रहने वाला हूं, कौन-कौन सा कागज लगेगा..
दलाल:- केवल आधार कार्ड लगेगा और बन जाएगा।
आवेदक:- भैया, सुना है ऑनलाइन टेस्ट देना पड़ता है, डीएल के लिए...
दलाल:- हां, टेस्ट देने के बाद ही लर्निंग व परमानेंट डीएल बनते हैं।
आवेदक:- भैया, टेस्ट न देना पड़े, ऐसा जुगाड़ हो तो बताओ और खर्चा बताओ...
दलाल:- आधार कार्ड ले आना और पांच हजार रुपये, बाकी सब मैनेज हो जाएगा।
आवेदक:- टेस्ट मुझे ही देना पड़ेगा या कोई और देगा..
दलाल:- सब व्यवस्था हो जाएगी, पैसा लेकर आओ, फिर बताना।
आवेदक:- ऑनलाइन कहां से कराना होगा...
दलाल:- सारा काम यही से हो जाएगा, ऑनलाइन आवेदन भी कर दिया जाएगा।
आवेदक:- लर्निंग का पांच हजार और परमानेंट का कितना देना होगा...
दलाल:- यह पूरा पैसा है, 1,500 लर्निंग का और 3,500 परमानेंट का।
आवेदक:- ठीक हैं, पैसे की व्यवस्था करके आता हूं।
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दलालों से दूसरी बातचीत के अंश:-
आवेदक- भाईसाहब, एक जानकारी मिल जाएगी...
दलाल- बताइए, क्या जानकारी चाहिए।
आवेदक- मैं गैर जनपद का रहने वाला हूं, डीएल बन जाएगा क्या...
दलाल:- आधार कार्ड में एड्रेस कहां का है...
आवेदक:- महोबा का नहीं है
दलाल:- महोबा का एक एड्रेस जरूरी है, जहां काम करते हो वहां से लेटर ले आओ
आवेदक:- लेटर मिल जाएगा, टेस्ट देना जरूरी होता है क्या...
दलाल:- जरूरी है लेकिन सारी व्यवस्था हो जाएगी, लेटर लेकर आओ पहले
आवेदक:- कितना खर्चा आ जाएगा सब मिलाकर।
दलाल:- लेटर ले लाओ तो पांच हजार रुपये में हो जाएगा, टेस्ट पास करा दिया जाएगा।
आवेदक:- ठीक है, पैसा व लेटर लेकर मिलते हैं।
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शासन ने लाइसेंस बनवाने की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन की है। आवेदक कहीं से भी ऑनलाइन फार्म भरकर टेस्ट दे सकता है। उसे कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। परमानेंट लाइसेंस के लिए बायोमीट्रिक होती है। जिसके लिए आवेदक को आना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति कार्यालय के नाम पर सुविधा शुल्क मांगता है तो इसकी लिखित शिकायत करें, कार्रवाई की जाएगी। -दयाशंकर, एआरटीओ, महोबा।
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एआरटीओ कार्यालय के बाहर दलालों का जाल, नई बात तो नहीं है। एआरटीओ कार्यालय में जब भी देखेंगे तो आवेदकों के साथ एक दलाल जरूर रहता है। यहां पर चालान भरने के अलावा ऐसा कोई काम नहीं जो आवेदक अपने दम पर कर सकें। आवेदक चाहे अनपढ़ हो या पढ़ा-लिखा। यहां आने के बाद केवल दलालों की भाषा ही चलती है और उनके भरे गए आवेदन ही तुरंत स्वीकार किए जाते हैं। आवेदक अगर खुद से कोई आवेदन करता है तो उसमें कोई न कोई कमी बताकर उसे ठीक करने को कहा जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी टीम ने एआरटीओ कार्यालय में चल रही गतिविधियों को बारीकी से देखा तो पता चला कि यहां पर आने वाले हर आवेदक के साथ अधिकांश तौर पर बाहर बैठे किसी ने किसी दलाल का मोबाइल नंबर होता है और वह अपना समय बचाने के लिए रुपये खर्च करता है। दलाल इसी बात का फायदा उठाते हैं और अपनी दुकानों पर रखे फार्मों में आवेदक का ब्योरा भरकर उनसे अधिक रुपये लेकर उनका काम कराते हैं। गेट से अंदर आने वाले हर आवेदक के आगे एक दलाल फार्म लेकर चलता हुआ नजर आएगा। बुधवार को टीम ने जब पड़ताल की तो बाहर बैठे एक दलाल ने ऐसी बात कही कि विभाग की पोल खुल गई। ग्राहक बनकर बातचीत करने पर दलालों की बनाई व्यवस्था के बारे में जानकारी हुई।
दलालों से एक बातचीत के कुछ अंश:-
आवेदक:- भाई साहब, एक नया डीएल बनवाना है, बन जाएगा..
दलाल:- बन जाएगा, कहां के रहने वाले हो।
आवेदक:- महोबा का रहने वाला हूं, कौन-कौन सा कागज लगेगा..
दलाल:- केवल आधार कार्ड लगेगा और बन जाएगा।
आवेदक:- भैया, सुना है ऑनलाइन टेस्ट देना पड़ता है, डीएल के लिए...
दलाल:- हां, टेस्ट देने के बाद ही लर्निंग व परमानेंट डीएल बनते हैं।
आवेदक:- भैया, टेस्ट न देना पड़े, ऐसा जुगाड़ हो तो बताओ और खर्चा बताओ...
दलाल:- आधार कार्ड ले आना और पांच हजार रुपये, बाकी सब मैनेज हो जाएगा।
आवेदक:- टेस्ट मुझे ही देना पड़ेगा या कोई और देगा..
दलाल:- सब व्यवस्था हो जाएगी, पैसा लेकर आओ, फिर बताना।
आवेदक:- ऑनलाइन कहां से कराना होगा...
दलाल:- सारा काम यही से हो जाएगा, ऑनलाइन आवेदन भी कर दिया जाएगा।
आवेदक:- लर्निंग का पांच हजार और परमानेंट का कितना देना होगा...
दलाल:- यह पूरा पैसा है, 1,500 लर्निंग का और 3,500 परमानेंट का।
आवेदक:- ठीक हैं, पैसे की व्यवस्था करके आता हूं।
दलालों से दूसरी बातचीत के अंश:-
आवेदक- भाईसाहब, एक जानकारी मिल जाएगी...
दलाल- बताइए, क्या जानकारी चाहिए।
आवेदक- मैं गैर जनपद का रहने वाला हूं, डीएल बन जाएगा क्या...
दलाल:- आधार कार्ड में एड्रेस कहां का है...
आवेदक:- महोबा का नहीं है
दलाल:- महोबा का एक एड्रेस जरूरी है, जहां काम करते हो वहां से लेटर ले आओ
आवेदक:- लेटर मिल जाएगा, टेस्ट देना जरूरी होता है क्या...
दलाल:- जरूरी है लेकिन सारी व्यवस्था हो जाएगी, लेटर लेकर आओ पहले
आवेदक:- कितना खर्चा आ जाएगा सब मिलाकर।
दलाल:- लेटर ले लाओ तो पांच हजार रुपये में हो जाएगा, टेस्ट पास करा दिया जाएगा।
आवेदक:- ठीक है, पैसा व लेटर लेकर मिलते हैं।
शासन ने लाइसेंस बनवाने की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन की है। आवेदक कहीं से भी ऑनलाइन फार्म भरकर टेस्ट दे सकता है। उसे कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। परमानेंट लाइसेंस के लिए बायोमीट्रिक होती है। जिसके लिए आवेदक को आना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति कार्यालय के नाम पर सुविधा शुल्क मांगता है तो इसकी लिखित शिकायत करें, कार्रवाई की जाएगी। -दयाशंकर, एआरटीओ, महोबा।