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Mahoba News: इंटरनेट के 4,900 रुपये वापस पाने को आठ साल लड़ी कानूनी लड़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:30 AM IST
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महोबा। 4,900 रुपये लेकर इंटरनेट कनेक्शन न देने और रुपये न लौटने से परेशान दुकानदार ने अपना हक पाने के लिए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने आठ साल, तीन महीने तक इस मामले की सुनवाई के बाद दुकानदार को उसका हक दिलाते हुए न्याय किया। आयोग ने विपक्षी को पूरा रुपया सात प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ अदा करने के आदेश दिए हैं।
शहर के पुराने बस स्टैंड निवासी आशीष शिवहरे ने एक सर्विस सेंटर के नाम से प्रतिष्ठान संचालित किया। आशीष के अनुसार जून 2017 को भटीपुरा निवासी अमित कुमार साहू, प्रदीप कुमार धुरिया व यशोदा नगर निवासी सुशांत द्विवेदी संयुक्त रूप से उसकी दुकान पर पहुंचे थे। तीनों ने एक संयुक्त एग्रीमेंट दिखाते हुए बताया कि वह लोग इंटरनेट नेटवर्क सोल्यूशन नाम से ब्रांच चलाते हैं जिसका ऑफिस भटीपुरा में खुला है और उन्होंने आशीष को इंटरनेट सुविधा लेने के लिए प्रेरित किया। आशीष ने बताया कि वह मोबाइल सर्विस सेंटर की दुकान चलाता है तो उसे लगा कि इंटरनेट सेवा उसके व्यवसाय के लिए सबसे अहम है तब उसने सेवा लेने के लिए सहमति जताई।
विपक्षी अमित कुमार साहू दोबारा ने 27 जून 2017 को दुकान आकर 4,900 रुपये लिए और एक रसीद काटकर दी। यह रसीद सात महीने इंटरनेट सेवा के लिए ली गई फीस का था। रुपये लेने के बाद आशीष इंटरनेट सेवा लगने का इंतजार करता रहा लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी सेवा नहीं दी गई। कई बार कहने के बाद भी कोई जवाब न मिलने पर आशीष परेशान हो गया। कोई रास्ता न देख उसने अधिवक्ता के जरिए नोटिस भेजा लेकिन फिर से किसी ने जवाब नहीं दिया।
आशीष ने 25 नवंबर 2017 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दाखिल किया। इसमें परिवादी और विपक्षी ने अपने-अपने जवाब व सबूत प्रस्तुत किए। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रधान न्यायाधीश राघवेंद्र व न्यायाधीश विनोद कुमार तिवारी ने मामले में फैसला सुनाते हुए अमित कुमार साहू को दो महीने के अंदर 4,900 रुपये, सात प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ परिवादी आशीष शिवहरे को अदा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही मानसिक क्षति के एवज में तीन हजार रुपये, वाद व्यय के लिए दो हजार रुपये और व्यापारिक क्षति के एवज में पांच हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।
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शहर के पुराने बस स्टैंड निवासी आशीष शिवहरे ने एक सर्विस सेंटर के नाम से प्रतिष्ठान संचालित किया। आशीष के अनुसार जून 2017 को भटीपुरा निवासी अमित कुमार साहू, प्रदीप कुमार धुरिया व यशोदा नगर निवासी सुशांत द्विवेदी संयुक्त रूप से उसकी दुकान पर पहुंचे थे। तीनों ने एक संयुक्त एग्रीमेंट दिखाते हुए बताया कि वह लोग इंटरनेट नेटवर्क सोल्यूशन नाम से ब्रांच चलाते हैं जिसका ऑफिस भटीपुरा में खुला है और उन्होंने आशीष को इंटरनेट सुविधा लेने के लिए प्रेरित किया। आशीष ने बताया कि वह मोबाइल सर्विस सेंटर की दुकान चलाता है तो उसे लगा कि इंटरनेट सेवा उसके व्यवसाय के लिए सबसे अहम है तब उसने सेवा लेने के लिए सहमति जताई।
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विपक्षी अमित कुमार साहू दोबारा ने 27 जून 2017 को दुकान आकर 4,900 रुपये लिए और एक रसीद काटकर दी। यह रसीद सात महीने इंटरनेट सेवा के लिए ली गई फीस का था। रुपये लेने के बाद आशीष इंटरनेट सेवा लगने का इंतजार करता रहा लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी सेवा नहीं दी गई। कई बार कहने के बाद भी कोई जवाब न मिलने पर आशीष परेशान हो गया। कोई रास्ता न देख उसने अधिवक्ता के जरिए नोटिस भेजा लेकिन फिर से किसी ने जवाब नहीं दिया।
आशीष ने 25 नवंबर 2017 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दाखिल किया। इसमें परिवादी और विपक्षी ने अपने-अपने जवाब व सबूत प्रस्तुत किए। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रधान न्यायाधीश राघवेंद्र व न्यायाधीश विनोद कुमार तिवारी ने मामले में फैसला सुनाते हुए अमित कुमार साहू को दो महीने के अंदर 4,900 रुपये, सात प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ परिवादी आशीष शिवहरे को अदा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही मानसिक क्षति के एवज में तीन हजार रुपये, वाद व्यय के लिए दो हजार रुपये और व्यापारिक क्षति के एवज में पांच हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।