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Mahoba News: उमस से बीपी, माइग्रेन व डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़े
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महोबा। बारिश के बाद धूप और उमस बढ़ने से लोगों में बैक्टीरियल व वायरल रोगों के साथ चक्कर आने की समस्या भी बढ़ गई है। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में कई मरीज चक्कर की शिकायत लेकर पहुंचे। इस दौरान चिकित्सकों ने मरीजों को दवा के साथ बचाव के उपाय बताए।
जिला अस्पताल की ओपीडी खुलते ही मरीजों और तीमारदारों की भीड़ जुटी। पर्चा बनवाने से लेकर काउंटर से दवाएं लेने तक के लिए मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान ओपीडी में 800 से अधिक मरीजों ने उपचार कराया। इस समय सर्दी, खांसी, बुखार, पेटदर्द, उल्टी, दस्त के साथ ही उमस होने से बीपी, माइग्रेन व डिहाइड्रेशन के मरीज भी बढ़ा दिए हैं।
जिला अस्पताल के डॉ. गुलशेर अहमद ने बताया कि प्रतिदिन बीपी, माइग्रेन और डिहाइड्रेशन के 25 से 30 मरीज आ रहे हैं। एक सप्ताह में इस प्रकार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। बताया कि बारिश में वायरल संक्रमण कान के संतुलन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं, इससे चक्कर आते हैं। इसके अलावा मौसम में बदलाव, नमी व दवा के असर से कुछ लोगों का रक्तचाप कम हो जाता है।
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अधिक समय तक भूखे रहने से होता है माइग्रेन
जिला अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार भट्ट ने बताया कि माइग्रेन के मरीजों में बारोमेट्रिक प्रेशर ट्रिगर होता है जो सिर घुमा सकता है। माइग्रेन या निम्न रक्त शर्करा के मरीजों को लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए। खून की कमी वालों को भी मानसून में कमजोरी या चक्कर आते हैं।
यह दिक्कत होने पर चिकित्सक को दिखाएं
चिकित्सकों ने सलाह दी कि चक्कर के साथ बोलने में दिक्कत, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, बेहोशी, लगातार उल्टियां या तेज सिरदर्द हो तो बिना परामर्श दवा न लें। सुनने में कमी या कान में तेज आवाज के साथ चक्कर आने पर भी डॉक्टर को दिखाएं। उन्होंने लोगों से पर्याप्त पानी पीने, समय पर भोजन करने और अचानक खड़े होने से बचने का सुझाव दिया है।
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जिला अस्पताल की ओपीडी खुलते ही मरीजों और तीमारदारों की भीड़ जुटी। पर्चा बनवाने से लेकर काउंटर से दवाएं लेने तक के लिए मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान ओपीडी में 800 से अधिक मरीजों ने उपचार कराया। इस समय सर्दी, खांसी, बुखार, पेटदर्द, उल्टी, दस्त के साथ ही उमस होने से बीपी, माइग्रेन व डिहाइड्रेशन के मरीज भी बढ़ा दिए हैं।
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जिला अस्पताल के डॉ. गुलशेर अहमद ने बताया कि प्रतिदिन बीपी, माइग्रेन और डिहाइड्रेशन के 25 से 30 मरीज आ रहे हैं। एक सप्ताह में इस प्रकार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। बताया कि बारिश में वायरल संक्रमण कान के संतुलन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं, इससे चक्कर आते हैं। इसके अलावा मौसम में बदलाव, नमी व दवा के असर से कुछ लोगों का रक्तचाप कम हो जाता है।
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अधिक समय तक भूखे रहने से होता है माइग्रेन
जिला अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार भट्ट ने बताया कि माइग्रेन के मरीजों में बारोमेट्रिक प्रेशर ट्रिगर होता है जो सिर घुमा सकता है। माइग्रेन या निम्न रक्त शर्करा के मरीजों को लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए। खून की कमी वालों को भी मानसून में कमजोरी या चक्कर आते हैं।
यह दिक्कत होने पर चिकित्सक को दिखाएं
चिकित्सकों ने सलाह दी कि चक्कर के साथ बोलने में दिक्कत, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, बेहोशी, लगातार उल्टियां या तेज सिरदर्द हो तो बिना परामर्श दवा न लें। सुनने में कमी या कान में तेज आवाज के साथ चक्कर आने पर भी डॉक्टर को दिखाएं। उन्होंने लोगों से पर्याप्त पानी पीने, समय पर भोजन करने और अचानक खड़े होने से बचने का सुझाव दिया है।