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Mahoba News: पठारी धरती पर नहीं बरस रही मेघों की मेहरबानी
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फोटो 02 एमएएचपी 11 परिचय-बारिश न होने से अकबई गांव के तालाब में तलहटी पर पहुंचा पानी। संवाद
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महोबा। बुंदेलखंड की पठारी धरती में इस बार मानसून रूठा है। पिछले पांच वर्षों में इस वर्ष माह जुलाई में सबसे कम बारिश हुई है। इससे बुंदेली धरा पर एक बार फिर सूखे का साया मंडरा रहा है। भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए लोग बारिश की उम्मीद कर रहे हैं लेकिन मौसम साथ नहीं दे रहा है। बारिश न होने से तालाबों का पानी तलहटी पर नजर आ रहा है।
सावन माह में काले बादल आ रहे हैं लेकिन बारिश नहीं हो रही है। कहीं-कहीं बूंदाबांदी व कुछ देर की रिमझिम बारिश ही हो रही है। इससे उमस भरी गर्मी बरकरार है। मानसून सत्र का समय 15 जून से शुरू होता है जबकि महोबा में पिछले कुछ वर्षों से 18 जून तक बारिश का सिलसिला शुरू होता रहा है लेकिन इस बार अभी तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
हालात यह हैं कि मानसून सत्र के 47 दिन में अभी तक सिर्फ 160 एमएम ही बारिश हुई है जबकि पिछले वर्ष जुलाई माह तक 600 एमएम बारिश हुई थी। पिछले पांच दिन से आसमान में बादलों की आवाजाही हो रही है लेकिन कभी तेज हवाएं चलने तो कभी बूंदाबांदी के बाद आसमान साफ हो जाता है। इससे बुंदेली धरा बारिश के लिए तरस गई है।
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कम बारिश से फसलों पर पड़ेगा असर: कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वैज्ञानिक रजनीश मिश्रा का कहना है कि माह जून और जुलाई माह में होने वाली बारिश खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। कम बारिश होने से लौकी, करेला, तोरई, भिंडी व ग्वार फली जैसी हरी सब्जियों के साथ-साथ अरहर, मक्का और बाजरा जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
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सावन माह में काले बादल आ रहे हैं लेकिन बारिश नहीं हो रही है। कहीं-कहीं बूंदाबांदी व कुछ देर की रिमझिम बारिश ही हो रही है। इससे उमस भरी गर्मी बरकरार है। मानसून सत्र का समय 15 जून से शुरू होता है जबकि महोबा में पिछले कुछ वर्षों से 18 जून तक बारिश का सिलसिला शुरू होता रहा है लेकिन इस बार अभी तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
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हालात यह हैं कि मानसून सत्र के 47 दिन में अभी तक सिर्फ 160 एमएम ही बारिश हुई है जबकि पिछले वर्ष जुलाई माह तक 600 एमएम बारिश हुई थी। पिछले पांच दिन से आसमान में बादलों की आवाजाही हो रही है लेकिन कभी तेज हवाएं चलने तो कभी बूंदाबांदी के बाद आसमान साफ हो जाता है। इससे बुंदेली धरा बारिश के लिए तरस गई है।
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कम बारिश से फसलों पर पड़ेगा असर: कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वैज्ञानिक रजनीश मिश्रा का कहना है कि माह जून और जुलाई माह में होने वाली बारिश खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। कम बारिश होने से लौकी, करेला, तोरई, भिंडी व ग्वार फली जैसी हरी सब्जियों के साथ-साथ अरहर, मक्का और बाजरा जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।