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Mahoba News: जिला अस्पताल में बाहर की दवाएं लिखने पर हंगामा, कराई गईं वापस
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फोटो 15 एमएएचपी 05 परिचय-बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत पर इमरजेंसी वार्ड पहुंच तीमारदार के बया
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महोबा। जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। सोमवार को इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए कई मरीजों को 1,500 से दो हजार रुपये की बाहर की दवाएं लिखी गईं। इस पर तीमारदारों ने हंगामा किया। सीएमएस ने दवाएं वापस कराते हुए संबंधित डॉक्टर से स्पष्टीकरण तलब किया है।
जिला अस्पताल में सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध होने के बाद भी डॉक्टर कमीशनबाजी के चक्कर में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं मंगा रहे हैं। पूर्व में भी इस तरह की तमाम शिकायतें जिला प्रशासन से की गईं। एक माह पहले जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई थी जिन्हें अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए थे। सोमवार को इमरजेंसी वार्ड में इलाज कराने पहुंचे अधिकांश मरीजों को बाहर की दवाएं लिख दी गईं।
मुढ़ारी निवासी राजकुमार ने बताया कि उसके भाई अंकित ने सुबह जहर खा लिया था। जिला अस्पताल आने पर डॉक्टर ने 1,250 रुपये की दवा लिखी। किसी तरह रुपयों की व्यवस्था कर वह दवाएं लाया। बाद में शिकायत सीएमएस से की। तब दवाएं वापस कराते हुए रुपये लौटाए। भाई की हालत नाजुक होने पर उसे जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज झांसी ले जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉ. सीएस राजपूत से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को बाहर से लिखी गईं दवाएं वापस कराई गईं हैं।
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मरीज व तीमारदार ने बताई हकीकत
सतारी गांव निवासी अर्चना ने बताया कि घरेलू परेशानियों को लेकर पति भूपेंद्र ने जहर खा लिया था। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लाए। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने उन्हें 1,847 रुपये की दवा लिखी। किसी तरह रुपयों की व्यवस्था की और बाहर मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदीं। शिकायत करने पर सीएमएस ने दवाएं वापस कराईं और अस्पताल की दवाओं से इलाज किया गया।
जनपद बरेली निवासी मोहम्मद उवैस ने बताया कि शहर के बाहर चल रहे रिंग रोड के निर्माण में वह काम कर रहा था। उसे सांप ने बाएं हाथ में काट लिया। हालत बिगड़ने पर साथी उसे जिला अस्पताल लाया। इमरजेंसी में डॉक्टर ने 1,500 रुपये की दवा लिख दी। उसके पास 1,300 रुपये थे। रुपये की व्यवस्था कर दवा खरीदी। स्वस्थ होने पर घर जाने के लिए किराया भी नहीं है।
जिला अस्पताल में सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध होने के बाद भी डॉक्टर कमीशनबाजी के चक्कर में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं मंगा रहे हैं। पूर्व में भी इस तरह की तमाम शिकायतें जिला प्रशासन से की गईं। एक माह पहले जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई थी जिन्हें अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए थे। सोमवार को इमरजेंसी वार्ड में इलाज कराने पहुंचे अधिकांश मरीजों को बाहर की दवाएं लिख दी गईं।
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मुढ़ारी निवासी राजकुमार ने बताया कि उसके भाई अंकित ने सुबह जहर खा लिया था। जिला अस्पताल आने पर डॉक्टर ने 1,250 रुपये की दवा लिखी। किसी तरह रुपयों की व्यवस्था कर वह दवाएं लाया। बाद में शिकायत सीएमएस से की। तब दवाएं वापस कराते हुए रुपये लौटाए। भाई की हालत नाजुक होने पर उसे जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज झांसी ले जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉ. सीएस राजपूत से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को बाहर से लिखी गईं दवाएं वापस कराई गईं हैं।
मरीज व तीमारदार ने बताई हकीकत
सतारी गांव निवासी अर्चना ने बताया कि घरेलू परेशानियों को लेकर पति भूपेंद्र ने जहर खा लिया था। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लाए। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने उन्हें 1,847 रुपये की दवा लिखी। किसी तरह रुपयों की व्यवस्था की और बाहर मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदीं। शिकायत करने पर सीएमएस ने दवाएं वापस कराईं और अस्पताल की दवाओं से इलाज किया गया।
जनपद बरेली निवासी मोहम्मद उवैस ने बताया कि शहर के बाहर चल रहे रिंग रोड के निर्माण में वह काम कर रहा था। उसे सांप ने बाएं हाथ में काट लिया। हालत बिगड़ने पर साथी उसे जिला अस्पताल लाया। इमरजेंसी में डॉक्टर ने 1,500 रुपये की दवा लिख दी। उसके पास 1,300 रुपये थे। रुपये की व्यवस्था कर दवा खरीदी। स्वस्थ होने पर घर जाने के लिए किराया भी नहीं है।

फोटो 15 एमएएचपी 05 परिचय-बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत पर इमरजेंसी वार्ड पहुंच तीमारदार के बया

फोटो 15 एमएएचपी 05 परिचय-बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत पर इमरजेंसी वार्ड पहुंच तीमारदार के बया