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Mainpuri News: क्षय रोग से मुक्ति के मामले में जिला प्रथम

संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Updated Tue, 24 Mar 2026 02:45 AM IST
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District first in terms of freedom from tuberculosis
फोटो 22 जिला क्षयरोग अस्पताल। संवाद - फोटो : samvad
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मैनपुरी। क्षय रोग मुक्ति की ओर जिले के कदम तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। पिछले तीन साल में जिले ने बढ़ी उपलब्धि हासिल की है। जनपद में हर साल चार हजार से अधिक लोग टीबी से छुटकारा पा रहे हैं। जिला प्रशासन के सहयोग से क्षय रोग से मुक्ति दिलाने में मैनपुरी मंडल में पहले और प्रदेश में छठवें पायदान पर पहुंच गया है। जिले की 91 ग्राम पंचायत टीबी मुक्त हो चुकी हैं। सीएमओ डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि क्षयरोग अब लाइलाज नहीं है। समय से उपचार लेकर क्षयरोग से मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल के आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो जिले में हर साल चार हजार से अधिक लोग क्षयरोग की चपेट में आए हैं। इनमें 96 प्रतिशत लोग छह रोग से ठीक हुए हैं। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष वर्ष 2023 में जिले में 4210 मरीज क्षयरोग से पीड़ित थे इनमें से 4012 को क्षयरोग से मुक्ति मिली। वर्ष 2024 में जिले में 4402 क्षयरोगी थे इनमें से 4200 को क्षयरोग से मुक्ति मिली। वर्ष 2025 में जिले में अब तक 4650 क्षयरोगी मिल चुके हैं इनमें से 4464 मरीज टीबी मुक्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल में जिले 91 ग्राम पंचायत टीबी मुक्त घोषित हुई हैं। विश्व क्षयरोग दिवस पर आज इन ग्राम पंचायतों के प्रधानों को सम्मानित किया जाएगा। टीबी मुक्त भारत अभियान का असर जिले में नजर आ रहा है। इस अभियान के तहत पिछले तीन साल में 91 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की गई हैं। इनमें पांच ग्राम पंचायतों को गोल्ड मेडल की श्रेणी में रखा गया है। यहां पिछले तीन साल से एक भी मरीज नहीं मिला है। इनमें करहल विकास खंड की ग्राम पंचायत कंझरा, नगथरी, घिरोर की रंपुरा, सुल्तानगंज की पाल और मैनपुरी विकास खंड के नगला गडू ग्राम पंचायत को शामिल किया गया है। इसके साथ ही जिले में 29 ग्राम पंचायतों को सिल्वर मेडल की श्रेणी में रखा गया है यहां दो साल से कोई क्षयरोगी नहीं मिला है। जबकि जिले की 57 ग्राम पंचायतों को ब्रांज मेडल की श्रेणी में रखा गया है। यहां पिछले एक साल से एक भी क्षयरोगी नहीं मिला है। क्षय रोग से पीड़ित मरीजों को चार चरणों में विभाजित किया गया है। प्रथम स्तर के मरीजों को न्यू मरीज की श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी के मरीज को छह महीने तक ही दवा लेनी पड़ती है। इस श्रेणी में दवा लेने में लापरवाही करने वाला मरीज द्वितीय श्रेणी में पहुंचता है। जिसे पीटी कहा जाता है। इस श्रेणी के मरीज को आठ महीने लगातार दवा लेनी पड़ती है। यदि यहां भी मरीज लापरवाही करता है तो वे खतरनाक स्थित तृतीय श्रेणी में पहुंचता है जिसे एमडीआर कहते हैं। इस श्रेणी के मरीज को अस्पताल में भर्ती कराकर 24 महीने तक उपचार दिया जाता है। यदि मरीज यहां भी उपचार में लापरवाही करता है तो वह अंतिम श्रेणी में पहुंच जाता है। जिसे एक्सडीआर कहा जाता है। इस श्रेणी के मरीज को 26 महीने उपचार देने की व्यवस्था है। इस श्रेणी में लापरवाही पर मौत निश्चित है। पोषण योजना के तहत 500 रुपये की है व्यवस्था : जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आशुतोष कुमार बताते हैं कि क्षय रोगी को पंजीकरण कराने पर 500 रुपये प्रतिमाह निश्चय पोषण योजना के तहत प्रदान किए जाते हैं। यदि प्राइवेट पंजीकृत चिकित्सक किसी क्षय रोगी की अपने यहां स्क्रीनिंग करता है तो क्षय रोग विभाग में पंजीकरण कराने पर चिकित्सक को 500 और मरीज को निजी क्लीनिक पर उपचार के दौरान ठीक करने के बाद भी 500 रुपये देने की व्यवस्था है। क्षय रोगी किसी भी जांच केंद्र पर पहुंचकर निःशुल्क जांच करा सकता है।
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