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Mainpuri News: मोबाइल ने छिनी...फोटो स्टूडियो की रौनक
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फोटो 16 पलाश वर्मा, जिलाध्यक्ष, फोटोग्राफर एसोसिएशन।
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मैनपुरी। कभी फोटो खिंचाने के लिए स्टूडियो जाना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा हुआ करता था। परिवार के साथ फोटो खिंचवाना हो या पहचान पत्र के लिए तस्वीर चाहिए हो, लोग स्टूडियो पहुंचते थे। स्मार्टफोन के बढ़ते चलन और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार ने फोटोग्राफी को मोबाइल में कैद कर दिया है। पिछले पांच वर्षों में स्टूडियो की संख्या घटकर आधी रह गई है।
फोटाग्राफी कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार पांच साल पहले तक शहर में करीब 20 से 25 फोटो स्टूडियो संचालित होते थे। अब इनकी संख्या घटकर करीब 12 से 15 रह गई है। मोबाइल फोन के कैमरे की बढ़ती गुणवत्ता के कारण अब लोग सामान्य फोटो खिंचाने के लिए स्टूडियो नहीं जाते हैं। घर, स्कूल, कॉलेज, घूमने-फिरने और छोटे आयोजनों की तस्वीरें लोग मोबाइल से ही खींच लेते हैं।
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पांच साल में बदली तस्वीर
मोबाइल कैमरे और ऑनलाइन सेवाओं ने जहां आम लोगों के लिए तस्वीर खींचना और साझा करना आसान बनाया है। वहीं, पारंपरिक फोटो स्टूडियो के सामने कारोबार बचाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है। अब फोटोग्राफी का बाजार सामान्य फोटो से आगे बढ़कर शादी, आयोजन, क्रिएटिव शूट और डिजिटल सेवाओं पर अधिक निर्भर होता जा रहा है।
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मोबाइल के बढ़ते चलन से फोटोग्राफी कारोबार प्रभावित हो रहा है। पांच साल में शहर में स्टूडियो की संख्या में गिरावट ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब व्यक्ति शादी-विवाह, सगाई, जन्मदिन आदि मौकों पर ही फोटोग्राफी कराना पसंद करता है।
- पलाश वर्मा, जिलाध्यक्ष, फोटोग्राफर एसोसिएशन।
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पहले सामान्य फोटो खिंचाने के लिए भी रोज ग्राहक आते थे। अब मोबाइल कैमरे की वजह से यह काम काफी कम हो गया है। स्टूडियो का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
- पल्लव जैन, फोटो स्टूडियो संचालक।
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फोटाग्राफी कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार पांच साल पहले तक शहर में करीब 20 से 25 फोटो स्टूडियो संचालित होते थे। अब इनकी संख्या घटकर करीब 12 से 15 रह गई है। मोबाइल फोन के कैमरे की बढ़ती गुणवत्ता के कारण अब लोग सामान्य फोटो खिंचाने के लिए स्टूडियो नहीं जाते हैं। घर, स्कूल, कॉलेज, घूमने-फिरने और छोटे आयोजनों की तस्वीरें लोग मोबाइल से ही खींच लेते हैं।
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पांच साल में बदली तस्वीर
मोबाइल कैमरे और ऑनलाइन सेवाओं ने जहां आम लोगों के लिए तस्वीर खींचना और साझा करना आसान बनाया है। वहीं, पारंपरिक फोटो स्टूडियो के सामने कारोबार बचाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है। अब फोटोग्राफी का बाजार सामान्य फोटो से आगे बढ़कर शादी, आयोजन, क्रिएटिव शूट और डिजिटल सेवाओं पर अधिक निर्भर होता जा रहा है।
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मोबाइल के बढ़ते चलन से फोटोग्राफी कारोबार प्रभावित हो रहा है। पांच साल में शहर में स्टूडियो की संख्या में गिरावट ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब व्यक्ति शादी-विवाह, सगाई, जन्मदिन आदि मौकों पर ही फोटोग्राफी कराना पसंद करता है।
- पलाश वर्मा, जिलाध्यक्ष, फोटोग्राफर एसोसिएशन।
पहले सामान्य फोटो खिंचाने के लिए भी रोज ग्राहक आते थे। अब मोबाइल कैमरे की वजह से यह काम काफी कम हो गया है। स्टूडियो का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
- पल्लव जैन, फोटो स्टूडियो संचालक।

फोटो 16 पलाश वर्मा, जिलाध्यक्ष, फोटोग्राफर एसोसिएशन।

फोटो 16 पलाश वर्मा, जिलाध्यक्ष, फोटोग्राफर एसोसिएशन।