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Mainpuri News: अपने ही दे रहे घाव, दर्द से सिसक रहा बचपन

संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Updated Wed, 03 Jun 2026 11:58 PM IST
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Wounds inflicted by oneself, childhood crying out in pain
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मैनपुरी। जिस मासूमियत पर दुनिया को नाज होता है, उसी के कोमल कंधों पर दरिंदगी के कितने पहर हर रोज ढाए जा रहे हैं। यह उस मुंहबोले अपने का चेहरा है जिसे बच्चे ने कभी भगवान की तरह पूजा था। बच्चों की बेबसी और अकेलेपन को शिकार बनाकर, उन्हीं के कुनबे और कॉलोनी के लोग उनके जिस्म और जान के दुश्मन बन बैठे हैं। ये चौंकाने वाली सच्चाई हाल के मामलों ने साबित कर दी है। जिनके हाथ को थामकर बच्चा सड़क पार करना सीखता है, उसी ने उसका गला घोंटा है।




केस 1: टॉफी का लालच देने वाला दूर का रिश्तेदार

औंछा क्षेत्र में एक मासूम किशोरी, जिसकी दुनिया ही अपने सीमित मानसिक संसार में कैद थी। उसके दूर के रिश्तेदार ने टॉफी के पैसे देकर वह उसका विश्वास जीत रहा था। एक दिन उसके साथ दुष्कर्म किया। जब मासूम बीमार पड़ी, डॉक्टर के पास ले जाने पर पता चला, वह मां बनने वाली थी। 5 महीने की गर्भवती। पिता रो पड़े, बेटी को क्या पता था भरोसा क्या होता है और धोखा क्या है। वो तो बस टॉफी खुशी से खा लेती थी।
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केस 2: मुंडन की खुशिया, पड़ोसी बना शैतान

दन्नाहार थाना क्षेत्र। घर में मुंडन की रौनक थी। सारे अपने बाहर थे। 8 साल की बच्ची ने मां से कहा कि मैं घर पर हूं, तुम जाओ, लेकिन जिसे वह भैया बुलाती थी, 16 साल का पड़ोसी। वह सामान लाने का बहाना बना उसकी जान लेने आ गया। जब मां लौटी, बच्ची थरथरा रही थी। उसकी आंखों ने सब कुछ बयां कर दिया।
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केस 3: शराब के पैसे के लिए पिता ने बेटे को छत से फेंका

बिछवां के चिटौआ गांव का वो मंजर आज भी दहला देता है। एक पिता जिसके होने का मतलब ढाई साल के मासूम के लिए सुरक्षा होता है। वही पिता, उस छोटे से बेटे को शराब के पैसे न मिलने पर छत से धकेल देता है। बच्चा नीचे गिरा तो मां की चीख से आसमान तक फट गया। पड़ोसी दौड़े लेकिन तब तक उसने अपने पिता की मौत का सबब देख लिया था। अस्पताल के रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। एक मां की गोद खाली रह गई और पिता शराब के नशे में झूम रहा था, इस बात पर कि बस पैसे नहीं थे शराब के।



बच्चों को दें समय, उनसे करें बात

आजकल अभिभावक बच्चों को समय नहीं दे पाते, जिससे वे अकेलापन महसूस करने लगते हैं। घर आने-जाने वाले लोग इसी अकेलेपन का फायदा उठाकर उनसे नजदीकियां बढ़ाते हैं और फिर उन्हें अपना शिकार बनाते हैं। परिजन बच्चों के व्यवहार में आए बदलाव को नजरअंदाज न करें। उनसे रोज बात करें, परेशानी पूछें। इससे उनका अकेलापन दूर होगा और वह किसी भी गलत इरादे के बारे में आपको बता सकेंगे।

-आराधना गुप्ता, वरिष्ठ काउंसलर, रोगी कल्याण समिति
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