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UP: होर्डिंग और एलईडी के फर्जी बिल, मथुरा में वीवीआईपी मूवमेंट के नाम पर लाखों का घपला; दर्ज हुई FIR

संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 05 Feb 2026 01:06 PM IST
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सार

मथुरा में वीवीआईपी मूवमेंट के नाम पर बड़ा घोटाला कर दिया गया। फर्जी बिल और जिला सूचना अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान कर लिया गया। मामले में  कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।

Millions of rupees scammed in promoting VVIP movements
FIR Demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जिले में होर्डिंग व एलईडी स्क्रीन लगाने के नाम पर जिला सूचना कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर ने फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपये का गबन कर लिया। प्रारंभिक जांच में ऐसे पांच बिल पकड़े गए हैं, जिन पर फर्जी तरीके से जिला सूचना अधिकारी के हस्ताक्षर करके भुगतान कराया गया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है। जिला सूचना अधिकारी ने कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब दो फरवरी को लखनऊ से सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने मथुरा के जिला सूचना अधिकारी प्रशांत कुमार सिचारी को एक फर्म के बिल व्हाट्सएप पर भेजे। प्रशांत कुमार ने फर्म के बिल देखे तो दंग रह गए। बिल पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे और डिस्पेच रजिस्टर में भी उस पत्रांक का कोई उल्लेख नहीं था। संदेह होने पर प्रशांत ने पंजीकृत फर्मों श्रीमत एवरग्रीन एडवरटाइजिंग, देवांश एसोसिएट्स समेत अन्य फर्मों से भी संपर्क कर बिल मंगाए।
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इसमें तीन बड़ी फर्मों के 2021 से अब तक ऐसे पांच बिल मिले, जिन पर फर्जी तरीके से भुगतान प्राप्त किया गया था। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर ऑपरेटर नारायण सिंह से मामले की पूछताछ की। प्रशांत ने बताया कि नारायण सिंह ने स्वीकारा कि उसने स्वयं ही फर्जी हस्ताक्षर और मुहर लगाकर ये बिल जारी किए थे। जिला सूचना अधिकारी ने बताया कि नारायण सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले की जांच जारी है, जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

ऐसे किया खेल
जिले में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल समेत अन्य राजनेताओं के आगमन पर जिलेभर में प्रचार-प्रसार के लिए होर्डिंग व एलईडी लगाई जाती हैं। इसकी जिम्मेदारी जिला सूचना विभाग की होती है। विभाग पंजीकृत फर्मों को ही जिले के विभिन्न स्थानों पर एलईडी स्क्रीन व होर्डिंग लगाने के लिए टेंडर देता है। इसके भुगतान के लिए फर्मों को बिल देना होता है। ऐसे पांच बिलों में घोटाला पकड़ा गया है।
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