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Mathura News: लापरवाही पड़ सकती है भारी
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जिला अस्पताल की पर्चा खिड़की पर लगी मरीज और तीमारदारों की लाइन।
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मथुरा। भीषण सर्दी और शुष्क हवाओं ने अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात यह है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक अस्थमा के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें बच्च और बुजुर्गों के साथ-साथ युवा भी शामिल हैं। बीते एक सप्ताह में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि सर्दी और शुष्क हवा सीधे फेफड़ों पर असर डाल रही है, जिससे सांस की नलियों में सूजन और सिकुड़न बढ़ रही है। इसके चलते मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, बार-बार खांसी, सीने में जकड़न और घबराहट जैसी समस्याएं हो रही हैं। खासतौर पर सुबह और देर शाम मरीजों की हालत ज्यादा बिगड़ रही है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रवि माहेश्वरी ने बताया कि सर्द मौसम में अस्थमा के मरीज जरा-सी भी लापरवाही बरतते हैं तो अटैक का खतरा बढ़ सकता है। कई मरीज ऐसे भी आ रहे हैं, जिन्होंने सर्दी बढ़ने के बावजूद दवाइयों का नियमित सेवन नहीं किया। इसके कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिल रहा है। कई मामलों में मरीजों को ऑक्सीजन की भी जरूरत पड़ रही है।
चिकित्सकों ने परिजनों से अपील की है कि लक्षण बढ़ने पर घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। तत्काल अस्पताल पहुंचें। अस्थमा के मरीज ठंडी हवाओं से खुद को बचाएं। सुबह-शाम घर से निकलते समय मुंह और नाक को ढककर रखें। नियमित रूप से इनहेलर और दवाइयों का प्रयोग करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें। साथ ही धूल, धुआं, परागकण और प्रदूषण से दूरी बनाए रखें। इधर, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने के आसार जताए हैं। यदि ऐसा होता है तो अस्थमा मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि सर्दी और शुष्क हवा सीधे फेफड़ों पर असर डाल रही है, जिससे सांस की नलियों में सूजन और सिकुड़न बढ़ रही है। इसके चलते मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, बार-बार खांसी, सीने में जकड़न और घबराहट जैसी समस्याएं हो रही हैं। खासतौर पर सुबह और देर शाम मरीजों की हालत ज्यादा बिगड़ रही है।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रवि माहेश्वरी ने बताया कि सर्द मौसम में अस्थमा के मरीज जरा-सी भी लापरवाही बरतते हैं तो अटैक का खतरा बढ़ सकता है। कई मरीज ऐसे भी आ रहे हैं, जिन्होंने सर्दी बढ़ने के बावजूद दवाइयों का नियमित सेवन नहीं किया। इसके कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिल रहा है। कई मामलों में मरीजों को ऑक्सीजन की भी जरूरत पड़ रही है।
चिकित्सकों ने परिजनों से अपील की है कि लक्षण बढ़ने पर घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। तत्काल अस्पताल पहुंचें। अस्थमा के मरीज ठंडी हवाओं से खुद को बचाएं। सुबह-शाम घर से निकलते समय मुंह और नाक को ढककर रखें। नियमित रूप से इनहेलर और दवाइयों का प्रयोग करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें। साथ ही धूल, धुआं, परागकण और प्रदूषण से दूरी बनाए रखें। इधर, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने के आसार जताए हैं। यदि ऐसा होता है तो अस्थमा मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।