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Mau News: हाईवे पर हादसे नहीं रूक रहे और अस्पतालों की इमरजेंसी में डॉक्टर, पिछले साल 350 से अधिक हादसों में 188 लोगों की मौत
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जिले में कोहरे के कारण हाईवे पर हादसे लगातार हो रहे हैं। घटनाएं रात या भोर के समय ही अधिकांश हो रही हैं। कुछ दिन पहले ही डीएम ने हाईवे के किनारे के अस्पतालों में सभी सुविधाएं रखने और 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए थे।
सोमवार को पड़ताल में हाईवे किनारे स्थित सीएचसी में इमरजेंसी में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी नहीं मिले। वर्ष 2025 में 350 से अधिक सड़क हादसों में 188 लोगों ने जान गंवाई है। इनमें 80 फीसदी दुर्घटनाएं हाईवे और फोरलेन पर हुई हैं।
सोमवार की देर शाम डॉक्टरों की सक्रियता की जांच के लिए तीन अलग- अलग हाईवे स्थित चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की इमरजेंसी की पड़ताल की गई। इस दौरान किसी भी अस्पताल पर न ही इमरजेंसी में डॉक्टर मिला न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी।
इसमें एक अस्पताल के पास ही दो दिन पहले कोहरे के चलते पांच से ज्यादा वाहन के आपस में टकरा ने से पांच लोग घायल हो गए थे। सबसे पहले टीम आजमगढ़ मऊ मार्ग के मुहम्मदाबाद गोहाना सीएचसी पर सोमवार की देर शाम 8.30 बजे पहुंची।
यहां टीम को इमरजेंसी वार्ड का दरवाजा बंद मिला, टीम के आने की सूचना पर दस मिनट बाद एक स्वास्थ्यकर्मी पहुंच कर दरवाजा खोला। करीब 20 मिनट टीम रही लेकिन यहां न तो डॉक्टर दिखा न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी।
इसी तरह से टीम मऊ बलिया मार्ग स्थित रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रात 9.30 पर पहुंची। यहां टीम 9.45 तक रही लेकिन इस दौरान यहां भी कोई डॉक्टर या कोई स्वास्थ्यकर्मी नहीं मिला।
इसी तरह से गोरखपुर वाराणसी मार्ग स्थित कोपागंज सीएचसी पर टीम साढ़े नौ बजे पहुंची। यहां इमरजेंसी वार्ड खाली मिला, पूछने पर पता चला कि वार्डबॉय है जो कि बगल के कमरे में सो रहे हैं मरीज के आने पर वो जग जाएंगे।
टीम ने इसी हाईवे पर दोहरीघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रात नौ बजे पहुंची, यहां भी इमरजेंसी वार्ड सूना मिला। वर्ष 2021 में 264 दुर्घटनाओं में 131 की मौत हुई और 154 घायल हुए थे। 2022 में 304 दुर्घटनाओं में 157 की मौत और 204 घायल हुए थे।
वर्ष 2023 में 290 दुर्घटनाओं में 149 की मौत और 222 घायल, वर्ष 2024 में 330 दुर्घटनाओं में 170 की मौत और 229 घायल हुए। वर्ष 2025 में 188 लोगों ने जान गंवाई है। इनमें 80 फीसदी दुर्घटनाएं हाईवे और फोरलेन पर हुई हैं।
लगातार हाईवे पर हो रहे हैं हादसे
जिले के गोरखपुर वाराणसी फोरलेन पर बीते दिनों कोहरे के चलते दो जगहों पर आठ वाहनों में टक्कर हो गई थी, जिसमें आठ लोग घायल हो गए थे।उधर हादसे के बाद घायलों को नजदीकी कोपागंज सीएचसी पर पहुंचाया गया। चिकित्सक ने गोल्डन आवर में इलाज करने की जगह जिला अस्पताल रेफर कर दिया।इसी तरह मऊ वाराणसी मार्ग के बुढ़वा गोदाम के पास खड़े ट्रेलर में बाइक टकरा गई।हादसे के बाद बाइक चालक और सवार घायल की मौत हो गई थी।
तीन मुख्य मार्ग पर छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
जनपद से तीन हाईवे गुजरते हैं, इसमें एक गोरखपुर वाराणसी मार्ग है। इसके अलावा आजमगढ़ मऊ मार्ग और बलिया मऊ मार्ग है। इन तीनों मुख्य मार्ग पर आए दिन इनपर सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। समय से इलाज नहीं मिलने के कारण लोगों की मौत हो जाती है। बेहतर इलाज के लिए हाईवे किनारे 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। दो तीन को छोड़ दें तो अन्य पर स्वास्थ्य सुविधा पीएचसी जितनी भी नहीं है। रात में डॉक्टर तक नहीं रुकते। हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर लाए जाने वालों को स्वास्थ्यकर्मी जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।
इमरजेंसी वार्ड से गायब रहना बेहद लापरवाही वाला मामला है। इसकी जांच कराई जाएंगी और दोषी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. संजय गुप्ता, सीएमओ, मऊ
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सोमवार को पड़ताल में हाईवे किनारे स्थित सीएचसी में इमरजेंसी में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी नहीं मिले। वर्ष 2025 में 350 से अधिक सड़क हादसों में 188 लोगों ने जान गंवाई है। इनमें 80 फीसदी दुर्घटनाएं हाईवे और फोरलेन पर हुई हैं।
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सोमवार की देर शाम डॉक्टरों की सक्रियता की जांच के लिए तीन अलग- अलग हाईवे स्थित चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की इमरजेंसी की पड़ताल की गई। इस दौरान किसी भी अस्पताल पर न ही इमरजेंसी में डॉक्टर मिला न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी।
इसमें एक अस्पताल के पास ही दो दिन पहले कोहरे के चलते पांच से ज्यादा वाहन के आपस में टकरा ने से पांच लोग घायल हो गए थे। सबसे पहले टीम आजमगढ़ मऊ मार्ग के मुहम्मदाबाद गोहाना सीएचसी पर सोमवार की देर शाम 8.30 बजे पहुंची।
यहां टीम को इमरजेंसी वार्ड का दरवाजा बंद मिला, टीम के आने की सूचना पर दस मिनट बाद एक स्वास्थ्यकर्मी पहुंच कर दरवाजा खोला। करीब 20 मिनट टीम रही लेकिन यहां न तो डॉक्टर दिखा न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी।
इसी तरह से टीम मऊ बलिया मार्ग स्थित रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रात 9.30 पर पहुंची। यहां टीम 9.45 तक रही लेकिन इस दौरान यहां भी कोई डॉक्टर या कोई स्वास्थ्यकर्मी नहीं मिला।
इसी तरह से गोरखपुर वाराणसी मार्ग स्थित कोपागंज सीएचसी पर टीम साढ़े नौ बजे पहुंची। यहां इमरजेंसी वार्ड खाली मिला, पूछने पर पता चला कि वार्डबॉय है जो कि बगल के कमरे में सो रहे हैं मरीज के आने पर वो जग जाएंगे।
टीम ने इसी हाईवे पर दोहरीघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रात नौ बजे पहुंची, यहां भी इमरजेंसी वार्ड सूना मिला। वर्ष 2021 में 264 दुर्घटनाओं में 131 की मौत हुई और 154 घायल हुए थे। 2022 में 304 दुर्घटनाओं में 157 की मौत और 204 घायल हुए थे।
वर्ष 2023 में 290 दुर्घटनाओं में 149 की मौत और 222 घायल, वर्ष 2024 में 330 दुर्घटनाओं में 170 की मौत और 229 घायल हुए। वर्ष 2025 में 188 लोगों ने जान गंवाई है। इनमें 80 फीसदी दुर्घटनाएं हाईवे और फोरलेन पर हुई हैं।
लगातार हाईवे पर हो रहे हैं हादसे
जिले के गोरखपुर वाराणसी फोरलेन पर बीते दिनों कोहरे के चलते दो जगहों पर आठ वाहनों में टक्कर हो गई थी, जिसमें आठ लोग घायल हो गए थे।उधर हादसे के बाद घायलों को नजदीकी कोपागंज सीएचसी पर पहुंचाया गया। चिकित्सक ने गोल्डन आवर में इलाज करने की जगह जिला अस्पताल रेफर कर दिया।इसी तरह मऊ वाराणसी मार्ग के बुढ़वा गोदाम के पास खड़े ट्रेलर में बाइक टकरा गई।हादसे के बाद बाइक चालक और सवार घायल की मौत हो गई थी।
तीन मुख्य मार्ग पर छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
जनपद से तीन हाईवे गुजरते हैं, इसमें एक गोरखपुर वाराणसी मार्ग है। इसके अलावा आजमगढ़ मऊ मार्ग और बलिया मऊ मार्ग है। इन तीनों मुख्य मार्ग पर आए दिन इनपर सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। समय से इलाज नहीं मिलने के कारण लोगों की मौत हो जाती है। बेहतर इलाज के लिए हाईवे किनारे 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। दो तीन को छोड़ दें तो अन्य पर स्वास्थ्य सुविधा पीएचसी जितनी भी नहीं है। रात में डॉक्टर तक नहीं रुकते। हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर लाए जाने वालों को स्वास्थ्यकर्मी जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।
इमरजेंसी वार्ड से गायब रहना बेहद लापरवाही वाला मामला है। इसकी जांच कराई जाएंगी और दोषी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. संजय गुप्ता, सीएमओ, मऊ
