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UP: दस साल में खेती का रकबा 55 फीसदी घटा, भुगतान में देरी और बढ़ती लागत से छोड़ रहे खेती; परेशानी

अमर उजाला नेटवर्क, मऊ। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 22 Jan 2026 02:04 PM IST
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सार

Mau News: आंकड़ों पर देखे तो बीते दस वर्ष में केवल 2012/13 में किसानों में गन्ना की फसल को लेकर रुचि देखी गई, इससे उस साल गन्ना का रकबा 11459 पर पहुंच गया था। जबकि 2011/12 में 9324 हेक्टेयर था।

Agricultural land area decreased in ten years farmers abandoning farming delayed payments and rising costs
घोसी चीनी मील के बाहर खड़ी गन्ना लदी ट्रैक्टर। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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UP News: गन्ना सबका ताऊ है, नकदी और कमाऊ है’ कुछ वर्षों पहले तक यह स्लोगन चीनी मिल द्वारा दीवारों पर स्लोगन लिखवाती थी। किसान भी इस बात को मानते थे। कारण यह था कि गन्ने की फसल में कीट, बीमारी कम लगती थी, मौसम का भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था और भुगतान भी जल्द मिल जाता था। समय बदला, अब भुगतान में देरी के कारण 10 हजार किसानों को गन्ने की खेती से मोहभंग हो गया है। 

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यही वजह है कि 10 वर्ष में गन्ने के रकबे में 55 फीसदी कमी आई है। इसका असर वर्तमान में घोसी मिल के पेराई सत्र में दिख रहा है। 18 लाख क्विंटल लक्ष्य की तुलना में अभी 45 दिन बीतने के बाद 18 लाख क्विंटल की तुलना में अब तक महज 7 लाख क्विटंल ही गन्ना क्रय हो सका है। अब तक किसी भी किसानों को गन्ना का भुगतान तक नहीं किया गया हैं। 
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चीनी मिल अधिकतम फरवरी के अंतिम या मार्च के दूसरे सप्ताह तक ही चलेगी। जबकि चीनी मिल के पेराई सत्र का शुभारंभ 4 दिसंबर को हुआ था। साल 2015 में जिले में गन्ना का रकबा 19 हजार 641 हेक्टेयर था जो वर्तमान में 7 हजार 694 हेक्टेयर पर जा सिमटा है। 

11 क्रय केंद्र सठियांव से संबद्ध
बताते चले कि गत वर्ष चीनी मिल के 11 क्रय केंद्रों को मध्य सत्र में सठियांव से संबद्ध कर दिया गया था। ऐसे में चीनी मिल का गन्ना क्षेत्रफल ही नहीं घटा बल्कि खरीद भी घटकर 14 लाख क्विंटल हो गई। इस वर्ष सठियांव को आवंटित 11 क्रय केंद्रों में से तीन प्रमुख क्रय केंद्र करखिया देवारा, खोजौली और लाटघाट वापस मिल गए हैं। उधर क्रय किए गए गन्ना का मूल्य 14 करोड़ है, लेकिन भुगतान जीरो है। जबकि चीनी मिल ने अब तक 45940 कुंतल चीनी का उत्पादन भी कर लिया है।

बड़ी समस्या है घटता गन्ना क्षेत्रफल
मऊ में चीनी मिल की पुरानी तकनीक आधारित जर्जर मशीनों की समस्या के साथ ही सबसे बड़ी समस्या किसानों का गन्ना की खेती की से विमुख होना है। तमाम कवायद के बाद भी पूर्व के गन्ना किसान दोबारा गन्ना की बोआई करने से दूरी बनाए हैं।

Agricultural land area decreased in ten years farmers abandoning farming delayed payments and rising costs
मऊ में चीनी मील। - फोटो : संवाद

रेड रॉट ने तोड़ दी किसानों की कमर
रेड रॉट सड़न रोग ने इस वर्ष किसानों की कमर तोड़ दी है। यह रोग जिस खेत में लग गया उसका पूरा गन्ना ही सड़ कर गिर गया। खास बात यह रही कि तमाम दवाओं का प्रयोग करने के बाद भी इस रोग का प्रकोप कम नहीं हो सका। चीनी मिल अधिकारी जिस ज्यादा चीनी परता वाले गन्ने को बोने पर जोर देते हैं, उसमें यह रोग ज्यादा लगा। गन्ने का रकबा घटने का यह भी एक प्रमुख कारण रहा।

गन्ने का भुगतान में और मजदूरी लागत ज्यादा होने से किसानों का खेती से मोहभंग हो रहा है। बीते साल आठ से दस बीघा गन्ने की खेती होती थी। जबकि इस साल महज पांच बीघा ही बोआई की गई है। - आलोक तिवारी, एकौना

गन्ने की बोआई का रकबा हर साल कम हो रहा है। इसके पीछे कई कारण है, पहला मजदूरी और दूसरा समय से किसान को भुगतान नहीं होना है। किसान घर पर गन्ने की पेराई कर उसका गुड़ बनाकर बेच रहे है। इससे मुनाफा है। - कृष्णकांत चौबे, चौबेपुर

मिल अधिकारी खरीदते समय गन्ने को खराब बता कर परेशान करते हैं और भुगतान के लिए चुप्पी साध कर बैठ जाते हैं। गन्ने का रकबा घटने पर मिलें ही बंद होने लगेंगी, तब मिल मालिकों की आंख खुलेगी। - अंजनी सिंह, ताजोपुर

पहले दस बीघा गन्ने की खेती होती है, अब रकबा सिमट चार बीघा हो गया है। मिल में गन्ने की भुगतान में देरी हाने से गिल पर गन्ना भेजना बंद कर दिया है। छुट्टा मवेशियों की परेशानी भी एक कारण है। - राकेश सिंह, कुशमौर

आंकड़ों की नजर में जाने कैसे हर साल कम होती गई गन्ना का क्षेत्रफल
वर्ष क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

  • 2014-15 10984
  • 2015-16 19641
  • 2016-17 8406
  • 2017-18 9564
  • 2018-19 9857
  • 2019-20 10546
  • 2020-21 5349.34
  • 2021-22 7131.36
  • 2022-23 5397.448
  • 2023-24 7160
  • 2024-25 7694

चीनी मिल हर हाल में पेराई लक्ष्य पूरा करेगी। किसानों से संपर्क किया जा रहा है। किसानों को निष्पक्षता के साथ पर्ची निर्गत हो रही है। गन्ना मूल्य के भुगतान की तैयारी चल रही है। शीघ्र ही किसानों के खाते में धनराशि प्रेषित होगी। - महेंद्र प्रसाद, प्रधान प्रबंधक, चीनी मिल घोसी

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