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Mau News: 2.85 लाख में दी डी-फार्मा की फर्जी डिग्री प्रबंधक, प्रधानाचार्य पर प्राथमिकी दर्ज
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डी-फार्मा की फर्जी डिग्री देने के मामले में शहर कोतवाली पुलिस ने मंगलवार की रात सूर्या स्कूल ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज भुजौटी के प्रबंधक अवनीश पांडेय और प्रधानाचार्य मयंक तिवारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है।
गाजीपुर जिले के मरदह थाना क्षेत्र के घरिहा निवासी राकेश कुमार यादव की शिकायत व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर यह कार्रवाई हुई है। युवक ने डिग्री के नाम पर 2.85 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है।
इस डिग्री पर वर्ष 2021 में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था। डिग्री फर्जी होने पर उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की तहरीर पर उसके साथ इस कॉलेज से डिग्री लेने वाले 136 छात्रों पर लखनऊ के गाजीपुर थाने की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, राकेश कुमार यादव की वर्ष 2015 में सरायलखंसी थाना क्षेत्र के सिविल लाइन भुजौटी निवासी अवनीश पांडेय से मुलाकात हुई। उसने बताया कि वह भुजौटी स्थित सूर्या स्कूल आफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज का प्रबंधक है।
कहा कि डी-फार्मा का कोर्स कर लीजिए। यह दो साल का कोर्स है। इससे देश में कहीं भी मेडिकल स्टोर या अस्पताल में काम कर सकते हैं। उसकी बातों पर भरोसा करके वह कॉलेज गया। वहां भुजौटी निवासी प्रधानाचार्य मयंक तिवारी से मुलाकात हुई।
डिग्री के लिए दो साल की फीस 2.10 लाख रुपये बताई गई। एडमिशन फीस समेत दो साल में उन्होंने कुल 2.35 लाख रुपये ले लिए। कुछ रुपये की रसीद तत्काल दी और कुछ की बाद में देने की बात कही। वर्ष 2017 में कोर्स पूरा हो गया और वर्ष 2018 में मार्कशीट व सर्टिफिकेट उपलब्ध करा दिया।
बताया कि डी-फार्मा की डिग्री के बाद लखनऊ में रजिस्ट्रेशन होता है, जिसके लिए 50 हजार रुपये फीस लगती है। आप जमा कर दीजिए, मैं रजिस्ट्रेशन करा दूंगा। उनपर भरोसा करके रजिस्ट्रेशन के लिए 50 हजार रुपये दे दिए। बाद में लखनऊ फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया की ओर से बताया गया कि आवेदन में संलग्न डी- फार्मा के अभिलेख फर्जी हैं। 31 जनवरी 2021 को उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की ओर से लखनऊ के गाजीपुर थाने में राकेश के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने का पत्र मिला। इस मामले में कॉलेज से फर्जी डिग्री प्राप्त करने वाले 136 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था।
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गाजीपुर जिले के मरदह थाना क्षेत्र के घरिहा निवासी राकेश कुमार यादव की शिकायत व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर यह कार्रवाई हुई है। युवक ने डिग्री के नाम पर 2.85 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है।
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इस डिग्री पर वर्ष 2021 में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था। डिग्री फर्जी होने पर उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की तहरीर पर उसके साथ इस कॉलेज से डिग्री लेने वाले 136 छात्रों पर लखनऊ के गाजीपुर थाने की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, राकेश कुमार यादव की वर्ष 2015 में सरायलखंसी थाना क्षेत्र के सिविल लाइन भुजौटी निवासी अवनीश पांडेय से मुलाकात हुई। उसने बताया कि वह भुजौटी स्थित सूर्या स्कूल आफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज का प्रबंधक है।
कहा कि डी-फार्मा का कोर्स कर लीजिए। यह दो साल का कोर्स है। इससे देश में कहीं भी मेडिकल स्टोर या अस्पताल में काम कर सकते हैं। उसकी बातों पर भरोसा करके वह कॉलेज गया। वहां भुजौटी निवासी प्रधानाचार्य मयंक तिवारी से मुलाकात हुई।
डिग्री के लिए दो साल की फीस 2.10 लाख रुपये बताई गई। एडमिशन फीस समेत दो साल में उन्होंने कुल 2.35 लाख रुपये ले लिए। कुछ रुपये की रसीद तत्काल दी और कुछ की बाद में देने की बात कही। वर्ष 2017 में कोर्स पूरा हो गया और वर्ष 2018 में मार्कशीट व सर्टिफिकेट उपलब्ध करा दिया।
बताया कि डी-फार्मा की डिग्री के बाद लखनऊ में रजिस्ट्रेशन होता है, जिसके लिए 50 हजार रुपये फीस लगती है। आप जमा कर दीजिए, मैं रजिस्ट्रेशन करा दूंगा। उनपर भरोसा करके रजिस्ट्रेशन के लिए 50 हजार रुपये दे दिए। बाद में लखनऊ फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया की ओर से बताया गया कि आवेदन में संलग्न डी- फार्मा के अभिलेख फर्जी हैं। 31 जनवरी 2021 को उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की ओर से लखनऊ के गाजीपुर थाने में राकेश के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने का पत्र मिला। इस मामले में कॉलेज से फर्जी डिग्री प्राप्त करने वाले 136 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था।
