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Mau News: खर-पतवार से पटे माइनर, नहीं आ रहा पानी
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जामडिह मधुबन माइनर
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मऊ। धान की नर्सरी तैयार हो गई है, ज्यादातर माइनर में पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों को धान की रोपाई पिछड़ने की चिंता सताने लगी है। कहने के लिए जिले में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल सहित तीन नहरें हैं, लेकिन किसानों को जरूरत के समय खेतों की सिंचाई के लिए माइनरों में पानी नहीं छोड़ा जा सका है। कई माइनर खर पतवार से पटे पड़े हैं।
सिंचाई के अभाव में अभी तक तक 20 प्रतिशत ही धान की रोपाई हो सकी है। परेशान किसान चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। जिले में कृषि योग्य कुल भूमि 1.71 लाख हेक्टेयर है। सिंचाई के लिए जिले में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल सहित तीन नहरें हैं। इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनर हैं। धान की नर्सरी तैयार हो गई है। जुलाई चल रही है और माइनरों में पानी नहीं छोड़ा जा सका है। कई माइनर खर पतवार से पटे पड़े हैं। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल मऊ और बलिया को मिलाकर लगभग 22 हजार हेक्टेयर सिंचित की जाने की क्षमता है। इस समय पंप कैनाल में 12 पंपों की की तुलना आठ ही चल रहे हैं। इसके चलते कई माइनरों में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। कई माइनरों में तली में ही पानी है। शारदा सहायक लिंक नहर की हालत तो और बदतर है। नहर के अधिकांश माइनरों में कभी पानी ही नहीं आता है। कभी कभार दोहरीघाट पंप कैनाल से पानी छोड़ दिया जाता है। हालत यह है कि सिंचाई के अभाव में धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। जिले में अभी तक 20 प्रतिशत ही धान की रोपाई हो पाई है। जिन किसानों ने निजी संसाधनों से धान की रोपाई की भी है तो सिंचाई के अभाव में फसल मुरझा रही है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय मात्रेय का कहना है कि नदी में पानी कम हो गया है। इस समय आठ पंप ही चल रहे हैं। पूरी क्षमता से नहर को चलाने का प्रयास जारी है। जरूरत होने पर माइनरों की सफाई कराई जाती है।
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सिंचाई के अभाव में अभी तक तक 20 प्रतिशत ही धान की रोपाई हो सकी है। परेशान किसान चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। जिले में कृषि योग्य कुल भूमि 1.71 लाख हेक्टेयर है। सिंचाई के लिए जिले में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल सहित तीन नहरें हैं। इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनर हैं। धान की नर्सरी तैयार हो गई है। जुलाई चल रही है और माइनरों में पानी नहीं छोड़ा जा सका है। कई माइनर खर पतवार से पटे पड़े हैं। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल मऊ और बलिया को मिलाकर लगभग 22 हजार हेक्टेयर सिंचित की जाने की क्षमता है। इस समय पंप कैनाल में 12 पंपों की की तुलना आठ ही चल रहे हैं। इसके चलते कई माइनरों में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। कई माइनरों में तली में ही पानी है। शारदा सहायक लिंक नहर की हालत तो और बदतर है। नहर के अधिकांश माइनरों में कभी पानी ही नहीं आता है। कभी कभार दोहरीघाट पंप कैनाल से पानी छोड़ दिया जाता है। हालत यह है कि सिंचाई के अभाव में धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। जिले में अभी तक 20 प्रतिशत ही धान की रोपाई हो पाई है। जिन किसानों ने निजी संसाधनों से धान की रोपाई की भी है तो सिंचाई के अभाव में फसल मुरझा रही है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय मात्रेय का कहना है कि नदी में पानी कम हो गया है। इस समय आठ पंप ही चल रहे हैं। पूरी क्षमता से नहर को चलाने का प्रयास जारी है। जरूरत होने पर माइनरों की सफाई कराई जाती है।
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