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Mau News: 2021 में दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने नहीं उपस्थित हुए प्रशांत सिंह, विभाग फिर भेजेगा नोटिस
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प्रशांत सिंह का आवास।
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जिले के सरवा निवासी और अयोध्या के जीएसटी उपायुक्त प्रशांत सिंह प्रदेश सरकार के समर्थन में इस्तीफा देने के बाद चर्चा में हैं। वहीं उनके बड़े भाई ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पर नौकरी पर छूट पाने का आरोप लगाया है।
उधर, इस प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग भी संज्ञान लेकर मामले की जांच कर रहा है। विभागीय अधिकारी मान रहे है कि 2021 में दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने जीएसटी उपायुक्त को आना था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए।
विभाग नए सिरे से जीएसटी उपायुक्त को नोटिस देने की तैयारी में जुटा है। सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि सरवा निवासी विश्वजीत सिंह की एडी से शिकायत के आधार पर वर्ष 2021 में दो बार आजमगढ़ मेडिकल बोर्ड बुलाया गया था।
पहले बार 28 सितंबर को उन्हें बुलाया गया लेकिन वह नहीं आए। इसके बाद दुबारा मेडिकल बोर्ड ने सात अक्तूबर 2021 को नोटिस जारी कर उन्हें बुलाया, लेकिन इस बार भी नहीं आए।
सीएमओ ने बताया कि शिकायकर्ता का आरोप है कि प्रशांत सिंह ने 2009 में अपने सर्टिफिकेट में बाईं आंख में मैकुलर डिजनरेशन बीमारी का जिक्र किया गया जबकि दाहिनीं आंख में लो विजन बीमारी का जिक्र किया है।
इसमें 40 प्रतिशत का प्रमाणपत्र बनाया गया है। सीएमओ ने बताया कि इस प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद 2009 के मेडिकल बोर्ड द्वारा बनाए गए प्रमाण पत्र की जांच की गई है। अब प्रशांत सिंह को नोटिस भेजा जाएगा, जिससे परीक्षण कर इस शिकायत की जांच हो सकेगी।
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बहन भी कुशीनगर में है तहसीलदार
प्रशांत सिंह पर आरोप लगाने वाले उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह लखनऊ में निजी क्लीनिक चलाते हैं। वहीं प्रशांत सिंह की बहन जया सिंह वर्तमान में कुशीनगर हाटा में तहसीलदार के पद पर तैनात हैं। सरवा स्थित पैतृक आवास पर प्रशांत सिंह के पिता त्रिपुरारी सिंह अकेले ही रहते हैं लेकिन इस घटनाक्रम के बाद उनके घर पर ताला बंद है।
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छात्र नेता से अधिकारी तक का सफर, इस्तीफा और परिवारिक विवाद से लोग चकित
प्रशांत सिंह ने अपनी इंटर तक की पढ़ाई आंबेडकर नगर के टांडा से की। यहां के एनटीपीसी में इनके पिता त्रिपुरारी सिंह नौकरी करते थे। बाद में मऊ में बिजली विभाग में लिपिक के पद पर रहे। ग्रेजुएशन की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से की। बाद में मऊ में आकर कोचिंग खोली। वर्ष 2014-15 के दौरान सपा सरकार में पीसीएस की परीक्षा दी थी। इसके बाद सेल टैक्स विभाग में अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए थे। जीएसटी अधिकारी प्रशांत सिंह प्रशासनिक अधिकारी बनने से पहले राजनीतिक पारी भी खेल चुके हैं। वर्ष 2011 में वह अमर सिंह की पार्टी लोकमंच के जिलाध्यक्ष थे। एक वर्ष से अधिक समय तक वह इस पद पर थे।
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उधर, इस प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग भी संज्ञान लेकर मामले की जांच कर रहा है। विभागीय अधिकारी मान रहे है कि 2021 में दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने जीएसटी उपायुक्त को आना था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए।
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विभाग नए सिरे से जीएसटी उपायुक्त को नोटिस देने की तैयारी में जुटा है। सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि सरवा निवासी विश्वजीत सिंह की एडी से शिकायत के आधार पर वर्ष 2021 में दो बार आजमगढ़ मेडिकल बोर्ड बुलाया गया था।
पहले बार 28 सितंबर को उन्हें बुलाया गया लेकिन वह नहीं आए। इसके बाद दुबारा मेडिकल बोर्ड ने सात अक्तूबर 2021 को नोटिस जारी कर उन्हें बुलाया, लेकिन इस बार भी नहीं आए।
सीएमओ ने बताया कि शिकायकर्ता का आरोप है कि प्रशांत सिंह ने 2009 में अपने सर्टिफिकेट में बाईं आंख में मैकुलर डिजनरेशन बीमारी का जिक्र किया गया जबकि दाहिनीं आंख में लो विजन बीमारी का जिक्र किया है।
इसमें 40 प्रतिशत का प्रमाणपत्र बनाया गया है। सीएमओ ने बताया कि इस प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद 2009 के मेडिकल बोर्ड द्वारा बनाए गए प्रमाण पत्र की जांच की गई है। अब प्रशांत सिंह को नोटिस भेजा जाएगा, जिससे परीक्षण कर इस शिकायत की जांच हो सकेगी।
बहन भी कुशीनगर में है तहसीलदार
प्रशांत सिंह पर आरोप लगाने वाले उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह लखनऊ में निजी क्लीनिक चलाते हैं। वहीं प्रशांत सिंह की बहन जया सिंह वर्तमान में कुशीनगर हाटा में तहसीलदार के पद पर तैनात हैं। सरवा स्थित पैतृक आवास पर प्रशांत सिंह के पिता त्रिपुरारी सिंह अकेले ही रहते हैं लेकिन इस घटनाक्रम के बाद उनके घर पर ताला बंद है।
छात्र नेता से अधिकारी तक का सफर, इस्तीफा और परिवारिक विवाद से लोग चकित
प्रशांत सिंह ने अपनी इंटर तक की पढ़ाई आंबेडकर नगर के टांडा से की। यहां के एनटीपीसी में इनके पिता त्रिपुरारी सिंह नौकरी करते थे। बाद में मऊ में बिजली विभाग में लिपिक के पद पर रहे। ग्रेजुएशन की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से की। बाद में मऊ में आकर कोचिंग खोली। वर्ष 2014-15 के दौरान सपा सरकार में पीसीएस की परीक्षा दी थी। इसके बाद सेल टैक्स विभाग में अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए थे। जीएसटी अधिकारी प्रशांत सिंह प्रशासनिक अधिकारी बनने से पहले राजनीतिक पारी भी खेल चुके हैं। वर्ष 2011 में वह अमर सिंह की पार्टी लोकमंच के जिलाध्यक्ष थे। एक वर्ष से अधिक समय तक वह इस पद पर थे।
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