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Mau News: मत्स्यजीवी सहकारी समिति के गठन पर उठे सवाल, जांच और निरस्तीकरण की मांग
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करहां। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के देवसीपुर गांव में गठित बहुउद्देशीय मत्स्यजीवी सहकारी समिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता श्रीराम सोनकर समेत देवसीपुर, कमालपुर, पहाड़पुर, जमुई और भतड़ी सहित आसपास के गांवों के ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर समिति के गठन, सदस्यता और दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं ने जांच में अनियमितता पाए जाने पर समिति को निरस्त करने और 20 अगस्त को तहसील सभागार में प्रस्तावित पोखरों की नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समिति में ऐसे लोगों को सदस्य बनाया गया है, जो संबंधित गांवों में रहते ही नहीं हैं। कई सदस्यों के नाम कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से जोड़े जाने का भी आरोप लगाया गया है।
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शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक ही परिवार के सात लोगों को समिति का सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा एक मृत व्यक्ति के नाम पर सदस्यता दर्ज होने और सरकारी आशा कार्यकर्त्री को भी समिति में शामिल किए जाने की शिकायत की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने समिति के सचिव और मुख्य प्रवर्तक पर दस्तावेजों में कथित रूप से कूटरचित अभिलेख लगाने का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि शासनादेशों का उल्लंघन करते हुए मत्स्य विभाग के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से समिति का गठन कराया गया और न्याय पंचायत क्षेत्र के दो हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले तालाबों के आवंटन का प्रयास किया जा रहा है।
तालाबों के आवंटन में भी अनियमितता की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही कथित फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर गठित समिति को निरस्त करने की मांग भी की गई है।
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पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता श्रीराम सोनकर समेत देवसीपुर, कमालपुर, पहाड़पुर, जमुई और भतड़ी सहित आसपास के गांवों के ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर समिति के गठन, सदस्यता और दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं ने जांच में अनियमितता पाए जाने पर समिति को निरस्त करने और 20 अगस्त को तहसील सभागार में प्रस्तावित पोखरों की नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखने की मांग की है।
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शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समिति में ऐसे लोगों को सदस्य बनाया गया है, जो संबंधित गांवों में रहते ही नहीं हैं। कई सदस्यों के नाम कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से जोड़े जाने का भी आरोप लगाया गया है।
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शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक ही परिवार के सात लोगों को समिति का सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा एक मृत व्यक्ति के नाम पर सदस्यता दर्ज होने और सरकारी आशा कार्यकर्त्री को भी समिति में शामिल किए जाने की शिकायत की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने समिति के सचिव और मुख्य प्रवर्तक पर दस्तावेजों में कथित रूप से कूटरचित अभिलेख लगाने का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि शासनादेशों का उल्लंघन करते हुए मत्स्य विभाग के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से समिति का गठन कराया गया और न्याय पंचायत क्षेत्र के दो हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले तालाबों के आवंटन का प्रयास किया जा रहा है।
तालाबों के आवंटन में भी अनियमितता की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही कथित फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर गठित समिति को निरस्त करने की मांग भी की गई है।