तहसील क्षेत्र के कसारी खुरहट में चल रहे राम कथा के आठवें दिन कथा वाचक पंडित किशोरी शरण महाराज जी ने प्रभु श्रीराम के चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि राजकुमार राम को भगवान श्रीराम बनाने में कैकई का सबसे बड़ा योगदान है।
उन्होंने कहा कि अगर राम अयोध्या छोड़कर वन गमन नहीं करते तो वह परमात्मा नहीं हो पाते। बताया कि त्याग, तपस्या, कर्म और उपासना के साथ लोगों का परोपकार, उच्च नीच का भेदभाव समाप्त करना, दूसरों के कार्य में अपना जीवन न्योछावर करने वाले जटायु को मोक्ष प्रदान कर प्रभु श्री राम बन सके।
कथा के प्रसंग में बताया कि संतों और ऋषियों और मुनियों का दर्शन, भालू और बंदरों के साथ मित्रता कर उनको सुख प्रदान करना भी राम के चरित्र का एक दूसरा पहलू है। उन्होंने कहा कि शबरी के आश्रम में जाकर बेर खाकर उच्च और नीच का फर्क समाप्त किया। यह राम के चरित्र को उत्तमता प्रदान करता है। इस दौरान डॉक्टर आरएन उपाध्याय, अमित उपाध्याय, संजय यादव आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।