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Mau News: इज्जतघरों की इज्जत बचाने के लाले...दरवाजे टूटे, टोटियां गायब, कहीं कूड़ा भरा तो कहीं रास्ता नहीं
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बड़राव ब्लॉक क्षेत्र के सरबहद बिरइचा में सामुदायिक शौचालय का टूटा दरवाजा। संवाद
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गांवों में 35.47 करोड़ की लागत से बने इज्जतघरों (सामुदायिक शौचालयों) के दरवाजे गायब हैं। अधिकांश जगहों पर टंकी से पानी पहुंचाने के लिए पाइप नहीं लगी हैं। कुछ जगहों पर मोटर जली हुई है तो कहीं अंदर गमलों में कचरा भरा है।
कुछ सामुदायिक शौचालयों तक पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं है। जिले के नौ ब्लॉकों की 645 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। एक भवन बनाने और अन्य व्यवस्थाओं पर लगभग 5.50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
देखरेख और शौचालय खोलने के लिए सभी जगहों पर एक केयर टेकर तैनात किया गया है। उन्हें हर माह 6000 रुपये मानदेय (हर माह 38.70 लाख रुपये) दिया जाता है। साथ ही हर दो माह में सफाई सामग्री पर 3000 रुपये (हर माह 19.35 लाख रुपये) खर्च किए जाते हैं।
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इसके बावजूद अधिकतर सामुदायिक शौचालय उपयोग लायक नहीं हैं। शौचालयों की स्थिति देखकर प्रतीत होता है कि जिम्मेदारों ने लोगों की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि सरकारी धन खपाने के लिए सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया है।
इनका संचालन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जाता है। सुबह 05 से 10 बजे तक और शाम 04 से रात 08 बजे तक इन्हें खोलने का शासनादेश है। लेकिन लापरवाही के कारण ये शौचालय अनुपयोगी बने हुए हैं, जो ग्रामीण स्वच्छता मिशन के उद्देश्यों को विफल कर रहे हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बृहस्पतिवार को पड़ताल कर सामुदायिक शौचालयों की हकीकत जानी। दोहरीघाट ब्लॉक के शाहपुर और फतहपुर मंडाव ब्लॉक के महुई ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय तक जाने के लिए रास्ता ही नहीं है।
चारों तरफ खेती योग्य जमीन है। फसल बोने के बाद और बारिश के समय लोग वहां पहुंच नहीं पाते हैं। केवल एक माह गर्मी के दिनों में खेत खाली रहते हैं, लेकिन उस दौरान भी ताला नहीं खुलता है।
घोसी ब्लॉक के पवनी गांव स्थित सामुदायिक शौचालय की मोटर 07 जून, 2024 को चोरी हो गई थी। इससे यहां पानी की टंकी खाली रहती है। ग्रामीण बाल्टी में पानी लेकर शौचालय जाते हैं। बृहस्पतिवार को शौचालय खुला मिला।
ग्रामीणों ने बताया कि शौचालय रोज सुबह चार बजे खुलता है और 10 बजे बंद होता है। इतनी मेहनत करने के बावजूद कार्यरत केयर टेकर को बीते ढाई साल से मानदेय नहीं मिला है।
कोपागंज ब्लॉक की बाड़ा ग्राम पंचायत के सामुदायिक शौचालय में गंदगी की भरमार है। दरवाजे, फर्श और टोटी टूटी हुई है। पुरुष शौचालय ओवरफ्लो होने से उपयोग लायक नहीं है।
मुस्कुरा सामुदायिक शौचालय भवन के अंदर गंदगी की भरमार थी, जबकि इंदारा, धवरियासाथ, फैजुल्लाहपुर, काछीकला, सोड़सर, भावरकोल, फतहपुर ताल नरजा, सरवां और नौसेमर में भी सुबह शौचालय खुला नहीं मिला।
रतनपुरा ब्लॉक क्षेत्र के पहदेवाजीत में शौचालय का मुख्य और अंदर के सभी दरवाजे टूटे मिले। इसी तरह लसरा, गाढ़ा, करऊत, बीबीपुर, सिधवल, पीपरसाथ, पिंडोहरी, विलौआ, तरवाडीह, नगवां, ठैंचा, इसहाकपुर और खालिसपुर, नसीराबाद खुर्द में केवल कागजों पर ही सामुदायिक शौचालय की देखरेख की जा रही है।
इनसेट-- -
टूट गई शौचालय की सीट, दरवाजे भी गायब
बड़राव ब्लॉक क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय बदहाली के शिकार हैं। अधिकांश शौचालयों में हमेशा ताले लटके रहते हैं, जिससे ग्रामीणों को इनका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। नियमित रखरखाव और संचालन के अभाव में कई शौचालय जर्जर होने लगे हैं। मादी दुल्लह में शौचालय बंद मिला। सरबहद बिरइचा में महिला और पुरुष शौचालय के दरवाजे टूटे हुए थे। अंदर गंदगी फैली थी और सीट सहित अन्य सामान टूटे हुए थे। दोहरीघाट ब्लॉक क्षेत्र के इब्राहीमाबाद में शौचालय बंद था।
कोट-- -
सामुदायिक शौचालयों के शत-प्रतिशत संचालन के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए गांवों में बैठकें की जा रही हैं और ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। यदि कहीं शौचालय बंद रहते हैं तो जांच कर उन्हें संचालित कराया जाएगा। -किरन वर्मा, प्रभारी जिला पंचायतराज अधिकारी, मऊ
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कुछ सामुदायिक शौचालयों तक पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं है। जिले के नौ ब्लॉकों की 645 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। एक भवन बनाने और अन्य व्यवस्थाओं पर लगभग 5.50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
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देखरेख और शौचालय खोलने के लिए सभी जगहों पर एक केयर टेकर तैनात किया गया है। उन्हें हर माह 6000 रुपये मानदेय (हर माह 38.70 लाख रुपये) दिया जाता है। साथ ही हर दो माह में सफाई सामग्री पर 3000 रुपये (हर माह 19.35 लाख रुपये) खर्च किए जाते हैं।
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इसके बावजूद अधिकतर सामुदायिक शौचालय उपयोग लायक नहीं हैं। शौचालयों की स्थिति देखकर प्रतीत होता है कि जिम्मेदारों ने लोगों की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि सरकारी धन खपाने के लिए सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया है।
इनका संचालन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जाता है। सुबह 05 से 10 बजे तक और शाम 04 से रात 08 बजे तक इन्हें खोलने का शासनादेश है। लेकिन लापरवाही के कारण ये शौचालय अनुपयोगी बने हुए हैं, जो ग्रामीण स्वच्छता मिशन के उद्देश्यों को विफल कर रहे हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बृहस्पतिवार को पड़ताल कर सामुदायिक शौचालयों की हकीकत जानी। दोहरीघाट ब्लॉक के शाहपुर और फतहपुर मंडाव ब्लॉक के महुई ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय तक जाने के लिए रास्ता ही नहीं है।
चारों तरफ खेती योग्य जमीन है। फसल बोने के बाद और बारिश के समय लोग वहां पहुंच नहीं पाते हैं। केवल एक माह गर्मी के दिनों में खेत खाली रहते हैं, लेकिन उस दौरान भी ताला नहीं खुलता है।
घोसी ब्लॉक के पवनी गांव स्थित सामुदायिक शौचालय की मोटर 07 जून, 2024 को चोरी हो गई थी। इससे यहां पानी की टंकी खाली रहती है। ग्रामीण बाल्टी में पानी लेकर शौचालय जाते हैं। बृहस्पतिवार को शौचालय खुला मिला।
ग्रामीणों ने बताया कि शौचालय रोज सुबह चार बजे खुलता है और 10 बजे बंद होता है। इतनी मेहनत करने के बावजूद कार्यरत केयर टेकर को बीते ढाई साल से मानदेय नहीं मिला है।
कोपागंज ब्लॉक की बाड़ा ग्राम पंचायत के सामुदायिक शौचालय में गंदगी की भरमार है। दरवाजे, फर्श और टोटी टूटी हुई है। पुरुष शौचालय ओवरफ्लो होने से उपयोग लायक नहीं है।
मुस्कुरा सामुदायिक शौचालय भवन के अंदर गंदगी की भरमार थी, जबकि इंदारा, धवरियासाथ, फैजुल्लाहपुर, काछीकला, सोड़सर, भावरकोल, फतहपुर ताल नरजा, सरवां और नौसेमर में भी सुबह शौचालय खुला नहीं मिला।
रतनपुरा ब्लॉक क्षेत्र के पहदेवाजीत में शौचालय का मुख्य और अंदर के सभी दरवाजे टूटे मिले। इसी तरह लसरा, गाढ़ा, करऊत, बीबीपुर, सिधवल, पीपरसाथ, पिंडोहरी, विलौआ, तरवाडीह, नगवां, ठैंचा, इसहाकपुर और खालिसपुर, नसीराबाद खुर्द में केवल कागजों पर ही सामुदायिक शौचालय की देखरेख की जा रही है।
इनसेट
टूट गई शौचालय की सीट, दरवाजे भी गायब
बड़राव ब्लॉक क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय बदहाली के शिकार हैं। अधिकांश शौचालयों में हमेशा ताले लटके रहते हैं, जिससे ग्रामीणों को इनका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। नियमित रखरखाव और संचालन के अभाव में कई शौचालय जर्जर होने लगे हैं। मादी दुल्लह में शौचालय बंद मिला। सरबहद बिरइचा में महिला और पुरुष शौचालय के दरवाजे टूटे हुए थे। अंदर गंदगी फैली थी और सीट सहित अन्य सामान टूटे हुए थे। दोहरीघाट ब्लॉक क्षेत्र के इब्राहीमाबाद में शौचालय बंद था।
कोट
सामुदायिक शौचालयों के शत-प्रतिशत संचालन के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए गांवों में बैठकें की जा रही हैं और ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। यदि कहीं शौचालय बंद रहते हैं तो जांच कर उन्हें संचालित कराया जाएगा। -किरन वर्मा, प्रभारी जिला पंचायतराज अधिकारी, मऊ

बड़राव ब्लॉक क्षेत्र के सरबहद बिरइचा में सामुदायिक शौचालय का टूटा दरवाजा। संवाद