Amar Ujala Exclusive: निर्यातक बनेंगे किसान, बीईडीएफ को दी गई जिम्मेदारी, वैज्ञानिक कर रहे वर्कशॉप
दुबई से लेकर दूसरे खाड़ी देशों में रहने वाले अब बासमती का निर्यात किसान सीधे कर सकेंगे। किसानों को निर्यातक बनाने की बीईडीएफ को जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए देशभर में बीईडीएफ के वैज्ञानिक कर रहे वर्कशॉप, मोदीपुरम में एक मात्र केंद्र
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बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम (बीईडीएफ) के कंधों पर एक और बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। विदेशों में बासमती के निर्यात को बढ़ाकर देश विदेश में डंका बजाने वाली बीईडीएफ को देश के किसानों के उत्पादों को सीधे निर्यात करने की जिम्मेदारी दी गई है। जिसके लिए देशभर में वर्कशॉप शुरू की गई हैं।
बीईडीएफ का देश में एक मात्र केंद्र मोदीपुरम में है। देश में एफपीओ फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन को बढ़ावा देकर देश में किसानों के कृषि उत्पादों को सीधे खेतों से ही निर्यात किया जाए। केंद्र सरकार का भी सबसे ज्यादा इसी पर जोर है किसानों को सीधे-सीधे लाभ मिले और किसान एफपीओ के माध्यम से बड़े निर्यातक बन जाएं।
बीईडीएफ मोदीपुरम सेंटर के प्रभारी व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि हमारा देश अभी बासमती का 155 से ज्यादा देशों में निर्यात करता है। अब किसानों के यहां पैदा होने वाले उत्पादों को भी निर्यात कराने में अहम भूमिका निभाएगा। सीधे किसान निर्यात करेंगे ओर लाभ लेंगे। किसानों के यहां पर पैदा होने वाले किसी भी उत्पाद को किसान एफपीओं के माध्यम से निर्यात कर सकेगा।
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क्या है एफपीओ
डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि कोई भी किसान अकेले निर्यात नहीं कर सकता है। इसलिए केंद्र सरकार ने जोर दिया है कि वह एफपीओ, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन बनाए और सभी को साथ लेकर निर्यात को बढ़ावा दे। अभी तक मेरठ मंडल में करीब 82 एफपीओ हो गए हैं। धीरे-धीरे प्रदेश और अन्य प्रदेशों में भी इसे बढ़ाया जा रहा है।
कैसे बनते हैं निर्यातक
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि इसके लिए आईईसी (आयात-निर्यात कोड) को डीजीएफटी डॉट जीओवी डॉट इन साइट पर जाकर आईईसी ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है।
दूसरे चरण में आईईसी मिलने के बाद एपीडा, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण का सदस्य बनना होता है। एपीडा डॉट जीओवी डॉट इन साइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर (आरसीएमसी) पंजीकरण सह सदस्यता प्रमाणपत्र लेना होता है जिसके बाद निर्यात किया जाता है।
यहां हो गई वर्कशॉप
डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगना, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, यूपी, हिमाचल आदि में वर्कशॉप हो गई है। अन्य जगह पर भी वर्कशॉप की जा रही है। किसान बासमती के अलावा गुड़, शक्कर, आम, शहद, हरी सब्जी समेत अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कर सकेंगे।