Central Mrket: व्यापारी नेताओं की मांग, दोषी अधिकारियों के घर भी चले बुलडोजर, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
मेरठ शास्त्रीनगर आवासीय योजना संख्या 7 में आवास एवं विकास परिषद द्वारा स्वीकृत ले-आउट और धरातल की स्थिति में भारी अंतर सामने आया है। विभाग के मूल नक्शे में केवल 230 व्यावसायिक भूखंड प्रस्तावित थे लेकिन वर्तमान में आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों का दायरा इससे चार गुना ज्यादा बढ़ चुका है। योजना की कुल 6379 संपत्तियों में से 5409 में वास्तविक प्रयोग हो रहा है जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विभाग उन 859 संपत्तियों पर कार्रवाई कर रहा है जिनका उपयोग परिवर्तित किया गया है।
हैरानी की बात यह है कि जो प्लॉट मूल रूप से कॉमर्शियल (व्यावसायिक) थे उनमें भी मानकों की धज्जियां उड़ाई गईं। अधिकारियों के अनुसार कई शोरूम और कॉम्प्लेक्स बिना सेटबैक छोड़े नाली से सटाकर बना दिए गए हैं। आने वाले समय में इन पर भी विभागीय हथौड़ा चलना तय माना जा रहा है।
हालांकि धरने पर बैठे व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि ये तमाम निर्माण तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत और देखरेख में हुए इसलिए गाज सिर्फ व्यापारियों पर गिरना न्यायसंगत नहीं है। व्यापारियों का तर्क है कि यदि उस समय अधिकारियों ने इन नियमों का पालन कराया होता तो आज यह संकट की स्थिति पैदा ही नहीं होती।
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किस सेक्टर में क्या है स्थिति
योजना के तहत सेक्टर-1 से 13 तक कुल 6379 आवासीय भवन हैं। सेक्टर-2 में सबसे अधिक 1325 भवन हैं जिनमें 985 में वास्तविक उपयोग हो रहा है जबकि 293 में उपयोग परिवर्तित पाया गया। यहां सबसे ज्यादा 47 व्यावसायिक प्लॉट हैं।
सेक्टर-3 में कुल 96 आवासीय संपत्तियों में से 813 वास्तविक उपयोग में हैं, जबकि 132 परिवर्तित हैं। यहां 15 व्यावसायिक प्लॉट हैं। वहीं सेक्टर-2 में 47, सेक्टर-3 मे 15, सेक्टर-6 में 48, सेक्टर-9 में 7, सेक्टर-12 में 30 और सेक्टर-13 में 83 समेत कुल 230 व्यावसायिक प्लॉट आवंटित थे।
व्यापारी नेताओं ने खोला अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा
व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि सारा नुकसान व्यापारी झेल रहा है, जबकि भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी सुरक्षित हैं। संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों की संपत्ति पर भी बुलडोजर चलना चाहिए। वहीं दूसरे गुट के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माण कराकर कई अधिकारी विदेश तक में बस गए हैं जिनकी जांच कर सख्त सजा दी जानी चाहिए।
मेरठ व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष जीतू सिंह नागपाल, महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा, सुदीप जैन, नीरज मित्तल, नितिन गर्ग, और शुभम दबलिश ने भी अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। व्यापारियों का गंभीर आरोप है कि पुलिस ने अधिकारियों पर बेहद हल्की धाराएं लगाकर उन्हें संरक्षण दिया है और एफआईआर दर्ज होने के महीनों बाद भी कोई ठोस गिरफ्तारी या कार्रवाई नहीं की गई।
क्या हैं निर्माण के नियम
नई भवन निर्माण उपविधि के अनुसार
100 वर्ग मीटर से कम: फ्रंट में 1.5 मीटर सेटबैक अनिवार्य।
100 से 300 वर्ग मीटर: फ्रंट में 3 मीटर और रियर में 1.5 मीटर सेटबैक जरूरी।
300 से 1000 वर्ग मीटर: बड़े निर्माणों के लिए भी विशिष्ट सेटबैक की अनिवार्यता है।

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