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Exclusive: ताकत खो रही मिट्टी, अनाज और सब्जियों की बिगड़ी सेहत, जांच में सामने आया सच  

मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 18 Sep 2020 02:26 AM IST
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सार

- मिट्टी के 19 हजार 395 नमूनों की जांच में सामने आया सच
- रसायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी में पोषक तत्व हुए कम

Exclusive: Soil is losing Power, grains and vegetables deteriorates
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विस्तार

बागपत में रसायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से जमीन सेहत खो रही है। मुख्य और सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी वाली मिट्टी में पैदा किए जा रहे गेहूं, दलहन और सब्जियों में पोषक तत्व कम होने लगे है। इसका सीधा नुकसान लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हुई हैं। दांत और आंखों के रोग भी बच्चों को घेर रहे हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा में साल 2020 में अब तक मिट्टी के 184 नमूनों की जांच हुई। इसके अलावा सहकारी चीनी मिल रमाला में साल 2019 में 14 हजार 176 और साल 2020 में पांच हजार 35 किसानों ने मिट्टी के नमूनों की जांच कराई। कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के फसल उत्पादन विशेषज्ञ डॉ संदीप चौधरी और लैब इंचार्ज रविंद्र मलिक ने बताया कि जांच रिपोर्ट चिंता पैदा कर रही है।
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मिट्टी में मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की कुछ एरिया में 40 से 50 फीसदी तक कमी हो गई है। सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, लोहा, सल्फर और कैल्शियम की मात्रा हर साल घट रही है। मिट्टी की सेहत खराब होने के कारण फसलों में पोषक तत्व कम होने शुरू हो गए हैं, जिससे लोगों की सेहत पर असर होगा।

रसायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग के कारण यह हालात पैदा हुए हैं। कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के प्रभारी डॉ गजेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि रसायनिक खादों ने मिट्टी के पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ दिया है। भविष्य के लिए बड़ी चिंता की वजह है।

हरी सब्जियां इस तरह खो रही सेहत
डॉ संदीप चौधरी बताते हैं कि पालक को लोग इसलिए खाते हैं कि इसमें लोहा अधिक होता हैं। मगर, मिट्टी में सूक्ष्म पोषक लोह तत्व की कमी है, इस वजह से पालक की गुणवत्ता प्रभावित होना लाजिमी है।

इस तरह पड़ रहा शरीर पर प्रभाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ गजेंद्र पाल सिंह कहते हैं कि शरीर के लिए प्रोटीन जरूरी है। प्रोटीन के लिए लोग दाल खाते हैं, लेकिन जिन खेतों में यह फसल उगाई जा रही है, वहां पर मुख्य पोषक तत्व और सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो गए हैं। ऐसे में दाल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो जाएगी।

क्या किया जा रहा उपाय
डॉ संदीप चौधरी बताते हैं कि लोगों की सेहत बचाने और मिट्टी की कमियों को देखते हुए अब कृषि वैज्ञानिक किसानों को बायोफोर्टिफाइड बीजों के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ऐसे बीजों में पहले से ही पोषक तत्व होते हैं और इनसे उगाई गई फसलों में पोषक तत्व भरपूर मिलेंगे।

घटती जोत और फसल चक्र भी जिम्मेदार
किसानों के पास जोत घट रही है। ऐसे में फसल चक्र नहीं बदला जा रहा है। गेहूं के बाद गन्ना और गन्ने के बाद गेहूं की पारंपरिक खेती से भी जमीन को नुकसान हो रहा है।

कार्बोहाइड्रेट की कमी
कृषि वैज्ञानिक डॉ संदीप चौधरी बताते हैं कि आलू और चावल से कार्बोहाइड्रेट मिलता है। किसान उगा रहे हैं, लेकिन इसकी गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। जिसका नुकसान लोगों को शुरू हो गया है और भविष्य में बढ़ेगा।

कैल्शियम की कमी से बिगड़ रही सेहत
एसीएमओ डॉ यशवीर सिंह बताते हैं कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और कैल्शियम सबसे ज्यादा जरूरी है। कैल्शियम की कमी से दांतों और हड्डियों की बीमारियां सबसे अधिक बढ़ गई है।

सेहत के लिए नियम चेकअप जरूरी
न्यूट्रीशियन डॉ मीना मित्तल का कहना है कि समय-समय पर जांच जरूरी है। रोजाना की डाइट में आंवला, संतरा, अमरूद या अन्य फल जरूर शामिल करें। नियमित चेकअप का लाभ यह होगा कि जिस पोषक तत्व की कमी मिलेगी, उसकी पूर्ति की जा सकेगी।

किसान अब संभले तो लगेंगे 15 साल
किसान अगर दोबारा जैविक खेती की ओर लौटें और रसायनिक खाद छोड़कर गोबर खाद और देशी तौर तरीकों का प्रयोग करें तो मिट्टी की सेहत सुधरने में 15 साल लग जाएंगे। लैब इंचार्ज डॉ रविंद्र मलिक का कहना है कि मिट्टी धीरे-धीरे खराब हुई है और यह धीरे-धीरे ही ठीक होगी।

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