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कपसाड़ कांड: पारस की जो उम्र 10वीं की मार्कशीट में, वही पांचवीं के रिकॉर्ड में, सोमवार को आएगा कोर्ट का फैसला

अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Sun, 08 Feb 2026 11:27 AM IST
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सार

Meerut News: मेरठ के सरधना स्थित कपसाड़ गांव में रूबी के अपहरण के दौरान उसकी मां सुनीता की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपी पारस सोम जेल में है और उसके बालिग या नाबालिग होने को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 

Kapsaad incident: Paras's age as in 10th mark sheet is same as in class 5 record, decision will come on Monday
रूबी और आरोपी पारस सोम का फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

कपसाड़ गांव की युवती रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के आरोपी पारस सोम की उम्र पर अदालत सोमवार नौ फरवरी को फैसला सुनाएगी। शनिवार को अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट एससीएसटी एक्ट में सुनवाई हुई। वादी पक्ष कोर्ट में कक्षा चार के शैक्षिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। पारस बालिग है या नाबालिग, इस पर अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस पूरी हुई। कोर्ट ने अपने निर्णय को सुरक्षित करते हुए सुनवाई के लिए नौ फरवरी की तारीख नियत कर दी।
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आठ जनवरी को सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में वारदात हुई थी। पारस सोम पर रूबी का अपहरण करने और विरोध करने पर उसकी मां सुनीता की फरसे से प्रहार कर हत्या करने का आरोप है। वर्तमान में आरोपी पारस जेल में बंद है। पारस के परिजनों ने अधिवक्ताओं के पैनल संजीव राणा, सुनील शर्मा, विजय शर्मा, बलराम सोम के जरिए अदालत में प्रार्थना पत्र देकर उसके नाबालिग होने का दावा किया था। प्रार्थना पत्र की सुनवाई एससी एसटी एक्ट न्यायालय एडीजे मोहम्मद असलम सिद्दीकी कोर्ट में चल रही है।
 
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पहले वादी रूबी पक्ष ने न्यायालय में तर्क दिया था कि आरोपी की उम्र की जांच के लिए उसका पांचवीं कक्षा का रिकॉर्ड तलब किया जाना चाहिए। वहीं आरोपी के अधिवक्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि जन्मतिथि का निर्धारण 10वीं कक्षा की मार्कशीट के आधार पर होना चाहिए। इसलिए पारस सोम की 10वीं की मार्कशीट से संबंधित रिकॉर्ड तलब किया जाए। 
 

इसके बाद वादी के अधिवक्ता ने पांचवीं कक्षा से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड तलब करने के लिए विधि व्याख्या देने हेतु समय मांगा था, लेकिन गत मंगलवार को हुई सुनवाई में वादी के अधिवक्ता की ओर से कोई साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर न्यायालय ने आदेश के लिए पत्रावली आरक्षित कर ली थी।
 

अदालत में गत बुधवार को फिर सुनवाई हुई। वादी पक्ष ने पारस का कक्षा पांचवीं का रिकार्ड पेश किया, मगर इस रिकार्ड में भी पारस की वो ही जन्म तिथि पाई गई, जो हाई स्कूल की मार्कशीट में 11 मई 2008 है। आरोपी के अधिवक्ता संजीव राणा ने दोनों प्रमाण पत्र में ही एक ही जन्म तिथि पाए जाने पर पारस का नाबालिग बताकर उसका मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड में चलाने की मांग की। इस पर अभियोजन (रूबी पक्ष ) ने अदालत से पारस का चौथी क्लास तक का रिकार्ड देने के लिए समय मांगा था।
 

शनिवार को अदालत में सुनवाई हुई। वादी पक्ष कोर्ट में पारस का कक्षा चार का प्रमाण पत्र पेश नहीं कर सका। दोनों पक्षों की उम्र को लेकर जिरह हुई। अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित करते हुए सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख नियत कर दी।
 
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