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किडनी रैकेट: दो साल से चल रहा था खेल, कई शहरों से भेजते थे मरीज, दिल्ली-मेरठ के दलालों की प्लानिंग का खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 31 Mar 2026 10:25 PM IST
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सार

कानपुर के केशवपुरम स्थित एक निजी अस्पताल में दो साल से अवैध किडनी प्रत्यारोपण का खेल चल रहा था। जांच में सामने आया कि दिल्ली और मेरठ के दलाल मरीजों और डोनरों को लाकर प्रत्यारोपण कराते थे।

Kidney Racket: Illegal kidney transplant racket running for two years busted in Kanpur
किडनी रैकेट का खुलासा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कानपुर के केशवपुरम स्थित एक निजी अस्पताल में करीब दो साल से अवैध तरीके से किडनी प्रत्यारोपण का खेल चल रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दिल्ली, मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से मरीजों और डोनरों को लाकर यहां किडनी प्रत्यारोपण किया जाता था।

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पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच में इस पूरे नेटवर्क के कई पहलुओं का खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार दिल्ली और मेरठ के दलालों ने मिलकर इस पूरे रैकेट की योजना बनाई थी और अलग अलग शहरों से मरीजों को यहां लाया जाता था।

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तीन मार्च को हुआ था विदेशी महिला का प्रत्यारोपण
इस वर्ष तीन मार्च को दक्षिण अफ्रीका की महिला अरेबिका का किडनी प्रत्यारोपण इसी अस्पताल में किया गया था। पुलिस को इसकी सूचना मिलने के बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया था, लेकिन मरीज और उनके रिश्तेदार शहर से निकल गए थे।

जांच के दौरान पता चला कि सर्जरी के बाद महिला को कुछ दिन कल्याणपुर के एक नर्सिंगहोम के गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली ले जाया गया और फिर नोएडा के एक निजी अस्पताल में डेढ़ से दो माह तक उनका इलाज चला।

कई शहरों से लाए जाते थे मरीज
पुलिस के अनुसार इस अस्पताल में दिल्ली, मेरठ, नोएडा और एनसीआर क्षेत्र से मरीजों और डोनरों को लाकर किडनी प्रत्यारोपण किया जा रहा था। अब तक यहां सात किडनी प्रत्यारोपण होने की जानकारी सामने आई है।

जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के कुछ कर्मचारी कल्याणपुर, काकादेव और पनकी क्षेत्र के कई अधिकृत और अनधिकृत नर्सिंगहोम से जुड़े हुए थे। इन स्थानों के माध्यम से मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का नेटवर्क चलाया जा रहा था।

अस्पताल को नहीं थी अनुमति
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिस अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण किया जा रहा था, उसे इस तरह की सर्जरी की अनुमति नहीं थी। अस्पताल में नर्सिंगहोम और गहन चिकित्सा कक्ष की सुविधा तो थी, लेकिन गुर्दे से जुड़ी सर्जरी करने के लिए वह अधिकृत नहीं था। जांच में यह भी सामने आया कि प्रत्यारोपण करने वाली टीम अपने साथ कई उपकरण लेकर आती थी और ऑपरेशन थियेटर में दो टेबल का उपयोग कर सर्जरी की जाती थी।

संयुक्त कार्रवाई में खुला मामला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अवैध अंग प्रत्यारोपण की सूचना मिलने के बाद क्राइम ब्रांच, खुफिया इकाई और अन्य टीमें सक्रिय की गई थीं। स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क किया गया था। नए मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त योजना बनाकर घेराबंदी की और पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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