सेंट्रल मार्केट: भ्रष्टाचार की नींव पर अवैध निर्माण, चौपट हुआ कारोबार, व्यापारी बोले-अधिकारी हैं असली गुनहगार
Central Market News: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद व्यापारियों में भारी रोष है। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माण वर्षों तक अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ और अब दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
विस्तार
मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने हजारों व्यापारियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेशों के बाद अब व्यापारियों का गुस्सा उन अधिकारियों पर फूट पड़ा है जिनकी नाक के नीचे वर्षों तक यह अवैध निर्माण होता रहा।
आहत व्यापारियों का कहना है कि यदि अधिकारी शुरुआत में ही ईमानदार रहते तो आज सैकड़ों व्यापारी सड़क पर न आते। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि जिस तरह उनका रोजगार उजाड़ा गया है उसी तरह भ्रष्टाचार में डूबे इन अधिकारियों के घरों पर भी बुलडोजर चलना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि जब तक इन भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्तियों की कुर्की और जेल भेजने की कार्रवाई नहीं होगी तब तक न्याय अधूरा है।
16 अक्तूबर 2025 को आवास विकास परिषद मेरठ के अधिशासी अभियंता आफताब अहमद की तहरीर पर आईपीसी की धारा 218 और 217 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 17 दिसंबर 2024 को आवासीय भूखंड संख्या 661/6 पर बने व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स को तीन महीने में खाली कराने और उसके दो सप्ताह के भीतर ध्वस्त करने के आदेश के बाद की गई थी। यह कॉम्प्लेक्स आवासीय भूमि पर अवैध रूप से बनाया गया था। इसमें 22 व्यापारियों के प्रतिष्ठान थे।
आवास विकास के अधिकारियों ने अक्तूबर 2025 में कॉम्पलेक्स को ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद सेंट्रल मार्केट के आवासीय भूखंड पर बने 44 प्रतिष्ठानों को सील करने का आदेश दिया गया। बुधवार को इन भवनों को भी सील कर दिया गया। अब 859 अवैध निर्माण ध्वस्त करने का आदेश दिया गया। आहत व्यापारी अवैध निर्माण के दौरान आंख मूंदकर बैठे अधिकारियोें पर भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि आवास विकास के 42 अधिकारी और कर्मचारियों को तुरंत जेल भेजा जाना चाहिए। दो लोगों के हाथ मिले और सेंट्रल मार्केट खड़ा हो गया। जब सेंट्रल मार्केट को सील कर रहे हैं तो आवास विकास के अधिकारियों को अभी तक जेल क्यों नहीं भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट के सामने व्यापारियों का मजबूत पक्ष नहीं रखा गया। जब निर्माण हुआ तब सरकार किसकी थी यह आप सब जानते हैं। समाधान होना चाहिए राजनीति नहीं। गोपाल अग्रवाल ने कहा कि यह बंद चेतना और दुख का बंद है। 25 साल से व्यापारी की कॉमर्शियल रजिस्ट्री है, जीएसटी नंबर है, बिजली का बिल कॉमर्शियल है। व्यापारियों ने कोई कब्जा नहीं किया। जमीन भी व्यापारियों की ही है बस भू-उपयोग परिवर्तन हुआ है। बीते वर्षों में पांच मिनट में मामले सुलझ गए लेकिन अब इच्छा शक्ति की कमी है।
व्यापारी नहीं, अधिकारी हैं असली गुनहगार
संयुक्त व्यापार संघ के मंत्री अंकित गुप्ता ने कहा कि पहले व्यापारियों को बचाने का उद्देश्य था। अब जब व्यापार उजड़ चुका है तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उउन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दोषी अधिकारियों की संपत्ति की जांच कराने के साथ ही उनके घर पर भी बुलडोजर चलाने की मांग की।
एसपीएन सिंह (अधीक्षण अभियंता), जीएस पालीवाल (से.नि. अधीक्षण अभियंता), जमना प्रसाद (से.नि. अधिशासी अभियंता), एके जैन (अधिशासी अभियंता), आरके गुप्ता (अधिशासी अभियंता), नरसिंह प्रसाद (अधीक्षण अभियंता) , एके बंसल (से.नि. अधीक्षण अभियंता), सीके जैन (अधीक्षण अभियंता), अरविंद कुमार (अधीक्षण अभियंता), हरेंद्र सिंह नरेश (से.नि. अधीक्षण अभियंता), राम सहाय सिंह (अधीक्षण अभियंता), ज्ञानेंद्र सिंह (अधीक्षण अभियंता), देवेंद्र सिंह (सहायक अभियंता), रविंद्र कुमार (अवर अभियंता) ,योगेंद्र कुमार वर्मा (अवर अभियंता),उमेश मोहन शर्मा (सहायक अभियंता), पिंकू गौतम (सहायक अभियंता), डीके गोयल (सहायक अभियंता) , वीरेंद्र कुमार (अवर अभियंता) शशि भूषण (सहायक अभियंता) कमल सिंह (अवर अभियंता),संजीव शुक्ला (अवर अभियंता), एनके शर्मा (सहायक अभियंता), सुखबीर सिंह (अवर अभियंता), सोहनपाल (से.नि. सहायक अभियंता), शांति प्रसाद (से.नि. सहायक अभियंता), आरपी सिंह (से.नि. सहायक अभियंता), जगदीश कुमार अरोरा (अवर अभियंता), रतनवीर सिंह (अवर अभियंता), सुरेंद्र कुमार वडेरा (से.नि. सहायक अभियंता), देवराज वर्मा (से.नि. सहायक अभियंता), बसंत लाल मैनी (से.नि. अवर अभियंता), एके भटनागर (से.नि. अवर अभियंता) , ओमपाल सिंह (अवर अभियंता), राम किशन शर्मा (अवर अभियंता), चंद्रभान कश्यप (से.नि. अधिशासी अभियंता), रियाजुद्दीन (अवर अभियंता), आरए वर्मा (अधिशासी अभियंता), जीत सिंह (अवर अभियंता), रविकांत (सहायक अभियंता), श्रीधर भांडेगावकर (से.नि. सहायक अभियंता), आरके सक्सेना (सहायक अभियंता) , भोलानाथ (अधिशासी अभियंता) , चंद्रपाल (अवर अभियंता), मनोहर कुमार (से.नि. अधिशासी अभियंता) के नाम शामिल हैं। (इनमें से चार अधिकारियों की मृत्यु हो चुकी है)।
इन धाराओं में दर्ज है प्राथमिकी
धारा 217: किसी को सजा से बचाने के लिए सरकारी निर्देश का उल्लंघन करना (2 साल तक की सजा)।
धारा 218: आरोपी या संपत्ति को बचाने के लिए गलत सरकारी दस्तावेज तैयार करना (3 साल तक की जेल)।
इस मामले में दर्ज की गई प्राथमिकी की विवेचना जारी है। प्राथमिकी में सात साल से कम सजा की धाराएं लगीं थीं। इसके चलते इनमें गिरफ्तारी नहीं की सकती। विवेचना में जो भी दोषी पाए जाएंगे। उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। - आयुष विक्रम सिंह, एसपी सिटी
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष सुदीप जैन ने जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जनप्रतिनिधियों ने सरकार तक व्यापारियों की बात क्यों नहीं पहुंचाई। जैन ने आवास विकास के अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण से हजारों परिवारों का कारोबार चौपट हो गया।
प्राथमिकी दर्ज हुई तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई
हैंडलूम व्यापार संघ के अध्यक्ष अंकुर गोयल ने कहा कि व्यापारी दोषी नहीं हैं। अधिकारियों को शुरुआत में भी कार्रवाई करनी चाहिए थी। व्यापारियों को हर स्तर पर प्रताड़ित किया गया है। सेंट्रल मार्केट पूरी तरह खत्म हो गया है। उन्होंने पुलिस पर भी सवाल उठाए कि प्राथमिकी दर्ज हुई तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
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