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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Rampur Tiraha Incident: The man who notched up a 'century' of encounters in Muzaffarnagar—nicknamed Birju

रामपुर तिराहा कांड: मुजफ्फरनगर में एनकाउंटर का शतक लगाने वाला, नाम पड़ा बिरजू; कटघरे में हाथ जोड़े खड़ा रहा

Wed, 01 Jul 2026 12:35 AM IST
Mohd Mustakim मदन बालियान, मुजफ्फरनगर
मदन बालियान, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Wed, 01 Jul 2026 12:35 AM IST
सार

Muzaffarnagar News: रामपुर तिराहा कांड में तीन पुलिस कर्मियों को कोर्ट ने डेढ़-डेढ़ साल की सजा सुनाई। एक दोषी झिंझाना का तत्कालीन एसओ ब्रज किशोर इस दौरान सहमा नजर आया। ब्रज किशोर ने 31 साल में 146 मुठभेड़ की थीं।

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Rampur Tiraha Incident: The man who notched up a 'century' of encounters in Muzaffarnagar—nicknamed Birju
सजा के बाद सेवानिवृत्त एसआई अनिल कुमार और रिटायर्ड इंस्पेक्टर ब्रजकिशोर।। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/विशेष न्यायालय सीबीआई कोर्ट में रामुपर तिराहा कांड की पत्रावली में फैसले की घड़ी आई। कठघरे में झिंझाना का तत्कालीन एसओ ब्रज किशोर हाथ जोड़े खड़ा था। पहली बार कानून के शिकंजे में फंसा अभियुक्त यूपी में मुठभेड़ का जनक भी माना गया है। 31 साल पुलिस की नौकरी में 146 मुठभेड़ कीं। अकेले मुजफ्फरनगर में ही मुठभेड़ का शतक लगाया था।
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अलीगढ़ जिले के गांव फतेहपुर निवासी ब्रज किशोर ने यूपी पुलिस में 1980-81 में दरोगा का प्रशिक्षण पूरा किया। पहली पोस्टिंग बिजनौर मिली, फिर मेरठ और 1989 में वह मुजफ्फरनगर पहुंचा। नई मंडी थाने में चार्ज लिया। कांधला, भोपा, तितावी, झिंझाना, मंसूरपुर, चरथावल, पुरकाजी और कैराना थाना में प्रभारी रहा। 
 
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90 के दशक का वह दौर जब मुजफ्फरनगर पर क्राइम कैपिटल का धब्बा लगा था, तब ब्रज किशोर ने यहां पुलिस मुठभेड़ का सिलसिला शुरू किया। बिरालसी में ठाकुर प्रदीप सिंह के भाई को मुठभेड़ में मारा। एसएसपी रहे विजय सिंह के कार्यकाल में ही 30 से ज्यादा मुठभेड़ कीं। पुलिस महकमे में सहकर्मी ब्रज किशोर को बिरजू दादा के नाम से पुकारने लगे थे।
 
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बिजनौर और गाजियाबाद समेत अन्य जिलों के तीन मामलों में चार लोगों की पुलिस हिरासत में मौत के आरोप उनके ऊपर लगे लेकिन साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त हुए। दूसरे अभियुक्त अनिल कुमार उनके साथ चरथावल और झिंझाना थाने में आरक्षी के पद पर करीब चार साल साथ रहे। पांच साल में मुठभेड़ का शतक बनाकर वह पूरे प्रदेश में छाए रहे लेकिन 1994 में रामुपर तिराहा कांड में उनकी गर्दन फंस गई।
 

मंगलवार को सुनवाई के दौरान बिरजू दादा ने फैसले के वक्त कठघरे में हाथ जोड़ लिए। निजी मुचलकों पर बाहर निकलते ही अधिकारियों पर भड़ास निकाली। बोले, किसी ने साथ नहीं दिया। साल 2011 में वह शाहजहांपुर से इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए और परिवार इन दिनों गाजियाबाद में रह रहा है।

शव बहाने के मामले में भी आरोपी
रामपुर तिराहा कांड की सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा की पत्रावली में भी ब्रज किशोर का नाम है। मजिस्ट्रेट कोर्ट में इस पत्रावली का ट्रायल चल रहा है।

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