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त्याग की शिक्षा प्रकृति से मिलती है : भाव भूषण
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 24 Jun 2026 07:03 PM IST
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में शांतिनाथ महामंडल विधान के 35वें दिन 140 परिवारों ने किया पूजन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 35वें दिन 140 परिवारों ने विधान की मांगलिक क्रियाओं में भाग लिया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 भाव भूषण महाराज ने कहा कि त्याग की प्रेरणा प्रकृति से मिलती है।
वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर मानव को ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और समय आने पर अपने पत्तों का भी त्याग कर देते हैं। इसी प्रकार मनुष्य को भी संग्रह की प्रवृत्ति छोड़कर त्याग और परोपकार की भावना अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि धन की सार्थकता जोड़ने में नहीं, बल्कि समाज, धर्म और राष्ट्रहित में उसका सदुपयोग करने में है। उन्होंने औषधि दान, शास्त्र दान, अभय दान और आहार दान को उत्तम त्याग के स्वरूप बताया।
सुबह के समय कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वेदी पर भगवान के जलाभिषेक से हुआ। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक किया। इसके बाद त्रिमूर्ति जिनालय में मंगलाचरण, दिग्वंदन, पात्र शुद्धि एवं जल शुद्धि की क्रियाएं हुईं। शांतिधारा का सौभाग्य जिनेश्वर जैन, संतोष जैन, अंकिता जैन, गरिमा, आकाशी, पलक एवं अग्रीम जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इसके उपरांत नित्य नियम पूजन किया गया।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मन मोहा
विधान के दौरान संगीतमय आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भक्ति नृत्य भी आयोजित किए गए। इसमें जैन परिवारों के सदस्यों ने धार्मिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति दी। पुरस्कारों का वितरण जिनेश्वर जैन परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष जीवेन्द्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार जैन, शशांक जैन, विजय कुमार जैन, वीरेन्द्र कुमार जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कुश जैन, शुभम जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 35वें दिन 140 परिवारों ने विधान की मांगलिक क्रियाओं में भाग लिया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 भाव भूषण महाराज ने कहा कि त्याग की प्रेरणा प्रकृति से मिलती है।
वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर मानव को ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और समय आने पर अपने पत्तों का भी त्याग कर देते हैं। इसी प्रकार मनुष्य को भी संग्रह की प्रवृत्ति छोड़कर त्याग और परोपकार की भावना अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि धन की सार्थकता जोड़ने में नहीं, बल्कि समाज, धर्म और राष्ट्रहित में उसका सदुपयोग करने में है। उन्होंने औषधि दान, शास्त्र दान, अभय दान और आहार दान को उत्तम त्याग के स्वरूप बताया।
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सुबह के समय कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वेदी पर भगवान के जलाभिषेक से हुआ। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक किया। इसके बाद त्रिमूर्ति जिनालय में मंगलाचरण, दिग्वंदन, पात्र शुद्धि एवं जल शुद्धि की क्रियाएं हुईं। शांतिधारा का सौभाग्य जिनेश्वर जैन, संतोष जैन, अंकिता जैन, गरिमा, आकाशी, पलक एवं अग्रीम जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इसके उपरांत नित्य नियम पूजन किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मन मोहा
विधान के दौरान संगीतमय आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भक्ति नृत्य भी आयोजित किए गए। इसमें जैन परिवारों के सदस्यों ने धार्मिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति दी। पुरस्कारों का वितरण जिनेश्वर जैन परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष जीवेन्द्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार जैन, शशांक जैन, विजय कुमार जैन, वीरेन्द्र कुमार जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कुश जैन, शुभम जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद