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Mirzapur News: देश की एकता अखंडता के लिए डाॅ. मुखर्जी ने प्राणों की आहुति दी
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भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करती भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सरोज कुशवाहा,
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मिर्जापुर। लालडिग्गी के एक स्कूल में मंगलवार को जनसंघ के संस्थापक, महान शिक्षाविद् और प्रखर राष्ट्रवादी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जयंती के तहत संस्मरण पखवाड़ा पर कार्यकर्ता सम्मेलन हुआ। वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने देश की एकता व अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
जिलाध्यक्ष लालबहादुर सरोज ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक नेता नहीं, एक विचार थे। वे वर्ष 1947 से 1950 तक, लगभग ढाई वर्ष तक देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री बने।
इस संक्षिप्त अवधि में भी उन्होंने स्वतंत्र भारत की औद्योगिक व्यवस्था की बुनियादी संरचना खड़ी कर दी। वे संविधान सभा के सदस्य भी थे, जिन्होंने भारत के संविधान के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया।
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कहा कि जिन मूल्यों, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, स्वदेशी, राष्ट्रीय एकता, तुष्टिकरण का विरोध को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की थी, वे आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा की मार्गदर्शक नीतियां हैं।
मुख्य अतिथि व महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सरोज कुशवाहा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को परिवार से न केवल बौद्धिक तीक्ष्णता मिली, बल्कि सार्वजनिक सेवा के प्रति गहरा संकल्प भी विरासत में मिला।
1934 में, मात्र 33 वर्ष की आयु में, डॉ. मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने, जो उस समय एशिया के सबसे महत्वपूर्ण विश्वविद्यालयों में से एक था। संचालन शरदेंदुमणि त्रिपाठी हेमंत व संयोजन जिला रवींद्र नारायण पटेल ने किया।
इस मौके पर विधायक रत्नाकर मिश्र, विधायक मझवां शुचिस्मिता मौर्या, क्षेत्रीय मंत्री गुलाब पासी, पूर्व जिलाध्यक्ष लाल बहादुर सिंह, मनोज जायसवाल, अनिल सिंह, बालेंदुमणि त्रिपाठी, दिनेश तिवारी, चेयरमैन नगर पालिका परिषद मिर्जापुर श्याम सुंदर केसरी व अन्य थे।
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जिलाध्यक्ष लालबहादुर सरोज ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक नेता नहीं, एक विचार थे। वे वर्ष 1947 से 1950 तक, लगभग ढाई वर्ष तक देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री बने।
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इस संक्षिप्त अवधि में भी उन्होंने स्वतंत्र भारत की औद्योगिक व्यवस्था की बुनियादी संरचना खड़ी कर दी। वे संविधान सभा के सदस्य भी थे, जिन्होंने भारत के संविधान के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया।
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कहा कि जिन मूल्यों, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, स्वदेशी, राष्ट्रीय एकता, तुष्टिकरण का विरोध को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की थी, वे आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा की मार्गदर्शक नीतियां हैं।
मुख्य अतिथि व महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सरोज कुशवाहा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को परिवार से न केवल बौद्धिक तीक्ष्णता मिली, बल्कि सार्वजनिक सेवा के प्रति गहरा संकल्प भी विरासत में मिला।
1934 में, मात्र 33 वर्ष की आयु में, डॉ. मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने, जो उस समय एशिया के सबसे महत्वपूर्ण विश्वविद्यालयों में से एक था। संचालन शरदेंदुमणि त्रिपाठी हेमंत व संयोजन जिला रवींद्र नारायण पटेल ने किया।
इस मौके पर विधायक रत्नाकर मिश्र, विधायक मझवां शुचिस्मिता मौर्या, क्षेत्रीय मंत्री गुलाब पासी, पूर्व जिलाध्यक्ष लाल बहादुर सिंह, मनोज जायसवाल, अनिल सिंह, बालेंदुमणि त्रिपाठी, दिनेश तिवारी, चेयरमैन नगर पालिका परिषद मिर्जापुर श्याम सुंदर केसरी व अन्य थे।