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दलहनी और प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान बढ़ा सकते हैं आय : डॉ. श्रीराम
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कृषि प्रशिक्षण केंद्र में किसानों को समझाते वक्ता, संवाद
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फोटो संख्या- 29
-राजगढ़ के लहास गांव में कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम, मृदा स्वास्थ्य सुधार व जैविक खेती पर दिया जोर
मिर्जापुर। राजगढ़ ब्लॉक के लहास गांव में बुधवार को मैट्रिक्स फर्टिलाइजर की ओर से आयोजित खेत बचाओ अभियान के तहत कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. श्रीराम सिंह ने किसानों को दलहनी और प्राकृतिक खेती की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान दाल उगाकर आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मृदा की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए गोबर से तैयार कंपोस्ट खाद का प्रयोग आवश्यक है। इससे मिट्टी और फसलों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। किसान आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे।
डॉ. सिंह ने कहा कि अधिक उत्पादन की होड़ में किसान अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं, इससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों को सनई, ढैंचा और लोबिया जैसी हरी खाद वाली फसलों की खेती कर उन्हें खेत में सड़ाकर खरीफ की फसल लेने की सलाह दी। साथ ही प्रतिवर्ष दलहनी फसलों की खेती करने पर बल देते हुए कहा कि दलहन की फसलें प्रति बीघा 30 से 35 किलोग्राम नाइट्रोजन भूमि में छोड़ती हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और फसल चक्र भी संतुलित रहता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों से एक-दो गाय पालने की अपील की। कहा कि गोबर और गोमूत्र के उपयोग से किसान कम लागत में खेती कर सकते हैं। फसलों को रोगमुक्त रख सकते हैं। इससे खेती और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार सिंह ने बागवानी एवं फल संरक्षण पर जानकारी दी। किसानों की निशुल्क मृदा जांच के बारे में भी बताया। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान सोनू कोल, कंपनी के स्टेट मैनेजर अंकुर, मेहुल, इंद्रपाल सिंह, दिवाकर दुबे समेत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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-राजगढ़ के लहास गांव में कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम, मृदा स्वास्थ्य सुधार व जैविक खेती पर दिया जोर
मिर्जापुर। राजगढ़ ब्लॉक के लहास गांव में बुधवार को मैट्रिक्स फर्टिलाइजर की ओर से आयोजित खेत बचाओ अभियान के तहत कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. श्रीराम सिंह ने किसानों को दलहनी और प्राकृतिक खेती की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान दाल उगाकर आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मृदा की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए गोबर से तैयार कंपोस्ट खाद का प्रयोग आवश्यक है। इससे मिट्टी और फसलों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। किसान आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे।
डॉ. सिंह ने कहा कि अधिक उत्पादन की होड़ में किसान अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं, इससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों को सनई, ढैंचा और लोबिया जैसी हरी खाद वाली फसलों की खेती कर उन्हें खेत में सड़ाकर खरीफ की फसल लेने की सलाह दी। साथ ही प्रतिवर्ष दलहनी फसलों की खेती करने पर बल देते हुए कहा कि दलहन की फसलें प्रति बीघा 30 से 35 किलोग्राम नाइट्रोजन भूमि में छोड़ती हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और फसल चक्र भी संतुलित रहता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों से एक-दो गाय पालने की अपील की। कहा कि गोबर और गोमूत्र के उपयोग से किसान कम लागत में खेती कर सकते हैं। फसलों को रोगमुक्त रख सकते हैं। इससे खेती और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में लाभ मिलेगा।
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कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार सिंह ने बागवानी एवं फल संरक्षण पर जानकारी दी। किसानों की निशुल्क मृदा जांच के बारे में भी बताया। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान सोनू कोल, कंपनी के स्टेट मैनेजर अंकुर, मेहुल, इंद्रपाल सिंह, दिवाकर दुबे समेत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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